सोनिया गांधी पद त्याग का सिलसिला

सोनिया गांधी पद त्याग का सिलसिला  

व्यूस : 4071 | मई 2006
सोनिया गांधी पद त्याग का सिलसिला डाॅ. एस. सी. कुरसीजा केंद्रीय राजनीति में अपना प्रभुत्व रखने वाली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पिछले दिनों लोकसभा से इस्तीफा देना पड़ा। एक बार यही सोनिया प्रधानमंत्री बनने को थी, आज सांसद भी नहीं है। ऐसा क्यों हुआ, क्या कहती हैं उनकी ग्रह दशाएं आइए जानें... ह सही है कि कोई रा.जनेता जब भी कोई कदम उठाता है तो उसके पीछे कोई न कोई राजनीति जरूर छिपी रहती है। श्रीमती सोनिया गांधी का जन्म इटली के तुरीन शहर से 80 कि. मी. दरू गांव में हुआ था। उनकी जन्म तारीख 9 दि.संबर, 1946 21-30 मिनट है। उसके अनुसार जन्मकुंडली इस प्रकार है। 2005 में जब भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार सत्ता में थी और कांग्रेस का सफाया माना जा रहा था तब श्रीमती सोनिया गांव में घूमीं और ग्रामीण जनता से संपर्क बनाया। अगले ही चुनाव में कांग्रेस 141 सीटंे लेकर लोक सभा में आई और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन का सफाया हो गया। उस समय ऐसा माहौल बना कि सोनिया गांधी सर्व सम्मति से प्रधानमंत्री बनने ही वाली थी। कांग्रेस ने वाम दलों से मिलकर गठबंधन बनाया। परंतु आत्मा की आवाज पर प्रधान मंत्री बनने से सोनिया ने इन्कार कर दिया। उनके इस कदम ने जन साधारण का दिल जीत लिया और उनकी चारांे ओर जय जयकार होने लगी। उस समय उनकी बुध में राहु, राहु में बुध की दशा चल रही थी। बुध कर्क लग्न वालों के लिए द्वादश और तृतीय भाव का स्वामी होने के कारण महर्षि पराशर के अनुसार अशुभ है। अर्थात मानसिक सुख नहीं देता है। परंतु साहस और पराक्रम भाव में 38 बिंदु होने के कारण अपने पराक्रम से उन्होंने मान सम्मान प्राप्त किया। लग्न में वक्री शनि और साढ़े साती के कारण सत्ता प्राप्त नहीं हो पाई। इसका मुख्य कारण विदेशी मुद्दा था। दशांश वर्ग में दशम भाव में राहु और गुलिक स्थित हैं। लग्न का चंद्रमा शत्रु राशि में द्वादश भाव में है और मंगल एवं शनि से पीड़ित भी है। लाभ के पद के मामले पर श्रीमती सोनिया गांधी ने लोक सभा और राष्ट्रीय सलाहकार के पद से त्याग पत्र दिया था। हाल में वह आठ और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से इस्तीफा दे चुकी हैं। इनमें वे संस्थाएं भी शामिल हैं जो नेहरु-गांधी परिवार से जुड़े हैं और सरकारी अनुदान भी पाते हैं। जैसे इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट, जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड, इंडियन कौंसिल फाॅर चाइल्ड वेलफेयर ट्रस्ट, स्वराज भवन ट्रस्ट, कमला नेहरू मेमोरियल सोसायटी एंड हाॅस्पिटल, नेहरू ट्रस्ट फाॅर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, राउंड स्कवायर (स्क.ूलों का अंतर्राष्ट्रीय समूह) यूनाइटेड किंगडम, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी इन वेरियस कैपिसिटीज से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस कार्यकर्ता उन्हें त्याग की जीवित मूर्ति मान रहे हैं। 10 जनपथ पर भीड़ लगी है। नारेबाजी चल रही है। बुध/राहु/ शुक्र की दशा चल रही है। शुक्र दशांश का लग्नेश है और उसके पास 30 अंकों का बल है। परंतु लग्न पर वक्री शनि का गोचर हो रहा है। वक्री गुरु चतुर्थ भाव में गोचर कर रहा है। बुध भी वक्री होकर अष्टम भाव में गोचर कर रहा है। जब श्रीमती सोनिया ने त्यागपत्र दिया उस दिन चंद्रमा एवं लग्नेश भी षष्ठ भाव में गोचर कर रहा था। इस प्रकार ग्रह चाल के अनुसार त्यागपत्र देना पड़ा। परंतु गुरु और शुक्र स्वगृही, जनता के भाव चतुर्थ में होने के कारण सम्मान और बढ़ गया। उनके स्वेच्छया त्यागपत्र देने का कारण बुध का अष्टम भाव में वक्री

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रुद्राक्ष एवं सन्तान गोपाल विशेषांक  मई 2006

ऐसा माना जाता है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के अश्रु कणों से हुई है। ज्योतिष में प्रचलित अनेक उपायों में से रुद्राक्ष का उपयोग ग्रहों की नकारात्मकता एवं इनके दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है ताकि पीड़ा को कमतर किया जा सके। अनेक प्रकार के रुद्राक्षों को या तो गले में या बांह में धारण किया जाता है। रुद्राक्ष अनेक प्रकार के होते हैं। इनमें से अधिकांश रुद्राक्षों का नामकरण उनके मुख के आधार पर किया गया है जैसे एक मुखी, दो मुखी, तीन मुखी इत्यादि। इस विशेषांक में रुद्राक्ष के अतिरिक्त सन्तान पर भी चर्चा की गई है। इस विशेषांक के विषय दोनों है। इसमें रुद्राक्ष एवं संतान दोनों के ऊपर अनेक महत्वपूर्ण आलेखों को सम्मिलित किया गया है जैसे: रुद्राक्ष की उत्पत्ति एवं महत्व, अनेक रोगों में कारगर है रुद्राक्ष, सन्तान प्राप्ति के योग, कैसे जानें कि सन्तान कितनी होंगी, लड़का होगा या लड़की जानिए स्वर साधना से, सन्तान बाधा निवारण के ज्योतिषीय उपाय, इच्छित सन्तान प्राप्ति के सुगम उपाय, सन्तान प्राप्ति के तान्त्रिक उपाय आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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