ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर ग्रह परिवर्तन: इस मास में ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य 17 सितंबर को प्रातः 5 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेगा। बुध 9 सितंबर को 3 बज कर 45 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश करेगा, 17 सितंबर को प्रातः 7 बजकर 15 मिनट पर उदय होगा तथा 28 सितंबर को 4 बजकर 33 मिनट पर तुला राशि में प्रवेश करेगा। शुक्र 1 सितंबर को दोपहर 2 बज कर 10 मिनट पर सिंह राशि में तथा 25 सितंबर को शाम 7 बजकर 3 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश करेगा। शेष ग्रह मंगल, गुरु, शनि, राहु, केतु, नेप्च्यून, प्लूटो और यूरेनस की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन शुक्रवार है और इस मास में पांच शुक्रवार आएंगे। यह स्थिति सुख-शांति की प्रतीक है। बौद्धिक सुख और ऐश्वर्य में वृद्धिकारक है। यह स्थिति जन मानस को विलासमय जीवन की तरफ ले जाती है। नारी जाति के प्रभुत्व में वृद्धिकारक है। ‘‘शुक्रस्य पंचवाराः स्पुपत्र प्रवर्तते। प्रजा वृद्धि सुभिक्षं च सुखं तत्र प्रवर्तते।’’ वहीं इस मास में पांच शनिवार भी आएंगे। यह स्थिति महंगाई को और बढ़ाएगी। जन सधारण को कष्ट होगा तथा उनमें रोष की भावना पनपेगी। यह स्थिति भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों व भारत से पूर्वोत्तर देशों तथा मुस्लिम देशों में प्राकृतिक प्रकोप, भूस्खलन इत्यादि उपद्रवकारी घटनाओं का संकेत देती है। कहीं राजनैतिक मतभेद और कहीं सत्ता परिवर्तन की स्थिति पैदा हो सकती है। ‘‘शनिवारा यदा पंच पाताले कम्पते फणीः ईशान देश भंगश्च वहिण दाहोमहर्घतां।’’ मासारंभ में ही मंगल और राहु के समसप्तक योग में आने तथा मंगल के शनि से पूर्ण दृष्टित होने के कारण कहीं प्राकृतिक प्रकोप से जन धन की हानि की संभावना है। 1 सितंबर को सिंह राशि में शुक्र का आना वर्षा के लिए बाधक बनता है। ”सिंहे शुक्र होये भवानी, चले पवन न बरसे पानी।’’ 9 सितंबर को बुध का कन्या राशि में आकर केतु के साथ राशि संबंध बनाना राजनीतिक उथल-पुथल का सूचक है। 17 सितंबर को सूर्य ग्रह कन्या राशि में प्रवेश करेगा तथा मंगल, बुध व केतु के साथ चतुग्र्रही योग भी बन जाएगा। यह योग चल रहे राजनीतिक मतभेदों को और अधिक बढ़ा सकता है। अपहरण इत्यादि कांड अधिक हो सकते हैं तथा चल रहे शांति प्रयासों में बाधा आ सकती है। 25 सितंबर को शुक्र कन्या राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, केतु व बुध के साथ संबंध में आना रोगों में वृद्धि कारक है। यह स्थिति किसी भयानक रोग के फैल जाने का संकेत देती है। सोना व चांदी: मासारंभ वाले दिन 1 सितंबर को शुक्र का सिंह राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना चांदी में मंदा ही दर्शाता है लेकिन मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधना सोने व चांदी के बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक करेगा। 4 सितंबर को गुरु विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करेगा तथा धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगेगा। यह योग सोने में कुछ तेजी का सूचक है। लेकिन चांदी पूर्ववत ही रहेगी। 7 सितंबर को बुध का उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर रेवती को वेधना चांदी के बाजार में मंदे की लहर को और आगे बढ़ाएगा। यह योग सोने में भी आगे मंदा ही रखेगा। 9 सितंबर को बुध ग्रह मंगल और केतु के साथ कन्या राशि में राशि संबंध बना रहा है। इन दो क्रूर ग्रहों के साथ बुध का मिलाप दोनों बजारों में मंदे का रुझान ही रखेगा। 12 सितंबर को शुक्र का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर अश्विनी नक्षत्र को वेधना बाजार में मंदा ही दर्शाता है। 13 सितंबर को सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, उ. आ. व रेवती नक्षत्रों के वेधेगा। इससे बाजारों में कुछ बदलाव अर्थात तेजी का माहौल पैदा होगा। 14 सितंबर को शुक्र हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को वेधेगा। यह योग सोने में तेजी का ही कारक है। 15 सितंबर को बुध का भी हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उ. भा. नक्षत्र को वेधना बाजारों को मंदे की तरफ ले जाएगा। 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश कर मंगल, बुध व केतु के साथ मिलकर चर्तुग्रही योग बनाना सोने में तेजी का ही सूचक है। इसी दिन बुध का उदय होना चांदी को मंदे की लहर में ही रखेगा। 22 सितंबर को शुक्र का उत्तराफाल्गुन नक्षत्र में आकर रेवती नक्षत्र को वेधना बाजार में उतार-चढ़ाव अधिक करेगा। अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखें। 23 सितंबर को बुध का चित्रा नक्षत्र में आकर पू. भाद्रपद नक्षत्र को वेधना चांदी में कुछ बदलाव लाएगा। इसी दिन शनि ग्रह का आश्लेषा नक्षत्र पर चरण बदलना सोने में भी बदलाव ला सकता है। 25 सितंबर को शुक्र कन्या राशि में आकर सूर्य, मंगल, केतु व बुध के साथ राशि संबंध बनाएगा। यह योग बाजारों को पुनः तेजी की लहर में ले जा सकता है। 27 सितंबर को सूर्य का हस्त नक्षत्र में आ जाना तथा आद्र्रा, पूर्वाषाढ़ा और उभाद्रपद नक्षत्रों को भी वेधना चांदी में मंदे का सूचक है। 28 सितंबर को बुध का तुला राशि में आकर गुरु के साथ राशि संबंध बनाना सोने को कुछ तेजी के वातावरण में ले जा सकता है। गुड़ व खांड: मासारंभ वाले दिन 1 सितंबर को शुक्र का कन्या राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना गुड़ के बाजार में तेजीदायक है और मघा नक्षत्र में प्रवेश कर भरणी नक्षत्र को वेधना खांड को मंदे की तरफ ले जा सकता है। 4 सितंबर को गुरु का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधने लगना गुड़ में तेजी का कारक है। 7 सितंबर को बुध का उफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर रेवती नक्षत्र को वेधना गुड़ में चल रही तेजी को और आगे बढ़ाएगा। इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है जिसका प्रभाव खांड के बाजार के रुख को बदल सकता है। 9 सितंबर को बुध का मंगल और केतु के साथ कन्या राशि में राशि संबंध बनाना खांड को तेजी की तरफ ले जाएगा। लेकिन गुड़ में मंदे का माहौल बनाएगा। 12 सितंबर को शुक्र पू. फा. नक्षत्र में प्रवेश कर अश्विनी नक्षत्र को वेधेगा। यह योग खांड को तेजी की तरफ ले जाएगा। 13 सितंबर को सूर्य पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, उत्तराषाढ़ा और रेवती नक्षत्रों को वेधने लगेगा। यह योग भी खांड में मंदा दर्शा रहा है किंतु गुड़ को तेजी में ले जाएगा। 14 सितंबर को मंगल का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उ. भाद्रपद नक्षत्र को वेधने लगना खांड के बाजार में बदलाव लाकर उसे तेजी की लहर में ले जाएगा। 15 सितंबर को बुध हस्त नक्षत्र मे ंप्रवेश कर उत्तराभाद्रपद नक्षत्र को भी वेधेगा। यह योग गुड़ के भाव को और आगे बढ़ाएगा। 17 सितंबर को सूर्य मंगल, बुध और केतु के साथ कन्या राशि में राशि संबंध बनाएगा तथा शनि की उस पर पूर्ण दृष्टि होगी। यह योग गुड़ व खांड में तेजी का सूचक है। इसी दिन बुध भी उदय हो रहा है जो पूर्व से चल रहे रुख को और बढ़ावा देगा। 22 सितंबर को शुक्र का उ. फाल्गुनी नक्षत्र में आकर रेवती नक्षत्र को वेधना भी बाजारों में तेजी को और बढ़ाएगा। 23 सितंबर को बुध का चित्रा नक्षत्र में आकर पू. भाद्रपद नक्षत्र को वेधना खांड के बाजार में ठहराव पैदा करेगा। 25 सितंबर को शुक्र का कन्या राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, बुध व केतु के साथ राशि संबंध बनाना बाजारों में पूर्व से चल रही तेजी को और आगे ले जाएगा क्योंकि यह योग शनि द्वारा दृष्टित है। 27 सितंबर को सूर्य का हस्त नक्षत्र में आ जाना तथा मृगशिरा, मूला व उ. भाद्रपद नक्षत्रों को वेधने लगना खांड में बदलाव लाकर मंदे के वातावरण में ले जाने वाला है। इस दन बुध का तुला राशि में गुरु के साथ संबंध में आना गुड़ को मंदे के माहौल में रखेगा। अनाज व दालवान: मासारंभ में 1 सितंबर को शुक्र का सिंह राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों में तेजी का संकेत देता है। इसी दिन शुक्र का मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधना मूंग, मौठ, अरहर इत्यादि दालवानों में मंदे का सूचक है। 4 सितंबर को गुरु का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना भी अनाजों की तेजी को आगे बढ़ाएगा। 7 सितंबर को बुध का उ. फा. नक्षत्र में आकर रेवती नक्षत्र को वेधना मंूग, मौठ, उड़द, अरहर इत्यादि दालों में पुनः तेजी का रुख लाएगा। इस दिन गुरुवार है और चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। यह योग अनाजों में कुछ मंदे का संकेत देता है। 9 सितंबर को बुध का कन्या राशि में आकर मंगल और केतु के साथ राशि संबंध बनाना अनाजों में चल रही मंदे की लहर को और आगे बढ़ाएगा। 12 सितंबर को शुक्र का पू. फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर अश्विनी नक्षत्र को वेधना दोनों बाजारों को मंदे की तरफ ले जाएगा। 13 सितंबर को सूर्य का पूफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, उ. आषाढ़ा. और रेवती नक्षत्रों को वेधना बाजारों को तेजी की लहर में ले जाने वाला योग है। 14 सितंबर को मंगल का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उ. भानक्षत्र को वेधना अनाजवान में मंदे का सूचक है। लेकिन दालवान का बाजार पूर्ववत ही रहेगा। 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश कर मंगल, बुध व केतु के साथ राशि संबंध बनाने तथा शनि द्वारा दृष्टित होने के कारण अनाजों में तेजी आएगी। इसी दिन बुध का उदय होना दालवान में मंदा दर्शाता है। 22 सितंबर को शुक्र का उ. फानक्षत्र में प्रवेश कर रेवती नक्षत्र को वेधना अनाजों में तेजी का संकेत देता है। किंतु दालवान को मंदा ही रखेगा। 23 सितंबर को बुध का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश कर पू. भा. नक्षत्र को वेधना दालवानों में तेजी का सूचक है। 25 सितंबर को शुक्र का कन्या राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, बुध व केतु के साथ राशि संबंध बनाने तथा शनि से दृष्टित होने के कारण अनाजों के बाजार में तेजी की लहर बढ़ेगी। यह योग दालवान में भी तेजी का सूचक है। 27 सितंबर को सूर्य हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर आद्र्रा, पू. आ. और उ. भा. नक्षत्रों को वेधेगा जो गेहू, जौ, चना, डकर इत्यादि अनाजवान को और भी तेजी की ओर ले जाएगा। इसी दिन बुध का गुरु ग्रह के साथ तुला राशि में राशि संबंध बनाना दालों में मंदे का सूचक है। घी व तेलवान: मासारंभ में 1 सितंबर को शुक्र का कन्या राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना घी के बाजार में मंदे का कारक है। मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधना तेलों में तेजी दर्शाता है। 4 सितंबर को गुरु का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना तेलों में तेजी का सूचक है। 7 सितंबर को बुध का उ. फा. नक्षत्र में आकर रेवती नक्षत्र को वेधना घी में मंदे का संकेत देता है। लेकिन इसी दिन चंद्र ग्रहण का भी लगना तेल व तेलवानों में तेजी ही दर्शाता है। 9 सितंबर को बुध के कन्या राशि में प्रवेश कर मंगल व केतु के साथ राशि संबंध बनाने व शनि से पूण दृष्टित होने के कारण तेलों में तेजी पूर्ववत बनी रहेगी। लेकिन यह योग घी को मंदे के माहौल में ही रखेगा। 12 सितंबर को शुक्र का पू.फा. नक्षत्र में प्रवेश कर अश्विनी नक्षत्र को वेधना भी घी के बाजार को मंदा ही रखेगा। 13 सितंबर को सूर्य का उ. फा नक्षत्र में आकर पूनर्वसु, उ. आ. और रेवती नक्षत्रों को वेधना घी में बदलाव अर्थात तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा। तेलों को यह योग तेजी में ही रखेगा। 14 सितंबर को मंगल का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर उ. भा. नक्षत्र को वेधना घी के बाजार में तेजी को और बढ़ाएगा। 15 सितंबर को बुध का भी हस्त नक्षत्र में आकर उभाद्रपद नक्षत्र को वेधना तेलों के बाजार में तेजी को और बढ़ाएगा। 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश कर मंगल, बुध और केतु के साथ राशि संबंध बनाना तेलों व घी की चल रही तेजी की लहर में वृद्धि करेगा। इसी दिन बुध का उदय होना भी पूर्व योग में वृद्धि का संकेत देता है। 22 सितंबर को शुक्र का उ. फा. नक्षत्र में आकर रेवती नक्षत्र को वेधना घी में थोड़ा बहुत मंदा उत्पन्न करेगा। 23 सितंबर को बुध का चित्रा नक्षत्र में आना और उ. भा. नक्षत्र को वेधना घी की तेजी को बनाए रखेगा। इसी दिन शनि का आश्लेषा नक्षत्र के चैथे चरण में आना तेलों की तेजी को और आगे ले जाएगा। 25 सितंबर को शुक्र के कन्या राशि में प्रवेश कर सूर्य, मंगल, बुध व केतु के साथ राशि संबंध बनाने तथा शनि से भी दृष्टित होने के कारण तेलों में तेजी की लहर और बढ़ेगी। किंतु यह योग घी के बाजार में मंदे का सूचक है। 27 सितंबर को सूर्य का हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर आद्र्रा, पू. आ. और उ. आनक्षत्रों को वेध में लेना तेलों में मंदे की लहर का संकेत देता है। इसी दिन बुध का गुरु के साथ तुला राशि में राशि संबंध बनाना घी को भी मंदे की ओर ले जाएगा। उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है। पाठकों का बेहतर मार्गदर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कोई निर्णय लेने से पहले निवेशक को उन अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  सितम्बर 2006

मनुष्य को जीवन के हर क्षेत्र में नाना प्रकार के कष्ट, परेशानियों एवं बाधाओं से दो-चार होना पड़ता है। इन्हें अनेक स्रोतों से परेशानियां एवं विपत्ति का सामना करना पड़ता है। कभी अशुभ ग्रह समस्याएं एवं कष्ट प्रदान करते हैं तो कई बार काला जादू अथवा भूत-प्रेत से समस्याएं उत्पन्न होती हैं। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में प्रबुद्ध लेखकों ने अपने आलेखों में इन्हीं सब महत्वपूर्ण बातों की चर्चा विस्तार से की है तथा इनसे मुक्ति प्राप्त करने के नानाविध उपाय बताए हैं। महत्वपूर्ण आलेखों की सूची में संलग्न हैं- क्या है बंधन और उनके उपाय, यदि आप को नजर लग जाए, शारीरिक बाधाएं हरने वाली वनस्पतियां, भूत-प्रेत बाधा, मंत्र शक्ति से बाधा मुक्ति, कष्ट निवारण, बाधा के ज्योतिषीय उपाय व निवारण, कल्याणकारी जीवों के चित्र लगाएं बाधाओं को दूर भगाएं आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण आलेख जीवन के बहुविध क्षेत्र से सम्बन्धित हैं तथा इन्हें स्थायी स्तम्भों में स्थान प्रदान किया गया है।

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