ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

अप्रैल मास में गोचर ग्रह परिवर्तनः इस मास में ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य ग्रह 14 अप्रैल को प्रातः 6 बजकर 18 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा। मंगल ग्रह 3 अप्रैल को शाम 4 बजकर 40 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। बुध ग्रह 11 अप्रैल को शाम 5 बजकर 17 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र ग्रह 28 अप्रैल को प्रातः 6 बजकर 42 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश करेगा। शनि ग्रह 5 अप्रैल को शाम 7 बजकर 05 मिनट पर वक्री गति को त्याग कर मार्गी गति में आएगा। शेष ग्रह गुरु, राहु, केतु, प्लूटो, नेप्च्यून और यूरेनस की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन 1 अप्रैल को शनिवार है और इस मास में पांच शनिवार आएंगे, फलस्वरूप अशुभता का ही प्रतीक है। दैनिक उपयोगी वस्तुओं में अत्यधिक मंहगाई को बढ़ावा देता है जिस कारण जनसाधारण में रोष की भावना जागृत होती है। कहीं अग्निकांड, भू-स्खलन इत्यादि प्राकृतिक प्रकोपों से जन-धन को नष्ट करने का संकेत देता है। यह अधिकतर पूर्वोत्तर देशों व राज्यों के लिए अधिक कष्टप्रद होता है। ‘‘शनिवारा यदा पंच पाताले कम्पतेफणीः। ईशानदेश भंगश्च वह्णि दाहोमहर्धता।।’’ साथ ही इस मास में पांच रविवारों का भी आना राजनैतिक मतभेदों, वैमनस्य तथा कहीं राजनैतिक परिवर्तन भी होने का योग बनाता है, कही दुर्भिक्ष या प्राकृतिक प्रकोप से हानिकारक भी होता है। ‘‘यत्रमासे रविवाराः जायन्ते पंच सततम्। दुर्भिक्षं छत्रभंग स्यात दास्ते च महद्भयम्।।’’ इस मास के आरंभ से पूर्व विकारी नामक संवत का प्रवेश हो रहा है जो आम जनता में पित्त, रक्त रोग इत्यादि रोगों से दुःख देता है। राजशासकों में परस्पर विरोध की भावना अधिक जागृत करता है। हिंसक घटनाओं में वृद्धि होगी। साथ ही इस नववर्ष का राजा, गुरु तथा मंत्री का पद शुक्र का होने से यह भारत की प्रगति तथा नये-नये आविष्कारों में वृद्धि होने का भी योग बनाता है। 14 अप्रैल को सूर्य ग्रह मेष राशि में प्रवेश करेगा और गुरु व शनि दोनों ग्रहों से दृष्ट होगा। यह योग देश में राजनैतिक उतार-चढ़ाव अधिक बनाएगा। राजनैतिक लोग एक-दूसरे पर अधिक लांछन लगाने पर तुलेंगे। कहीं यह योग राजनैतिक परिवर्तन का भी योग बना सकता है। सूर्य पर शनि की दृष्टि भू-स्खलन या अग्निकांड इत्यादि दुर्घटनाओं को अधिक करती है। सोना व चांदी: मासारंभ का 1 अप्रैल को शनिवार तथा क्षय तिथि में आरंभ होना सोने के बाजार में तेजी का सूचक है लेकिन इससे पूर्व बुध और शुक्र का कुंभ राशि में मिलाप होना चांदी के बाजार में मंदा ही दर्शाता है। 3 अप्रैल को मंगल मिथुन राशि में प्रवेश करेगा और बृहस्पति से दृष्ट होगा। यह योग सोने की तेजी को और भी बढ़ावा देता है। 5 अप्रैल को शनि का मार्गी गति में आना तथा पुष्य नक्षत्र पर स्थित होकर ज्येष्ठा नक्षत्र को वेध में लेना भी सोने में चल रही तेजी को पूर्ववत ही रखता है। 6 अप्रैल को गुरु का वक्री गति की चाल चलते हुए विशाखा नक्षत्र के प्रथम चरण में पुनः प्रवेश करना, यह योग बाजार में कुछ बदलाव अर्थात मंदे का रुझान बनाएगा। इसी दिन केतु का उत्तराफाल्गुन नक्षत्र में प्रवेश होकर पुनर्वसु, उ.षा. व रेवती नक्षत्र को वेध में लेना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक करेगा। इसीदिन शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना चांदी में तेजी का वातावरण बनाए रखेगा। 11 अप्रैल को बुध ग्रह मीन राशि में प्रवेश कर सूर्य व राहु के साथ राशि संबंध बनाएगा। यह योग बाजार की पूर्व चल रही तेजी को और भी बढ़ावा देता है लेकिन चांदी में अधिक उतार-चढ़ाव रखेगा। 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश कर शनि व गुरु से दृष्ट होना और वैशाख की संक्रांति का 30 मुहूर्ती होना भी तेजी का कारक है। 15 अप्रैल को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को वेध में लेना भी सोने व चांदी में तेजी का कारक है। 19 अप्रैल को शुक्र का पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र पर प्रवेश कर चित्रा नक्षत्र को वेध में लेना बाजारों में कुछ बदलाव लाएगा अर्थात मंदे का रुख अपनाएगा। 24 अप्रैल को बुध का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर उ.फा. नक्षत्र को वेध में लेना भी चांदी में और मंदा लाएगा। यह योग सोने को पूर्ववत ही रखता है। 27 अप्रैल को सूर्य का भरणी नक्षत्र में प्रवेश होना तथा मघा नक्षत्र को वेध में लेना सोने व चांदी में तेजी का ही सूचक है। 28 अप्रैल को शुक्र का मीन राशि में प्रवेश होकर राहु के साथ राशि संबंध बनाना बाजार को दो तरफा ले जा सकता है। व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। गुड़ व खांड: मासारंभ में 1 अप्रैल को शनिवार और क्षय तिथि का होना गुड़ व खांड के बाजार में तेजी का ही संकेत देता है। 3 अप्रैल को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश होना गुड़ में तो तेजी ही चलाता है लेकिन गुरु द्वारा दृष्टित होने से खांड में मंदे की तरफ संकेत करता है। 5 अप्रैल को शनि ग्रह मार्गी गति में आएगा। यह योग बाजारों में कुछ बदलाव दे सकता है। 6 अप्रैल को वक्री गति के गुरु का विशाखा नक्षत्र के प्रथम चरण में पुनः प्रवेश करना गुड़ के बाजार में पुनः मंदे का रुझान बनाएगा। इसीदिन केतु का उफा. नक्षत्र में आकर पुनर्वसु, उ.षा. व रेवती नक्षत्रों के वेध में लेना बाजार में उतार-चढ़ाव की प्रक्रिया अधिक करेगा। इसीदिन शुक्र का भी शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना खांड में मंदा ही बनाता है। 11 अप्रैल को बुध का मीन राशि में प्रवेश कर राहु के साथ राशि संबंध बनाना पुनः बाजार में बदलाव लाकर तेजी के रुख में ले जाने वाला योग है। 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश कर शनि द्वारा दृष्ट होना भी तेजी का सूचक है। इसीदिन मेष की संक्रांति का 30 मुहूर्ती होना भी तेजी ही दर्शाता है। 15 अप्रैल को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वाषाढ़ नक्षत्र को वेध में लेना गुड़ व खांड में तेजी की लहर बनाए रखेगा। 19 अप्रैल को शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर चित्रा नक्षत्र को वेध में लेगा। यह योग गुड़ व खांड में पुनः मंदे का रुझान बनाएगा। 24 अप्रैल को प्रातः बुध का रेवती नक्षत्र में आना तथा उ.फा. नक्षत्र को वेध में लेना यह योग बाजार में मंदे के वातावरण में और बढ़ावा देगा। 27 अप्रैल को भरणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश करना तथा कृत्तिका, मघा व अनुराधा नक्षत्रों को वेध करना यह योग गुड़ व खांड के बाजार में बदलाव देकर पुनः तेजी के माहौल में ले जाएगा। 28 अप्रैल को शुक्र का मीन राशि में आकर राहु व बुध के साथ राशि संबंध बनाना गुड़ व खांड के बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक करता हुआ मंदे की लहर में ले जाएगा। अनाज व दालवान: मासारंभ में 1 अप्रैल को शनिवार तथा क्षय तिथि का होना गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौठ, उड़द, अरहर इत्यादि दालवान के बाजार में मंदे का कारक है। 3 अप्रैल को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश करना अनाजों में तेजी का ही सूचक है तथा गुरु से भी दृष्टित होना दालवानों में मंदे का रुझान बनाता है। 5 अप्रैल को शनि का मार्गी गति में आना अनाजों तथा दालवानों में परिवर्तन लाएगा अर्थात बाजार को मंदे के रुख में ही चलाएगा। 6 अप्रैल को गुरु का वक्री गति में चलते हुए पुनः विशाखा नक्षत्र के प्रथम चरण में आ जाना बाजार में मंदे का सूचक है। इसीदिन केतु का उत्तराफाल्गुन नक्षत्र में प्रवेश होकर पुनर्वसु, उ.षा. व रेवती नक्षत्रों को वेध में लेना अनाज व दालवान के बाजार में अस्थिरता अधिक पैदा करेगा। इसीदिन शुक्र का भी शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना अनाज तथा करियाने की वस्तुओं में मंदे का रुख पैदा करेगा। 11 अप्रैल को बुध का मीन राशि में प्रवेश कर राहु के साथ संबंध बनाना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक करता हुआ अंत में मंदे का ही वातावरण बनाएगा। 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश होकर शनि से दृष्टित होना तथा मेष संक्रांति का 30 मुहूर्ती में आना बाजार में अस्थिरता के साथ-साथ तेजी की लहर का माहौल बनाएगा। 15 अप्रैल को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश होकर पू.षा. नक्षत्र को वेध में लेना गेहूं इत्यादि अनाजों में तेजी का योग बनाएगा लेकिन दालवान के बाजार में मंदे का ही रुख बनाए रखेगा। 19 अप्रैल को शुक्र का पू.भा. नक्षत्र में प्रवेश कर चित्रा नक्षत्र को वेध में लेना दालवान में मंदे का ही योग बनाएगा। 24 अप्रैल को बुध का रेवती नक्षत्र में आना तथा उ.फा. नक्षत्र को वेध में लेना मूंग, मौठ इत्यादि दालवानों में उतार-चढ़ाव अधिक करता हुआ मंदे का ही योग बनाएगा, लेकिन अनाजों में पुनः तेजी की लहर चलाएगा। 27 अप्रैल को सूर्य का भरणी नक्षत्र में आकर कृत्तिका, मघा व अनुराधा नक्षत्र को वेधना अनाज व दालवानों में तेजी का रुझान बनाएगा। 28 अप्रैल को शुक्र का मीन राशि में आकर बुध व राहु के साथ राशि संबंध बनाना, यह योग गेहूं इत्यादि अनाजों तथा दालवान को तेजी की लहर में ले जाएगा। घी व तेलवान: मासारंभ में 1 अप्रैल को शनिवार तथा क्षय तिथि का होना तेल, तेलवान तथा घी के बाजार में तेजी ही दर्शाता है। 3 अप्रैल को मंगल का मिथुन राशि में प्रवेश होना तेलों के बजार में तो तेजी का सूचक है लेकिन घी के बाजार में मंदे का वातावरण पैदा करेगा। 5 अप्रैल को शनि का मार्गी गति में आना तेल, तेलवान व घी में बदलाव लाने की क्षमता वाला है लेकिन यह योग शनि के कर्क में होने से मध्यम गति से चलेगा। 6 अप्रैल को गुरु का विशाखा नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश होना भी घी के बाजार में मंदे का रुख बनाएगा। इसीदिन शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश होकर स्वाति नक्षत्र को वेध में लेना भी तेल व घी के बाजार में मंदे का वातावरण बनाता है। 11 अप्रैल को बुध का मीन राशि में प्रवेश होकर राहु के साथ राशि संबंध बनाना बाजार में अस्थिरता अधिक बनाएगा। 14 अप्रैल को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश कर शनि व गुरु द्वारा दृष्टित होना तेलवान के बाजार में अस्थिरता के साथ-साथ बाजार को तेजी की लहर में ले जाएगा। 15 अप्रैल को मंगल का आद्र्रा नक्षत्र में प्रवेश होकर पू.षा. नक्षत्र को वेध में लेना घी के बाजार में कुछ बदलाव लाकर तेजी के वातावरण में ले जाएगा। 19 अप्रैल को शुक्र का पू.भा. नक्षत्र में प्रवेश कर चित्रा नक्षत्र को वेध में लेना भी घी के बाजार में मंदा ही चलाता है। 27 अप्रैल को सूर्य का भरणी नक्षत्र में आकर कृत्तिका, मघा व अनुराधा को वेध में लेना तेल के बाजार में पुनः बदलाव देता है, बाजार को तेजी के रुझान में ले जाएगा। 28 अप्रैल को शुक्र का मीन राशि में आकर राहु व बुध के साथ राशि संबंध बनाना तेलवान पदार्थो की तेजी को और भी बढ़ावा देता है।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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