कुंडली में कारक, अकारक और मारक ग्रह

जनवरी 2015

व्यूस: 26209

ग्रहों को नैसर्गिक ग्रह विचार रूप से शुभ और अशुभ श्रेणी में विभाजित किया गया है। बृहस्पति, शुक्र, पक्षबली चंद्रमा और शुभ प्रभावी बुध शुभ ग्रह माने गये हैं और शनि, मंगल, राहु व केतु अशुभ माने गये हैं। सूर्य ग्रहों का राजा है ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणग्रहभविष्यवाणी तकनीक

शनि-चंद्र का विष योग

जून 2013

व्यूस: 18142

फलदीपिका’ ग्रंथ के अनुसार ‘‘आयु, मृत्यु, भय, दुख, अपमान, रोग, दरिद्रता, दासता, बदनामी, विपत्ति, निन्दित कार्य, नीच लोगों से सहायता, आलस, कर्ज, लोहा, कृषि उपकरण तथा बंधन का विचार शनि ग्रह से होता है। ‘‘अपने अशुभ कारकत्व के कारण शनि... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगघरभविष्यवाणी तकनीक

राजयोग तथा विपरीत राजयोग

जुलाई 2013

व्यूस: 11776

फलदीपिका ग्रंथ के अनुसार:- दुःस्थानभष्टमरिपु व्ययभावभाहुः सुस्थानमन्य भवन शुभदं प्रदिष्टम्। (अ. 1.17) अर्थात् ‘‘जन्मकुण्डली के 6,8,12 भावों को दुष्टस्थान और अन्य भावों को सुस्थान कहते हैं।’’ अन्य भावों में केन्द्र (1,4,7,10) तथा त... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

शकुन विचार

जून 2014

व्यूस: 8781

शकुन के विषय में गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने विचार ‘दोहावली’ (460, 461) मंे इस प्रकार व्यक्त किये हैंः- ‘‘नेवला, मछली, दर्पण, क्षेमकरी चिड़िया (सफेद मुंहवाली चील), चकवा और नीलकंठ- इन्हें दश दिशाओं में कहीं भी देखना शुभ शकु... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंशकुन

सुखी वैवाहिक जीवन के ज्योतिषीय सूत्र

मार्च 2014

व्यूस: 7803

कुंडली का प्रथम भाव स्वयं जातक, तथा सप्तम भाव जीवन साथी व वैवाहिक जीवन, दर्शाता है। अतः गुण मिलान के बाद लग्न व सप्तम भाव व भावेशों का बलवान होना और उनकी पारस्परिक शुभ स्थिति, तथा उन पर शुभ ग्रहों के प्रभाव का विचार करना सुखी वैवा... और पढ़ें

ज्योतिषरत्न

राहु का अन्य ग्रहों पर प्रभाव

अप्रैल 2013

व्यूस: 7200

राहु-केतु छाया ग्रह है, परन्तु उनके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर हमारे तत्ववेता ऋषि-मुनियों ने उन्हें नैसर्गिक पापी ग्रह की संज्ञा दी है।... और पढ़ें

ज्योतिषउपायज्योतिषीय योगग्रह

राहु-केतु की परम अशुभ फलदाई स्थिति

जुलाई 2014

व्यूस: 5759

राहु-केतु का बिंदु मात्र अस्तित्व होने पर भी इनके मानव जीवन पर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव के कारण हमारे परम ज्ञानी व दिव्यदृष्टि ऋषियों ने उन्हें छाया ग्रह की संज्ञा दी है, और पापी ग्रहों की श्रेणी में शनि व मंगल के साथ रखा है। इनक... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

स्वप्न की प्रक्रिया और फलादेश

जून 2010

व्यूस: 5257

गौतम बुद्ध के जन्म के कुछ दिन पहले उनकी माता रानी माया ने स्वप्न में एक सूर्य सा चमकीला,6 दांतों वाला सफेद हाथी देखा था, जिसका अर्थ मनीषियों ने एक उच्च कोटि के राजकुमार के जन्म सूचक बताया, जो सत्य हुआ। प्रस्तुत है स्वप्न विषय और उ... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंसपनेहस्तरेखा सिद्धान्त

राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी की कुण्डलियों  का तुलनात्मक विवेचन

अप्रैल 2014

व्यूस: 5163

2014 में होने वाले संसदीय चुनाव के संदर्भ में बी.जे.पी. की ओर से भी नरेन्द्र मोदी पहले ही प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत हैं। कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में श्री राहुल गांधी के नाम के कयास लगाये जा... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगग्रहवशीकरण

मंत्र व तंत्र साधना का स्वरूप

दिसम्बर 2014

व्यूस: 3990

हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी देवताओं के विशिष्ट स्वरूप शक्ति तथा उपासना मंत्रों का विस्तृत विवरण मिलता है। मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए संबंधित देवी/देवता की मंत्रोपासना का विधान है। इष्टदेव के दर्शन की तीव्र उत्कंठा होन... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंमंत्र

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