ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

मई मास में गोचर ग्रह परिवर्तनः इस मास में ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा। सूर्य 15 मई को प्रातः 3 बजकर 10 मिनट पर वृष राशि में प्रवेश करेगा। मंगल ग्रह 24 मई को रात्रि 10 बजकर 28 मिनट पर कर्क राशि में प्रवेश करेगा। बुध ग्रह 2 मई को प्रातः 6 बजकर 22 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा, 7 मई को प्रातः 10 बजकर 03 मिनट पर अस्त होगा, 17 मई को प्रातः 7 बजकर 48 मिनट पर वृष राशि में प्रवेश करेगा, 30 मई को प्रातः 4 बजकर 42 मिनट पर उदय होगा तथा 31 मई को प्रातः 11 बजकर 19 मिनट पर मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएगा। शुक्र ग्रह 24 मई को दोपहर 1 बजकर 17 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा। शेष ग्रह गुरु, शनि, राहु, केतु, प्लूटो, नेप्च्यून और यूरेनस की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी। गोचर फल विचार: मासारंभ वाले दिन अर्थात् 1 मई को सोमवार है और इस मास में पांच सोमवार आएंगे। फल अति उत्तम है। जन मानस के लिए और देश की सुख-समृद्धि व धन-धान्य के लिए वृद्धिकारक है। शासकों तथा आम जनता में आपसी सहयोग में सुवृद्धि करता है। सोमस्य पंचमवारास्तु यत्र मासे भवन्तिहि। धन-धान्य समृद्धिः स्यात सुखं भवति सर्वदा।।’’ लेकिन साथ ही पांच मंगलवारों का भी आना उपरोक्त सब फलों में बाधा डालता है। कहीं युद्धभय से जनमानस में अशांति का कारक है और कहीं प्राकृतिक प्रकोपों से जन-धन की हानि करता है। अशांतिप्रिय लोगों को अशांति फैलाने में अपना उग्र रुप धारण करने की प्रेरणा देता है। ”यत्र मासे महीसूनों जायंते पंच वासराः। रक्तेन पूरिता पृथ्वी छत्र भंगस्तदा।।“ इस मास में पांच बुधवारों का भी आ जाना सुभिक्ष का संचालन और सुख-सुमृद्धिदायक है। विद्वतवर्ग के लोगों को आगे लाकर समाज में विद्वतापूर्ण कार्य करवाता है। ”बुधस्य पंचवाराश्च जायन्ते च निरन्तरम्। प्रजानां सुख मत्यंत सुभिक्षं च प्रजायते।।“ मासारंभ से ही मीन राशि पर शुक्र एवं राहु का राशि संबंध तथा इनका गुरु से षडाष्टक योग प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन का हानिकारक है, हिंसाप्रिय लोगों को हिंसात्मक कार्यों के लिए उत्साहित करता है। ईशान कोण में बसने वाले देश व प्रदेशों में शासकों के लिए संघर्ष करने को विवश करता है। 15 मई को सूर्य का वृष राशि पर आकर शनि से त्रिएकादश योग व गुरु से षडाष्टक योग में आना भी खड़ी फसलों के लिए हानिकारक है। यह योग देश के प्रशासकों में भी उथलपुथल करता है। 24 मई को मंगल का कर्क राशि में आकर शनि से राशि संबंध बनाना तथा इसीदिन शुक्र का मेष राशि में आकर इनसे केंद्र में आ जाना व शनि द्वारा दृष्टित होना महत्वपूर्ण हस्तियों के लिए परेशानी बनाएगा। यह योग देश की सरहदों पर पुनः युद्धमय बादलों की काली घटाओं की गर्जना करता है। सोना व चांदी: मासारंभ में 1 मई को शुक्र का उ.भा. नक्षत्र में आकर सर्वतोभद्र चक्र में हस्त नक्षत्र को वेधना चांदी में मंदा ही दर्शाता है। 2 मई को बुध का मेष राशि में प्रवेश कर सूर्य के साथ राशि संबंध बनाना तथा बुध का ही अश्विनी नक्षत्र में अतिचारी अवस्था में प्रवेश कर रोहिणी नक्षत्र को वेधना चांदी में तो मंदे का कारक है लेकिन सूर्य पर गुरु की दृष्टि सोने को और तेजी की लहर में ले जाएगी। 4 मई को वक्री गति के गुरु का पुनः स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करना तथा दाहिनी दृष्टि से रोहिणी नक्षत्र को वेधना सोने की तेजी के रुख को और बढ़ावा देगा। 7 मई को मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कर मूल नक्षत्र को वेध करना तथा इसीदिन अतिशीघ्रगामी बुध का अस्त होना चांदी के बाजार में पुनः तेजी का वातावरण पैदा करेगा, सोने के बाजार में उतार-चढ़ाव करता हुआ तेजी के माहौल में ही रखेगा। 9 मई को अतिचारी बुध का भरणी नक्षत्र में आकर कृत्तिका नक्षत्र को वेध में लेना सोने व चांदी की तेजी में और बढ़ावा देता है। 11 मई को सूर्य का कृत्तिका में प्रवेश होना तथा भरणी, विशाखा व श्रवण को वेधना भी बाजार में तेजी का ही कारक है। 12 मई को शुक्र का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को वेध करना चांदी में पुनः मंदा ही बनाएगा। 15 मई को सूर्य का वृष राशि में प्रवेश करना व इसीदिन अतिचारी अवस्था के बुध का कृत्तिका नक्षत्र में आना चांदी में चल रहे मंदे को और बढ़ावा देने वाला है। 17 मई को बुध का वृष राशि में आकर सूर्य से राशि संबंध बनाना बाजार मंे थोड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है लेकिन उतार-चढ़ाव भी बनाए रखेगा। 21 मई को बुध रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र और इस पर स्थित गुरु ग्रह को भी वेधेगा जो सोने व चांदी के बाजार में बदलाव लाकर तेजी का योग बनाएगा। 24 मई को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर उ.फा. नक्षत्र को वेध में लेना तथा इस पर गुरु व शनि की दृष्टि का होना, यह योग बाजार में हलचल तो अधिक रखता है लेकिन मंदा ही बनाए रखेगा। इसीदिन मंगल का भी शनि के साथ राशि संबंध बनाना बाजार को दोतरफा भी चला सकता है, बाजार पर राजनैतिक अंकुश का भी प्रभाव रहेगा, अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 25 मई को सूर्य का रोहिणी नक्षत्र पर प्रवेश भी चांदी में मंदे का कारक है। 26 मई को बुध का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश भी मंदा ही दर्शाता है। 29 मई को बुध का उदय होना तथा मध्यगति में आना सोने व चांदी में पुनः बदलाव देकर तेजी के रुख में ले जाएगा। 30 मई को मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश तथा ज्येष्ठा नक्षत्र को वेधना सोने में तेजी का कारक है। गुड़ व खांड: मासारंभ में 1 मई को शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर हस्त नक्षत्र को वेधना खांड में मंदे का योग बनाता है। 2 मई को अतिचारी अवस्था के बुध का अश्विनी नक्षत्र तथा मेष राशि में प्रवेश कर रोहिणी नक्षत्र को वेध में लेना तथा इस पर गुरु व शनि की दृष्टि का रहना खांड में मंदे का ही योग बनाएगा लेकिन गुड़ में तेजी बनने का योग है। 4 मई को वक्री गति के गुरु का स्वाति नक्षत्र में पुनः प्रवेश कर रोहिणी नक्षत्र को वेध में लेना खांड में और भी मंदा बनाएगा। गुड़ में बदलाव देकर मंदे की लहर में ले जाएगा। 7 मई को मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कर मूल नक्षत्र को वेध में लेना तथा इसीदिन बुध का अतिचारी अवस्था में अस्त हो जाना खांड में चल रहे मंदे की लहर को बदलाव देकर पुनः तेजी के रुझान में ले जाएगा। गुड़ में भी इसी प्रकार तेजी ही दर्शाता है। 9 मई को अतिचारी अवस्था का बुध भरणी नक्षत्र में प्रवेश कर कृत्तिका नक्षत्र को वेध में लेगा, यह योग बाजार में तेजी ही बनाए रखता है। 11 मई को सूर्य का कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश कर भरणी, विशाखा व श्रवण को वेध करना बाजारों को पुनः मंदे के रुझान में ले जाएगा। 15 मई को बुध का अतिचारी अवस्था में चलते हुए कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश तथा इसी दिन सूर्य का वृष राशि में आना बाजारों में तेजी का ही योग बनाएगा। 17 मई को बुध ग्रह सूर्य के साथ वृष राशि में संबंध बनाएगा। यह योग भी बाजार को तेजी के रुख में रखेगा। 21 मई को बुध का अतिचारी अवस्था में रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश तथा स्वाति नक्षत्र व गुरु ग्रह को वेध में लेना बाजारों की चल रही तेजी को और बढ़ावा देता है। 24 मई को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पूफा. नक्षत्र को वेध में लेना तथा इस पर शनि व वक्री गुरु की दृष्टि भी रहना बाजार में मंदे का वातावरण पैदा करेगा। इसीदिन मंगल का कर्क राशि में शनि के साथ राशि संबंध बनाना व सरकारी कानून भी बाजार को प्रभावित करेंगे। 25 मई को सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करना बाजार में तेजी की लहर बनाता है। 26 मई का े बुध का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश होना तथा चित्रा नक्षत्र को वेधना खांड में मंदे का रुख बनाएगा। 29 मई को बुध का उदय होना तथा मध्य गति में आना बाजार में मंदे का ही सूचक है। 30 मई को मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर ज्येष्ठा नक्षत्र को वेधना गुड़ में तेजी ही बनाने का कार्य करता है। अनाज व दालवान: मासारंभ में 1 मई को शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर हस्त नक्षत्र को वेध में लेना गेहूं, चावल इत्यादि अनाजवान के बाजार में मंदे का योग बनाता है। 2 मई को अतिचारी गति में चलता हुआ बुध मेष राशि व अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर रोहिणी को वेध करता है, यह योग अनाजवानों में तेजी का ही रुझान रखेगा। बुध पर गुरु व शनि की दृष्टि का होना मूंग, मौठ इत्यादि दालवानों में भी तेजी लाने का योग बनाएगा। 4 मई को वक्री गति के गुरु का पुनः स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर रोहिणी नक्षत्र को वेधना अनाजों में और भी मंदा बनाएगा तथा दालवान के बाजार में उतार-चढ़ाव का वातावरण रखेगा। 7 मई को मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश कर मूल नक्षत्र को वेध में लेना गेहूं, जौ, चना, ज्वार इत्यादि अनाजों के बाजार में तेजी का ही कारक है। इसीदिन बुध का अस्त होना दालवान में कुछ मंदे का रुझान बनाएगा। 9 मई को बुध का अतिचारी अवस्था में भरणी नक्षत्र में आना तथा कृत्तिका नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजीदायक है। 11 मई को सूर्य का कृतिका नक्षत्र में प्रवेश कर भरणी, विशाखा तथा श्रवण नक्षत्र को वेध में लेना अनाज व दालवानों में तेजी ही चलाएगा। 12 मई को शुक्र का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर उ.फा. नक्षत्र को वेध करना अनाजों में मंदे का कारक है। 15 मई को सूर्य का वृष राशि में प्रवेश तथा बुध का कृतिका में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र को वेध में लेना यह योग जौ, चना इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौठ, अरहर इत्यादि दालवान में मंदा बनाने का सूचक है। 17 मई को बुध का सूर्य के साथ राशि संबंध बन रहा है। यह योग भी अनाजों को तेजी में रखता है। 21 मई को अतिचारी अवस्था के बुध का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र को वेधना दालवान में पुनः मंदा लाने का योग बनाएगा। 24 मई को शुक्र का मेष राशि तथा अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र को वेधना बाजारों में मंदे का वातावरण पैदा करेगा। मौसम एवं कुछ राजनैतिक हस्तक्षेप भी बाजारों को प्रभावित करेंगे। 25 मई को सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश अनाजवान में तेजी का ही योग बनाता है। 26 मई को बुध का मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर चित्रा नक्षत्र को वेधना अनाज व दालवान के बाजारों में बदलाव लाने की लहर बनाएगा। 29 मई को बुध का उदय होना तथा अपनी अतिचारी अवस्था को त्यागना अनाज व दालवान में मंदे का ही वातावरण बनाता है। घी व तेलवान: मासारंभ में 1 मई को शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर हस्त नक्षत्र को वेध में लेना घी के बाजार में मंदे का योग बनाएगा। 2 मई को बुध का मेष राशि व अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर रोहिणी नक्षत्र को वेधना तथा सूर्य के साथ राशि संबंध बनाना तेलों के बाजार में तेजी की लहर चलाता है। 4 मई को वक्री गति के गुरु का पुनः स्वाति नक्षत्र में प्रवेश होना तथा रोहिणी नक्षत्र को वेध में लेना तेलों के बाजार में बदलाव लाकर मंदे की लहर में ले जाता है। यह योग घी में भी मंदा ही चलाएगा। 7 मई को बुध का अस्त होना घी में तो मंदा करता है लेकिन इसीदिन मंगल का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश होकर मूल को वेधना तेलों में तेजी का योग बनाएगा। 9 मई को बुध भरणी नक्षत्र में आकर कृत्तिका नक्षत्र को वेधेगा। यह योग बाजार के चल रहे पूर्व रुख को और बढ़ावा देगा। 11 मई को सूर्य का कृत्तिका नक्षत्र में आकर भरणी, विशाखा व श्रवण नक्षत्र को वेध में लेना घी के बाजार के चल रहे मंदे के रुख को बदलाव देकर तेजी के रुझान में ले जाएगा। तेलवान में भी तेजी का कारक है। 12 मई को शुक्र का रेवती नक्षत्र में प्रवेश होकर उफा. नक्षत्र को वेधना भी तेजी को और बढ़ावा देता है। 15 मई को बुध का कृत्तिका नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र को वेधना तेलों में तेजी का ही कारक है। इसीदिन सूर्य का वृष राशि में आना घी के बाजार में तेजी ही बनाएगा। 17 मई को बुध का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र व गुरु ग्रह को वेधना तथा सूर्य के साथ राशि संबंध बनाना घी व तेलों में चल रही पूर्व तेजी को और बढ़ाएगा। 21 मई को अतिचारी अवस्था का बुध रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर पूफा. नक्षत्र को वेधेगा। यह योग भी तेल व घी के बाजार में तेजी ही चलाता है। 24 मई को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पू.फा. नक्षत्र को वेधना तथा गुरु से दृष्टित होना, इसीदिन मंगल का शनि के साथ संबंध बनाना, यह योग तेल व घी के बाजार में बदलाव लाने की क्षमता रखता है अर्थात बाजार की तेजी की लहर को मंदे की तरफ ले जाएगा। 25 मई को सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश तेलों व घी में कुछ तेजीदायक है। 26 मई को मृगशिरा नक्षत्र में बुध का प्रवेश होकर चित्रा नक्षत्र को वेधना तेल व घी में मंदे का योग बनाए रखेगा। 29 मई को बुध ग्रह उदय होगा, यह योग भी तेल में तेजी तथा घी में पूर्ववत मंदे को बनाए रखना दर्शा रहा है।


रुद्राक्ष एवं सन्तान गोपाल विशेषांक  मई 2006

ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु कणों से हुई है। ज्योतिष में प्रचलित अनेक उपायों में से रुद्राक्ष का उपयोग ग्रहों की नकारात्मकता एवं इनके दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है ताकि पीड़ा को कमतर किया जा सके। अनेक प्रकार के रुद्राक्षों को या तो गले में या बांह में धारण किया जाता है। रुद्राक्ष अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें से अधिकांश रुद्राक्षों का नामकरण उनके मुख के आधार पर किया गया है जैसे एक मुखी, दो मुखी, तीन मुखी इत्यादि। इस विशेषांक में रुद्राक्ष के अतिरिक्त सन्तान पर भी चर्चा की गई है। इस विशेषांक के विषय दोनों है। इसमें रुद्राक्ष एवं संतान दोनों के ऊपर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को सम्मिलित किया गया है जैसे: रुद्राक्ष की उत्पत्ति एवं महत्व, अनेक रोगों में कारगर है रुद्राक्ष, सन्तान प्राप्ति के योग, कैसे जानें कि सन्तान कितनी होंगी, लड़का होगा या लड़की जानिए स्वर साधना से, सन्तान बाधा निवारण के ज्योतिषीय उपाय, इच्छित सन्तान प्राप्ति के सुगम उपाय, सन्तान प्राप्ति के तान्त्रिक उपाय आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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