लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विशेष प्रभावशाली है दीपावली पूजन पोटली

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विशेष प्रभावशाली है दीपावली पूजन पोटली  

व्यूस : 7055 | अकतूबर 2008
लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विशेष प्रभावशाली है दीपावली पूजन पोटली आचार्य रमेश शास्त्री देवी महालक्ष्मी संपूर्ण ऐश्वर्य, चल, अचल संपत्ति, यश, कीर्ति एवं सकल सुख-वैभव देने वाली साक्षात् जगत माता नारायणी हैं। श्री गणेश जी समस्त विघ्नों के नाशक, अमंगलों को दूर करने वाले, सद्विद्या एवं बुद्धि के दाता हैं। कार्तिक अमावस्या अर्थात् दीपावली के दिन इनकी संयुक्त पूजा-अर्चना करने से कुटुंब परिवार में धन-सम्पत्ति का सुख चिरकाल तक बना रहता है। इस वर्ष दीपावली का पवित्र त्यौहार 28 अक्तूबर मंगलवार, चित्रा और स्वाति नक्षत्र काल में मनाया जाएगा। अमावस्या एवं मंगलवार का संयोग होने से दीपावली के मुहूर्त में मंत्र जप तथा सिद्धि, तंत्र साधना आदि के लिए समय विशेष रूप से सिद्धिदायक रहेगा। दीपावली के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्वच्छ अथवा नवीन वस्त्र धारण करें। घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें तथा मन में भी स्वच्छ एवं पवित्र विचारों को धारण करें। अधीनस्थ कर्मचारी, सेवकगण एवं अतिथि जनों का निष्छल भाव से सत्कार करते हुए उपहार और मिष्टान्न आदि भेंट करें। दीपावली का पूजन मुहूत्र्त दीपावली में लक्ष्मी-गणेश का पूजन शुभ मुहूर्त में ही करें। शुभ मुहूर्त मंें पूजा-पाठ आदि करना अधिक लाभदायक एवं कल्याणकारी होता है। पूजन मुहूर्त के लिए प्रदोष काल, स्थिर लग्न अधिक शुभ रहेगा। प्रदोष काल स्थानीय सूर्यास्त काल के बाद से 2 घंटा 40 मिनट तक का समय प्रदोष काल होता है। इस समय अवधि में लक्ष्मी-गणेश जी का पूजन करें। स्थिर लग्न, वृष एवं सिंह लग्न में भी पूजन करना शुभदायक रहेगा। रात्रि 19 बजकर 17 से रात्रि 20 बजकर 55 मिनट तक लाभ की चैघड़िया तथा उसके बाद 22 बजकर 34 मिनट से 24 बजकर 11 मिनट तक शुभ चैघड़िया मुहूर्त रहेगा। इस समय अवधि में कुबेर पूजन, महालक्ष्मी पूजन, श्रीसूक्त, लक्ष्मी सूक्त, लक्ष्मी सतनाम मंत्र जपादि करना सिद्धिप्रद रहेगा। सुबह 4 बजकर 45 मिनट तक अमावस्या रहेगी। इस समय अवधि तक साधकजन यंत्र पूजन मंत्र-जप, पूजा, हवन आदि क्रियाओं का संपादन करके अभीष्ट प्राप्त कर सकते हैं। दीपावली के दिन यदि कोई व्यक्ति अपने घर में विधिपूर्वक लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति एवं यंत्र की मंत्र से सम्यक प्राण-प्रतिष्ठा करके पूजा करता है तो उसके जीवन में श्री महालक्ष्मी एवं गणेश जी की कृपा से कभी भी धन का अभाव नहीं होता है। इस वर्ष दीपावली के शुभ पूजन के लिए फ्यूचर पाॅइंट की ओर से विशेष लक्ष्मीदायक दीपावली पूजन पोटली तैयार की गई है जिसमें लक्ष्मी गणेश जी की पारद की मूर्तियां, श्री महालक्ष्मी यंत्र, स्फटिक श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, लक्ष्मी जप के लिए कमलगट्टे की माला, लक्ष्मी जी का चांदी का लाॅकेट, पारद लक्ष्मी पादुका एवं सरल लक्ष्मी पूजन विधि की पुस्तिका शामिल है। पारद में निर्मित मूर्ति, यंत्र आदि विशेष शुभफलदायी माने जाते हैं। दीपावली के दिन लक्ष्मी के मंत्र का कमलगट्टे अथवा स्फटिक की माला पर जप करने से शीघ्र मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसके अतिरिक्त दीपावली के दिन धनाध्यक्ष कुबेर यंत्र पर उनका पूजन करने से धन प्राप्ति के नवीन स्रोत बनते हैं। लक्ष्मी पूजन पुस्तिका के अनुसार आप स्वयं भी अपने घर में दीपावली के दिन पूजन कर सकते हैं। अगर आप स्वयं करने में असमर्थ हों तो आप सुयोग्य ब्राह्मण से भी करवा सकते हैं। पारद लक्ष्मी गणेश: दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त में इन दोनों की युगल पूजा करने से सभी विघ्न-बाधाओं का शमन होता है। व्यापार एवं नौकरी में अच्छी तरक्की होती है। घर-परिवार में सुख, समृद्धि एवं मंगल का वास होता है। मंत्र: ¬ गं गणपतये नमः महालक्ष्मी यंत्र: महालक्ष्मी यंत्र की विधिवत् पूजा करने से भगवती लक्ष्मी की कृपा से अप्राप्त लक्ष्मी की प्राप्ति होती है तथा प्राप्त ल क्ष् म ी चिरकाल तक बनी रहती है। लक्ष्मी की स्थिरता के लिए इस यंत्र की पूजा की जाती है। लक्ष्मी जी का लघु बीज मंत्र ¬ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः कुबेर यंत्र: यह यंत्र देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर जी का सिद्ध यंत्र माना जाता है। विशेष रूप से धनतेरस या दीपावली के दिन इस यंत्र को लक्ष्मी-गणेश की पूजा के उपरांत पूजन करके धनकोष या तिजोरी में स्थापित करना चाहिए। इसके प्रभाव से अक्षय धन कोष की प्राप्ति होती है और नवीन आय के स्रोत बनते हैं। लक्ष्मीदायक लाॅकेट: इस लाॅकेट में एक ओर महालक्ष्मी की मूर्ति तथा दूसरी ओर श्रीयंत्र अंकित है। इस लाॅकेट को दीपावली के दिन पंचोपचार पूजा करके गले में धारण करने से नौकरी अथवा व्यवसाय में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दूसरे लोगों पर भी इसे धारण करने से अच्छा लाभकारी प्रभाव पड़ता है जिससे आजीविका एवं व्यवसाय में मनोनुकूल उन्नति एवं लाभ प्राप्त होता है। स्फटिक श्रीयंत्र: यंत्र राज श्रीयंत्र की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है। यदि यह स्फटिक पर बना हो तो इसकी महिमा में और वृद्धि हो जाती है। श्रीयंत्र के दर्शन मात्र से ही मनुष्य धन्य हो जाता है। इस यंत्र की पूजा, साधना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं इसी जन्म में पूर्ण हो जाती हैं। धन के साथ ही यश-कीर्ति भी बढ़ती है। कमलगट्टे की माला: यह माला लक्ष्मी के सर्वाधिक प्रिय कमल पुष्प के बीजों से बनाई जाती हैं। लक्ष्मी को कमल प्रिय होने से उनका नाम पद्मा, कमला, पद्महस्ता आदि पड़ा। इस माला पर लक्ष्मी मंत्र का जप करने से साधक को शीघ्र मनोवांछित सफलता प्राप्त होती है। मंत्र ¬ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ¬ महालक्ष्म्यै नमः कुबेर मंत्र: ¬ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धन्याधिपतये धन-धान्य समृ(िं मे देहि दापय स्वाहा। पारद लक्ष्मी पादुका: पारद धातु में बनी लक्ष्मी पादुकाएं विशेष शुभदायी मानी जाती हैं। घर में अथवा व् य व स ा य स्थल पर इनका पूजन करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इन चरण पादुकाओं को बिछाकर मन ही मन देवी लक्ष्मी से अपने घर में अथवा व्यवसाय स्थल आदि में स्थिर रूप से पधारने की प्रार्थना करें। दीपावली के पूजनोपरांत इन पादुकाओं की लक्ष्मी जी के चरणकमलों की भांति पूजा करें। लक्ष्मी की पादुकाओं के दर्शन-पूजन से आर्थिक असुरक्षा का भय दूर होता है और जीवन में आर्थिक सुरक्षा बनती है। इन पादुकाओं में अंकित समस्त चिह्न जैसे- स्वास्तिक, कमल, कलश, चक्र, मत्स्य, त्रिकोण, त्रिशूल, शंख, सूर्य, ध्वजा आदि शुभ एवं लाभ के प्रतीक हैं। दीपावली के दिन इन लक्ष्मी पादुकाओं का पंचामृत, गंध, अक्षत, धूप, दीप आदि से पूजन करें। ध्यान रहे कि इन पादुकाओं को इस प्रकार से स्थापित करें कि उनका मुख अपनी ओर रहे। नित्य उन्हें प्रणाम करें, दर्शन करें और सिर पर स्पर्श करें। इस प्रकार, नित्य पूजन दर्शन आदि करने से घर में लक्ष्मी का वास बना रहता है। इस लक्ष्मी पूजन पोटली में संपूर्ण सामग्री द्वारा अपने घर में अथवा कार्यालय, फैक्ट्री आदि व्यवसाय स्थल पर दीपावली के दिन पूजन करवा सकते हैं। इसके प्रभाव से घर परिवार में सुख-संपत्ति बनी रहती है। धन की बरकत होती है और रुका हुआ धन प्राप्त होता है। नौकरी या व्यवसाय में शीघ्र उन्नति होती है। पूजा में लक्ष्मी मंत्रों का कम से कम 1 माला अथवा अपनी शक्ति सामथ्र्य के अनुसार 3, 5, 7, 11, 21 संख्या में जप कर सकते हैं। श्रीसूक्त एवं लक्ष्मी सूक्त का पाठ इस समय जरूर करें।

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