जड़ी-बूटियों से भाग्योदय

जड़ी-बूटियों से भाग्योदय  

व्यूस : 3812 | फ़रवरी 2006

जो लोग कीमती रत्न (मणि) खरीदने में असमर्थ हों वे पेड़-पौधों के अवयव या जड़ काम में ला सकते हैं।

उनका वर्णन इस प्रकार है: यह चीजें यूनानी दवाई विक्रेता के यहां उपलब्ध होती हैः

(अ) सूर्य के लिए बेलपत्र लाल या गुलाब धागे में रविवार को धारण करें।

(ब) चंद्र के लिए खिरनी की जड़ सफेद धागे में सोमवार को धारण करें।

(स) मंगल के लिए अनंत मूल की जड़ लाल धागे में मंगलवार को धारण करें।

(द) बुध के लिए विधारा की जड़ हरे धागे में बुधवार को धारण करें।

(क) गुरु के लिये भारंगी की या केले की जड़ गुरुवार को पीले धागे में धारण करें।

(ख) शुक्र के लिए सरपोंखा की जड़ सफेद धागे में शुक्रवार को धारण करना चाहिए।

(ग) शनि के लिए बिच्छू की जड़ शनिवार को नीले धागे में धारण करें।

(घ) राहु के लिए सफेद चंदन का टुकड़ा नीले धागे में बुधवार को और केतु के लिए असगंध की जड़ नीले धागे में गुरुवार को धारण करें।

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रत्न विशेषांक  फ़रवरी 2006

हमारे ऋषि महर्षियों ने मुख्यतया तीन प्रकार के उपायों की अनुशंसा की है यथा तन्त्र, मन्त्र एवं यन्त्र। इन तीनों में से तीसरा उपाय सर्वाधिक उल्लेखनीय एवं करने में सहज है। इसी में से एक उपाय है रत्न धारण करना। ऐसा माना जाता है कि कोई न कोई रत्न हर ग्रह से सम्बन्धित है तथा यदि कोई व्यक्ति वह रत्न धारण करता है तो उस ग्रह के द्वारा सृजित अशुभत्व में काफी कमी आती है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें से प्रमुख हैं- चैरासी रत्न एवं उनका प्रभाव, विभिन्न लग्नों में रत्न चयन, ज्योतिष के छः महादोष एवं रत्न चयन, रोग भगाएं रत्न, रत्नों का शुद्धिकरण एवं प्राण-प्रतिष्ठा, कितने दिन में असर दिखाते हैं रत्न, लाजवर्त मणि-एक नाम अनेक काम इत्यादि। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों के भी महत्वपूर्ण आलेख विद्यमान हैं।

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