ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

फरवरी मास में गोचर ग्रह परिवर्तनः इस मास में ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य 13 फरवरी को 0 बजकर 56 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। मंगल 5 फरवरी को प्रातः 10 बज कर 58 मिनट पर वृष राशि में प्रवेश करेगा। बुध 5 फरवरी को रात्रि 9 बज कर 55 मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा और 24 फरवरी को रात्रि 9 बजकर 15 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश कर जाएगा। शुक्र 3 फरवरी को 2 बज कर 50 मिनट पर मार्गी गति में आएगा और 25 फरवरी को प्रातः 6 बज कर 20 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेगा। शेष ग्रह गुरु, शनि, राहु, केतु, प्लूटो, नेप्च्यून और यूरेनस की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन अर्थात 1 फरवरी को बुधवार है और इस मास में चार बुधवारों के साथ-साथ सभी वार चार-2 ही आएंगे। फलस्वरूप फल मध्यम ही दिखता है। बौद्धिक कार्यों की वृद्धि के साथ-साथ नए-नए अविष्कारों की शुरूआत करेगा तथा पूर्व चल रहे कार्यों को गतिशील बनाए रखेगा लेकिन दैनिक उपयोगी वस्तुओं की अत्यधिक महंगाई को लेकर आम जनता में विरोध की भावना पैदा होगी। प्राकृतिक प्रकोपों से खड़ी फसलों के लिए ग्रहयोग हानिकारक है। दिग्गज नेताओं और उच्चस्तरीय शासकों के लिए यह मास अग्नि परीक्षा का तथा नई-नई उलझनों में डालने वाला सिद्ध होगा। 5 फरवरी को मंगल का वृष राशि में प्रवेश कर गुरु और शुक्र दोनो से षडाष्टक योग में आना घरेलू उपयोगी वस्तुओं तथा खाद्य पदार्थों पर अत्यधिक महंगाई करता है। शनि से त्रिएकादश योग में मंगल का आना कहीं वायुयान इत्यादि की दुर्घटनाओं से जनधन की हानि की तरफ संकेत करता है। 13 फरवरी को सूर्य का कंुभ राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन बुध का भी उदय होना भूस्खलन इत्यादि प्राकृतिक प्रकोपों को अधिक लाता है। यह योग उच्चस्तरीय शासक वर्गों के लिए भी हानिप्रद है। कहीं राजनैतिक परिवर्तन भी लाता है एवं शासकों को विषमय परिस्थितियों में धकेलता है। 24 फरवरी को बुध का मीन राशि में आकर राहु के साथ संबंध बनाना तथा इसी दिन शुक्र का सूर्य के साथ संबंध बनाना ये दोनों योग चैपाये पशुओं को कोई नए रोग से पीड़ित करते हैं। पुरातन धार्मिक उन्मादों के पुनः जागृत होने से जनमानस के हृदय में फिर से भय एवं परस्पर विरोधाभास की परिस्थितियां पुनः जागृत करते हैं। इस तनाव को लेकर सैन्य बल को सीमाओं पर सतर्क एवं गतिशील रहना चाहिए। सोना व चांदी: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का धनिष्ठा नक्षत्र पर प्रवेश होकर विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु को वेधना सोने के बाजार में मंदा ही दर्शाता है लेकिन यह योग चांदी को कुछ तेजी के वातावरण में रखेगा। 3 फरवरी को शुक्र का मार्गी गति में आना सोने और चांदी में पुनः तेजी का रुख बना देगा। 5 फरवरी को मंगल वृष राशि में आकर शुक्र और गुरु दोनों से षडाष्टक योग बनाएगा। यह योग बाजार की तेजी को और बढ़ावा देने वाला दिखाई देता है। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर अश्विनि, श्रवण, विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु को वेध में लेना सोने में चल रही तेजी की लहर को और बढ़ावा देता है। 9 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना बाजार के रुख में बदलाव ला सकता है अर्थात सोने और चांदी के बाजार को उतार-चढ़ाव के साथ पुनः मंदे के रुझान में ले जाएगा और बाजार में अस्थिरता बनाए रखेगा। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना तथा फाल्गुन मास की संक्रांति का 15 मुहूर्ती होना यह योग बाजार में अस्थिरता अर्थात उतार-चढ़ाव अधिक रखता है, अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 17 फरवरी को बुध का पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश तथा पुनर्वसु नक्षत्र को वेध में लेना बाजार में मंदा ही दर्शाता है तथा बाजार की स्थिति को स्थिर बना देता है। 19 फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आना और पुष्य नक्षत्र स्थित शनि को वेधना सोने और चांदी के बाजार को पुनः हरकत में लाता हुआ तेजी की तरफ ले जाएगा। इसी दिन शुक्र का भी उ. षा. नक्षत्र में प्रवेश चांदी के बाजार में अधिक बदलाव लाता है। 24 फरवरी को बुध का मीन राशि में प्रवेश कर राहु के साथ संबंध बनाना भी तेजी का योग ही बनाता है। 25 फरवरी को शुक्र का मकर राशि में प्रवेश कर शनि की दृष्टि में आना चांदी में तेजी का माहौल बना देगा। इसी दिन मंगल का रोहिणी नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना सोने में भी तेजी का ही रुख बनाए रखेगा। गुड़ एवं खांड: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु को वेधना गुड़ और खांड में तेजी ही दर्शाता है। 3 फरवरी को शुक्र का मार्गी गति में आना खांड के बाजार में मंदे का रुख अपनाएगा। 5 फरवरी को मंगल का वृष राशि में आकर गुरु और शुक्र से षडाष्टक योग में आ जाना गुड़ के बाजार को तेजी के रुझान में ले जाएगा। इसी दिन बुध का कुंभ राशि में आना तथा धनिष्ठा नक्षत्र में बैठकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना, यह योग खांड को मंदे के वातावरण में ही रखेगा। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु को और अश्लेषा नक्षत्र को भी वेध में लेना यह योग गुड़ की चल रही तेजी को और बढ़ावा देगा। खांड के बाजार को पूर्ववत स्थिति में रखेगा। 9 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक बनाएगा, अस्थिरता के साथ-साथ गुड़ की तेजी को बनाए रखेगा। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना तथा फाल्गुन मास की संक्रांति का 15 मुहूर्ती आना, यह योग खांड में तेजी को और बढ़ावा देता है। इसी दिन बुध का भी उदय हो जाना बाजार में चल रहे रुख में और बढ़ावा देगा। 17 फरवरी को बुध का पू. भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु नक्षत्र को वेध में लेना, यह योग भी बाजार के रूख को तेजी के माहौल में रखता है। 19 फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर पुष्य नक्षत्र स्थित शनि और स्वाति नक्षत्र को वेधना गुड़ और खांड में तेजी बनाए रखता है। इसी दिन शुक्र का उत्तराषाढ़ नक्षत्र में प्रवेश खांड की तेजी को और बढ़ावा देता है। 24 फरवरी को बुध का मीन राशि में प्रवेश कर राहु के साथ राशि संबंध बनाना भी बाजार में अस्थिरता बनाता है। 25 फरवरी को शुक्र का मकर राशि में प्रवेश होना तथा इसी दिन मंगल का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होना और स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना, यह योग भी गुड़ और खांड के बाजार को तेजी के वातावरण की ओर बढ़ावा देता है। अनाज व दालवान: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र स्थित गुरु को वेधना अनाज और दालवान के बाजार में तेजी ही दर्शा रहा है। 3 फरवरी को शुक्र का मार्गी गति में आना गेहूं, जौ चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों में मंदे की लहर बनाएगा। 4 फरवरी को वक्री गति के शनि का पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण में पुनः आ जाना मूंग, मौठ, उड़द, अरहर इत्यादि दालवान में तेजी का रुझान बनाएगा। 5 फरवरी को मंगल का वृष राशि में आकर गुरु और शुक्र दोनों से षडाष्टक योग में आना दालवान में चल रही तेजी को और बढ़ावा देगा। इसी दिन बुध का कुंभ राशि में आना अनाजों के बाजार को कुछ मंदे के माहौल में ही रखेगा। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु को वेधना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजों में तेजी ही दर्शाता है। इसी दिन नेप्च्यून ग्रह का भी धनिष्ठा नक्षत्र में आ जाना उड़द इत्यादि दालवान को तेजी के रुझान में ले जाएगा। 9 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आना तथा पुष्य नक्षत्र स्थित शनि को वेध में लेना दालवान के बाजार में मंदे की लहर चलाएगा। अनाजों में कुछ बदलाव अर्थात अस्थिरता रखता है। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना तथा फाल्गुन मास की संक्रांति का 15 मुहूर्ती में आना दालों में तेजीदायक है। यह योग करियाने के बाजार को भी तेजी में ले जाएगा। इसी दिन बुध का उदय होना अनाजों में भी तेजी ही दर्शा रहा ह। 17 फरवरी को बुध का पू. भाद्र नक्षत्र में आकर पुनर्वसु नक्षत्र को वेध में लेना अनाज और दालवान में कुछ मंदे का कारक है। 19 फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र स्थित शनि और स्वाति नक्षत्र को वेध प्रगति मैदान में 28 जनवरी से 1 फरवरी 2006 तक होने वाली नक्षत्र 2006 प्रदर्शनी में श्री जगदंबा प्रसाद गौड़ जी उपलब्ध रहेंगे। यदि आप अपनी व्यापार संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान चाहते हैं तो फ्यूचर पाॅइंट के कार्यालय से संपर्क कर अग्रिम बुकिंग करवा लें। में लेना गेहूं, जौ, ज्वार, बाजरा इत्यादि के बाजार को तेजी की तरफ धकेलता है। इसी दिन शुक्र का उ.षा. नक्षत्र में आकर पू. भाद्रपद नक्षत्र को वेध में लेना उड़द और मूंग के बाजार को पुनः मंदे के वातावरण में ले जाएगा। 24 फरवरी को बुध का मीन राशि में आकर राहु के साथ राशि संबंध बनाना बाजार में अस्थिरता बनाता है। 25 फरवरी को शुक्र का मकर राशि में आना और मंगल का रोहिणी नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना, ये दोनों योग गेहूं, जौ, चना, ज्वार इत्यादि अनाजों के बाजार को तेजी में ले जाने वाले हैं। करियाने एवं दालवान के बाजार को मंदे के रुख में ही रखेंगे। घी व तेल: मासारंभ में 2 फरवरी को बुध का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु ग्रह को वेधना तेल और तेलवानों में तेजी ही दर्शाता है। 3 फरवरी को शुक्र का मार्गी गति में आना घी के बाजार में बदलाव देकर मंदे की तरफ ले जाएगा। 5 फरवरी को मंगल का वृष राशि में आकर गुरु और शुक्र दोनों से षडाष्टक योग में आ जाना तेल और तेलवान पदार्थों में पूर्व चल रही तेजी को और बढ़ावा देता है। इसी दिन बुध का कुंभ राशि में प्रवेश होना घी के बाजार को मंदे की तरफ रखता है। 6 फरवरी को सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र स्थित गुरु को वेध में लेना तेलों के बाजार में और तेजी बनाने वाला योग है। 9 फरवरी को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र और पुष्य नक्षत्र स्थित शनि को वेध में लेना तेलों में मंदे का कारक है। 13 फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना तथा फाल्गुन मास की संक्रांति का 15 मुहूर्ती में आना यह योग तेल और तेलवान के बाजार को तेजी के वातावरण में ही रखेगा। इसी दिन बुध का उदय होना घी के बाजार में और मंदा बना सकता है। 17 फरवरी को बुध का पू. भाद्र नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु नक्षत्र को वेध में लेना तेलों में तेजी के रुझान को बनाए रखेगा। 19 फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर पुष्य नक्षत्र स्थित शनि को वेधना तेलों में तेजी का ही योग बनाएगा। इसी दिन शुक्र का उ.षानक्षत्र में आकर पू. भाद्रपद नक्षत्र को वेध में लेना घी के बाजार में मंदे का रुख अपनाएगा। 24 फरवरी को बुध का मीन राशि में आकर राहु के साथ राशि संबंध बनाना बाजारों में अस्थिरता पैदा करेगा। 25 फरवरी को शुक्र का मकर राशि में आना तथा मंगल का रोहिणी नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना, यह योग तेलों में तो तेजी का वातावरण बनाए रखेगा लेकिन घी के बाजार को कुछ मंदे के रुझान में ही रखता है।


रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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