धन दोषों से मुक्ति का पर्व दीपावली

धन दोषों से मुक्ति का पर्व दीपावली  

व्यूस : 3688 | अकतूबर 2009
धन दोषों से मुक्ति का पर्व दीपावली शाम ढींगरा हिंदू धर्म में सिद्धियों और साधनाओं के लिए पर्व और तिथियां निर्धारित हैं। दीपावली का पर्व एक ऐसा ही पर्व है, जब साधकगण विभिन्न विधियों से अपनी अपनी साधनाएं सिद्ध करते हैं। यह पर्व धनतेरस से आरंभ होकर भैया दूज तक चलता है। पांच दिनों तक चलने के कारण इसे पंच पर्व भी कहा जाता है। इस अवसर पर लक्ष्मी की निष्ठापूर्वक आराधना करने से धनोपार्जन के मार्ग में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही कर्ज से मुक्ति मिलती है, रुके हुए धन की वापसी होती है और धन बीमारी, कोर्ट कचहरी के मामले आदि पर व्यय से रक्षा होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार दीपावली का पंच पर्व मानव जाति को निर्धनता से मुक्त कर सुख समृद्धि की ओर ले जाने वाला पर्व है। दीपावली की रात सर्वाधिक अंधेरी रात होती है। इसलिए इस दिन घर में हर स्थान पर दीप जलाए जाते हैं ताकि किसी भी स्थान पर कोई नकारात्मक शक्ति प्रवेश न कर पाए और बाहर अंधकार में जो भी सकारात्मक शक्तियां हों वे हमारे घर में प्रवेश कर हमें धन-धान्य से परिपूर्ण कर दें। दीपावली के दिन निम्नलिखित उपाय अपनाकर धनोपार्जन के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सकता है। घर में लक्ष्मी के स्थयी वास के लिए श्रीयंत्र की स्थापना करके कमलगट्टे की माला से निम्नोक्त मंत्र का जप करें। ¬ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं श्री महालक्ष्मी नमः वांछित धन की प्राप्ति के लिए धनतेरस के दिन लाल वस्त्र पर चांदी, सोने या अष्टधातु के बने कुबेर एवं लक्ष्मी यंत्रों को प्राण प्रतिष्ठा कर स्थापित करके उनकी कमल के फूल तथा अन्य लाल रंग के फूलों, अष्टगंध, अनार और सिंदूर से विधिवत पूजा करें और कमलगट्टे की माला से लक्ष्मी और कुबेर के मंत्रों का जप करके माला को अपने गले में धारण करें। कुबेर का मंत्र: ¬ चक्षाय कुबेराय वैश्रवणय धनाधिपतये धन-धान्य समृ(ि में देही दापय स्वाहा। लक्ष्मी का मंत्र: ¬ ऐं ह्रीं श्रीं क्ली श्रीमहालक्ष्म्यै नमः धन संपदा में बरकत व धन संग्रह के लिए दीपावलीे के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व नहा धो लें सूर्योदय के पश्चात मां भगवती के श्रीसूक्त का पाठ करें। मां लक्ष्मी को लाल अनार के दानों का भोग लगाएं, कमल का फूल चढ़ा कर और लाल सिंदूर लगा कर आरती करें। घर की उत्तर दिशा से घर से बाहर जा कर बेल का पौधा ले कर वापस उत्तर दिशा में आ कर उसे गमले में लगाएं और श्रीसूक्त का पाठ कर उत्तर दिशा में ही उस गमले को स्थापित कर दें। नित्य सायंकाल उस पौधे के पास शुद्ध घी का दीपक जलाएं और श्रीसूक्त का पाठ करें। कर्ज से मुक्ति हेतु दक्षिणावर्ती गणेशजी की मूर्ति और गणेश यंत्र को घर में स्थापित करें और यंत्र के दाहिनी ओर कुबेर यंत्र स्थापित करें। गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ करें, गणेश जी की उपासना करें और हवन, जप तथा तर्पण करें। व्यापार में उन्नति के लिए सफेद कमल के फूल पर शालिग्राम को और लाल कमल के फूल पर लक्ष्मी को स्थापित करके निम्नलिखित मंत्र का जप और पुरुष सूक्त तथा लक्ष्मी सूक्त का संपुटित पाठ करें, व्यापार में उन्नति होगी और रुका हुआ पैसा वापस आएगा। मंत्रः क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठालक्ष्मी नाश्याभ्यहम अभूतिमसमृद्धि च सर्वा निर्गुद मे गृहात।

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दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2009

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