अर्जुन कुमार गर्ग


यश, धन और पद की स्थिति कैसे जानें

अप्रैल 2007

व्यूस: 15174

भारतीय धर्म और संस्कृति में मनुष्य के चार पुरुषार्थों - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष में से जीवन में अर्थ प्राप्त करना एक अनिवार्य पुरुषार्थ है, जिसके लिए हमारे पौराणिक ग्रंथों में अपनी योग्यता व क्षमता के अनुरूप निष्काम भाव से कर्म क... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय योगदशायशभविष्यवाणी तकनीकसंपत्ति

लाल किताब

जुलाई 2009

व्यूस: 5463

वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में राशि, नक्षत्र और ग्रहों का अनेक स्थानों पर वर्णन ज्योतिर्विद्या के प्राचीनतम् होने का संकेत है। उस काल में इस विद्या का प्रादुर्भाव सूर्य, ब्रह्मा, व्यास, वशिष्ठ, अत्रि, पराश... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरलाल किताबग्रहहस्तरेखा सिद्धान्त

धन, पद और प्रतिष्ठा की हानि : कब और क्यों ?

जनवरी 2010

व्यूस: 4970

इस आलेख में लेखक ने अपनी प्रभावशाली कलम से उन योगों और दशाओं का विस्तृत वर्णन किया है जिनके कारण जातक के धन, पद व यश की हानि होती है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगदशाकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसायगोचरसंपत्ति

क्रांति : तानाशाही या लोकतांत्रिक

जुलाई 2010

व्यूस: 3415

मनुष्य की जन्मकुंडली में स्थित ग्रहों के विभिन्न प्रकार के संयोग और बलाबल के अध् ययन से व्यक्ति विशेष के आचरण, आदर्श और सिद्धांत का तथा उनसे किसी देश या राज्य पर पड़ने वाले प्रभाव का बोध हो सकता है, आइए, जन्मकुंडली के माध्यम से पता... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

रत्न विज्ञान

जुलाई 2008

व्यूस: 3353

इस लेख में रत्नों की पहचान, रत्न धारण के लाभ, विधि तथा उन ज्योतिषीय नियमों की समीक्षा की गई है जिनके आधार पर रत्न धारण किया जाना चाहिए।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायरत्नमंत्र

बाधक दोष

अप्रैल 2008

व्यूस: 2579

कुंडली में भाव 6, 8 और 12 को निकृष्ट स्थान की संज्ञा दी गई है। इन भावों के स्वामी और इन भावों में स्थित ग्रह अपने गुण खोकर अपनी दशा या अंतर्दशा में जातक के लिए कष्ट उत्पन्न करते हैं। इन भावों के अतिरिक्त भाव 2 और 7 यश, धन, पद और स... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

पद, उपपद और अर्गला के आधार पर फल कथन

अकतूबर 2005

व्यूस: 1889

लग्नकुंडली के आधार पर की गई भविष्यवाणी मिथ्या हो जाती है, जिसके निराकरण हेतु महर्षि पराशर ने षड्वर्ग की व्यवस्था की। जब कोई फल लग्नकुंडली के साथ-साथ षड्वर्ग कुंडली से भी प्रकट होता है, तो उसके मिथ्या होने की संभावना कम होती है और ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगजैमिनी ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

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