दीपावली पूजन पोटली

दीपावली पूजन पोटली  

व्यूस : 3770 | अकतूबर 2009
दीपावली पूजन पोटली पं. रमेश शास्त्री भगवती महालक्ष्मी चल, अचल संपूर्ण संपत्तियों एवं अष्ट सिद्धि नव निधियों की अधिष्ठात्री साक्षात् नारायणी हैं। अग्रपूज्य देव श्री गणेश ऋद्धि- सिद्धि, बुद्धि, शुभ, लाभ के स्वामी एवं सकल अमंगलों, विघ्नों के विनाशक हैं, अर्थात दीपावली के शुभ मुहूर्त में श्री लक्ष्मी एवं गणेश जी का संयुक्त पूजन करने से घर में सभी प्रकार के सुख, ऐश्वर्य एवं आनंद की प्राप्ति होती है। सर्व प्रथम पूजन सामग्री को पूजा स्थल पर एकत्रित करके अपने सम्मुख रखें, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्थिर आसन पर बैठे दीपावली में पारद धातु से निर्मित गणेश, लक्ष्मी के पूजन का विशेष महत्व होता है। पारद लक्ष्मी गणेश: पारद लक्ष्मी गणेश जी की मूर्तियों, को शुद्ध जल एवं दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से बारी-बारी से स्नान कराकर शुद्ध वस्त्र से पोछ करके आसन पर स्थापित करें। उसके बाद वस्त्र अर्पण करें। गन्ध, अक्षत, रक्त पुष्प, धूप दीप, नैवेद्य, फल, तांबुल, दक्षिणा आदि से पूजन करें, पूजन में यदि संस्कृत मंत्र, श्लोक आदि उच्चारण में कठिनाई हो तो इस प्रकार से लघु नाम से पूजन कर सकते हैं। जैसे- गन्धं समर्पयामि इत्यादि इस प्रकार से नाम मंत्र से संपूर्ण पूजन कर सकते हैं। स्फटिक श्री यंत्र: इस यंत्र को गंगा जल और पंचामृत से शुद्ध करके लाल वस्त्र अथवा तांबे या चांदी की प्लेट पर स्थापित करके गंध, अक्षत धूप, दीप आदि से पूजन करके लक्ष्मी गणेश जी की मूति के समक्ष स्थापित कर दें। इसके प्रभाव से नौकरी व्यापार में दिनो-दिन उन्नति बढ़ती है। महालक्ष्मी यंत्र: इस यंत्र को गंगाजल आदि से शुद्ध करके, लाल कपड़े पर रखकर गंध, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजन करके अपने घर में स्थापित करें। इसके प्रभाव से चिर स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। कुबेर यंत्र: यह यंत्र देवताओं के धनाध्यक्ष कुबेर का प्रतीक है। लक्ष्मी पूजा के पश्चात इस यंत्र की रोली, अक्षत आदि से पूजा करके घर अथवा व्यवसाय स्थल की तिजोरी में रखें। इसके प्रभाव से व्यवसाय अथवा कार्यक्षेत्र में आय में वृद्धि होती है। श्री यंत्र लाॅकेट: इस यंत्र लाॅकेट का दीपावली के दिन पूजन करके श्रद्धा विश्वास पूर्वक गले में धारण करें। इससे आप पर सदैव लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी तथा आप सुख एवं प्रसन्नता का अनुभव करेंगे। कमल गट्टे की माला: इस माला को संपूर्ण दीपावली पूजन के उपरांत जल, रोली, धूप दीप से पूजन करके इस पर लक्ष्मी बीज मंत्र की कम से कम एक माला जप अवश्य करें। लक्ष्मी बीज मंत्र: ¬ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः गोमती चक्र: गोमती चक्र को शुद्ध जल से स्नान कराकर उनपर चंदन रोली, पुष्प आदि से पूजन करके अपने पूजाघर में रखें। यह लक्ष्मी प्राप्ति में सहायक होते हैं तथा शुभ माने जाते हैं। कौड़ी: कौड़ियों का पूजन तथा स्थापन दीपावली आदि शुभ मुहूर्तों में शुभ फलदायक माना जाता है। इन्हें गंध, अक्षत, धूप, दीप से पूजन करके अपनी तिजौरी या गल्ले में रखें, इससे, व्यवसाय आदि में वरकत होती है। सिंदूर: लक्ष्मी जी को सिंदूर का तिलक अत्यंत प्रिय है। दीपावली पूजन के समय पर इस अभिमंत्रित सिंदूर को अनामिका उंगली से मां लक्ष्मी को तिलक करें। जिससे लक्ष्मी जी की अधिक कृपा प्राप्त होगी। दीपावली पूजन पुस्तिका: दीपावली पूजन पुस्तिका में श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त, दीपावली पूजन की विस्तृत विधि के साथ विभिन्न स्तोत्र एवं आरती संग्रह भी दिया गया है। जिनके पाठ से आपको लक्ष्मी की प्राप्ति के साथ मानसिक संतुष्टि भी प्राप्त होगी।

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दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2009

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