लाल किताब में पांचवां घर तथा गुरु संबंधी उपयोगी सिद्धांत और तथ्य

लाल किताब में पांचवां घर तथा गुरु संबंधी उपयोगी सिद्धांत और तथ्य  

सामान्य वैदिक ज्योतिष तथा लालकिताब के फलित कथन में अंतर होने का मूल कारण उनकी भाव तथा राशि से संबंधित भिन्न दृष्टि में निहित है। समस्या निवारण के लिए भी दोनों भिन्न प्रकार के उपाय बताते हैं। आईये, जानें लाल किताब में पांचवा घर तथा गुरु संबंधी उपयोगी सिद्धांत एवं उपाय आदि के बारे में

लाल किताब में पांचवें घर को पुत्र तथा अन्य संतान, मंत्रणा शक्ति, लेखन कला, पेट, इष्ट देव, ऊहापोह- शक्ति, भविष्य, सट्टा, सिनेमा, मौज-मस्ती, प्रेमिका, दिल, बड़े भाई की पत्नी, बड़ी बहन का पति, पत्नी के बड़े बहन-भाई, दौलत और नसीब आदि का विचार भी इसी घर के द्वारा होता है। प्रमुखतया पांचवें घर को औलाद का प्रतिबिम्ब माना गया है।

  • पांचवें घर में नेक सूर्य औलाद की वृद्धि करता है। वहीं मंदे या बद सूर्य के कारण संतान की हानि होती है। ऐसे में बंदरों को गुड़ खिलाने से सूर्य प्रबल होता है। इसके अतिरिक्त चींटियों को सात अनाज परस्पर मिलाकर पीसकर डालने चाहिए। आग जलाकर उसे दूध से बुझाना चाहिए।
  • पांचवें घर में चंद्रमा अपना जहर-उगल रहा हो अर्थात् अशुभ प्रभाव डाल रहा हो तो अपनी चारपाई के चारों पायों में तांबे की कील गाड़ने से चंद्रमा का नेक असर मिलता है। चंद्रमा को अनुकूल बनाने के लिए गुड़ को भूमि में दबाना चाहिए। इस प्रकार उपाय करने से संतान सुख मिलता है। यदि संतान को कष्ट हो रहा हो तो भी उपयुक्त उपाय करने से अनुकूलता मिलती है।
  • पांचवें घर में बद मंगल के प्रभाव के कारण संतान पर बुरा असर पड़ रहा हो तो संतान सुख के लिए भिखारियों को गुड़ का दान करें। बच्चे के जन्म पर मिठाई के स्थान पर नमकीन बांटें।
  • बुध पांचवें घर में स्थित होकर संतान के सुख में बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी नाक छिदवाकर चांदी का छल्ला नाक में पहनना चाहिए। घर में पवित्र जल भरकर पूजा घर में रखना चाहिए।
  • गुरु पांचवें घर में स्थित होकर संतान के सुख में बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो पीले चंदन और केसर को घिसकर गुरुवार के दिन तिलक लगाना चाहिए। साथ ही साथ सोने को धारण करने से भी गुरु की अशुभता में कमी आती है।
  • शुक्र पांचवें घर में स्थित होकर संतान-सुख में बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी साफ-सफाई, सुंदरता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सफेद एवं खुशबूदार पुष्प बहते हुए स्वच्छ जल में बहाने चाहिए।
  • शनि पांचवें घर में स्थित होकर संतान के सुख में बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को शनि की अशुभता दूर करने के लिए व्यक्ति को बहते हुए जल में नारियल छोड़ना चाहिए। काले तिल, काले कपड़े में बांधकर जमीन में गाड़ना चाहिए।
  • राहु पांचवें घर में स्थित होकर संतान सुख में बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को हमेशा अपने पास चांदी का एक चौकोर टुकड़ा रखना चाहिए, नागपंचमी के दिन जंगल में छोड़ देना चाहिए।
  • केतु पांचवें घर में स्थित होकर संतान के सुख में बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो ऐसे व्यक्ति को दो रंगों का कंबल निर्धन व्यक्तियों को दान करना चाहिए तथा कान में सोने का कुंडल धारण करने से भी केतु का अशुभ प्रभाव दूर होता है। केतु जिन व्यक्तियों को अधिक परेशान कर रहा हो तो उन्हें विशेषकर अपनी बहन के साथ मारपीट नहीं करनी चाहिए।

यदि संतान के घर में दो या अधिक पापग्रह बैठकर अथवा देखकर अपना अशुभ प्रभाव छोड़ रहे हों तो दोनों ग्रहों के उपायों को करने से संतान सुख मिलता है।

अपनी जन्मकुंडली में सबसे पहले यह देखना चाहिए कि कहीं कोई ग्रह अपने घर से 8वें घर में बैठे ग्रह को टक्कर तो नहीं मार रहा है? अथवा जिस विषय वस्तु के बारे में जानकारी चाहते हों तो देखें कि उस विषय वस्तु का कौन सा ग्रह स्वामी है? वह किस हालत में है और उसके अपने पक्के घर में कौन से ग्रह बैठे हैं तथा अपनी दृष्टि से कौन सा ग्रह उसे लाभ या हानि पहुंचा रहा है? उदाहरणतया किसी जातक की तालीम के बारे में जानकारी हासिल करनी है तो पहले तालीम के घर पांच को देखें कि उस घर का स्वामी ग्रह सूर्य किस हालत में है। फिर उस घर के पक्के घर के स्वामी ग्रह बृहस्पति को देखें।

इसके बाद चंद्र को देखें, क्योंकि तालीम (शिक्षा) का शुभ ग्रह नीच का रहा होगा, तो तालीम अधूरी या भारी झंझटों के बीच होगी और ग्रह अगर अच्छी हालत में हैं तो तालीम पूरी जरूर होगी। इसी तरह जन्मकुंडली के घरों से उसमें मौजूद ग्रहों का फल आसानी से जान सकते हैं।

बृहस्पति की गति :

  • बृहस्पति जब दुश्मन ग्रहों के घर में हो तो बुरा असर नहीं करता, किंतु दुश्मन ग्रह (बुध, शुक्र) बृहस्पति के घरों में आ जाएं तो हमेशा बुरा फल देते हैं।
  • शनि, राहु, केतु जैसे पापी ग्रहों के साथ बृहस्पति भी पापी हो जाता है। 6वें व 11वें घर में बैठा बृहस्पति सिर्फ शनि को मदद करता है।
  • अकेला बृहस्पति जहां भी बैठा होगा, अच्छा फल ही देगा। जब केतु मंदा हो तो केतु (पुत्र) पर अपना बुरा असर डालता है।
  • अगर राहु 1/2/3 घरों में, यानी बृहस्पति से पहले घरों में हो तो जातक गुरुओं का भी गुरु होता है।
  • जब पापी ग्रहों का फल नीचा हो रहा हो तो बृहस्पति का फल नीचा हो जाता है और जब मंगल नष्ट या मंदा (बद) हो तो बृहस्पति भी नष्ट हो जाता है। संतान, शिक्षा, राज्य से सम्मान और आदर और बड़प्पन आदि बृहस्पति के शुभ होने से ही हासिल होते हैं।
  • बृहस्पति जब मिथुन राशि में आता है तो चारों ओर अव्यवस्था फैला देता है, तब अप्रत्याशित घटनाएं घटती हैं। अगर उसके सामने धनु राशि में शनि हो तो अनेक उत्पात उपद्रव होते हैं। 1/4/5/ 8/ 9/12 घरों में बृहस्पति बैठा हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है और उसी से जीवन भर गुजर बसर करता है।
  • केंद्र स्थानों (1/4/7/10) का बृहस्पति जातक की साथ लाई हुई दौलत होता है। बशर्ते वह किसी दूसरे ग्रह से मंदा न हो रहा हो। अगर बृहस्पति के मित्र अच्छी हालत में न हों तो भी जातक का भाग्य सोया रहता है।
  • बृहस्पति जब 1/5/12वें घर में हो तो सूर्य और शनि को और 6/11वें घर में हो तो सिर्फ शनि को मदद करता है।

अशुभ बृहस्पति के कुलक्षण :

  • किसी भी रूप में सोना (स्वर्ण) खो जाए या चोरी हो जाय।
  • शिक्षा (तालीम) बंद हो जाए।
  • सिर के बाल चोटी के स्थान से उड़ जाएं।
  • अकारण झूठी अफवाह, गलतफहमी फैलने लगे।
  • कोई आरोप, दोषारोपण या तोहमत लगे।
  • गले में माला पहनना भी अशुभ बृहस्पति के लक्षण हैं।
  • बृहस्पति को उच्च एवं अनुकूल बनाने के लिए समुचित उपाय लाभदायक सिद्ध होते हैं।

बृहस्पति के उपाय

  • सोना गले में डाले रखें।
  • केसर खाएं और उसीका तिलक करें।
  • बृहस्पति की चीजों में से कोई पात्र, खांड (चीनी), घी, पीला रंग, दाल, चना (चने की दाल) हल्दी या कोई पवित्र पुस्तक दान में दें।
  • चलते पानी में तेल, बादाम और नारियल बहाएं।
  • बृहस्पतिवार को ब्राह्मण को पीले वस्त्र दान करें।
  • कढ़ी और चावल खाएं और खिलाएं।
  • हर समय पीले रंग का रुमाल अपनी जेब में रखें।
  • बृहस्पतिवार के दिन किसी भी हालत में साबुत मूंग नहीं खाना चाहिए।
  • मूंग यानी बुध के मिलने से बृहस्पति का प्रभाव नष्ट हो जाता है अर्थात् बुध की कुदृष्टि से बृहस्पति का असर मंदा हो जाता है।

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लाल-किताब  मार्च 2011

लाल किताब नामक प्रसिद्ध ज्योतिष पुस्तक का परिचय, इतिहास एवं अन्य देषों के भविष्यवक्ताओं से इसका क्या संबंध रहा है तथा इसके सरल उपायों से क्या प्राप्तियां संभव हैं वह सब जानने का अवसर इस पुस्तक में मिलेगा।

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