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NAKSHATRA

Feb 2013

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अश्व्यादिरूपं तुरगास्य योनि क्षुरोन एणास्य मणिर्गृहं च। पृषत्कचक्रे भवनं च मंचः शय्याकरो मौक्तिकविदु्रमं च।। तोरणं बलिनिभं च कुण्डलं सिंहपुच्छगजदन्तमंचकाः। त्र्यास्रि च त्रिचरणाभमर्दलौ वृत्तामंचयमलाभमर्दलाः।। The above mention... more

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Disha Shool

Nov 2017

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यदि व्यक्ति के जीवन का अति महत्वपूर्ण कार्य है तो दिशाशूल का ज्ञान होने से व्यक्ति मार्ग में आने वाली बाधाओं से बच सकता है |... more

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