(9 लेख)
चंद्र-शनि युति अर्थात् विषयोग

जुलाई 2008

व्यूस: 15291

इस धरती पर जन्म लेने वाले हर प्राणी के लिए उसका जन्म-क्षण बहुत महत्वपूर्ण होता है, ऐसी ज्योतिष ज्ञान की मान्यता है। इस क्षण को आधार मानकर ज्योतिष गणना द्वारा उसके सम्पूर्ण जीवन का लेखा-जोखा जन्मकुंडली से तैयार किया जा सकता है। इस ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

अष्टम भावस्थ शनि का विवाह पर प्रभाव

जनवरी 2009

व्यूस: 9930

प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने एकमत से जातक की कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का निर्णायक भाव माना है और इसे जाया भाव, भार्या भाव, प्रेमिका भाव, सहयोगी, साझेदारी भाव स्वीकारा है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टम भावस्थ शनि और मृत्यु

जुलाई 2005

व्यूस: 7999

अष्टम भाव रहस्यमय है और इसके कुछ कारकत्व भी रहस्य से जुड़े हैं। शनि तो रहस्यमय है ही। अष्टम भाव का कारक भी शनि ही है। अष्टम भाव में ही 22वां द्रेष्काण होता है। शनि यदि अष्टम भावस्थ हो तो उसकी दृष्टियां दशम, द्वितीय व पंचम भावों प... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

आत्महत्या क्यों, कैसे ?

अकतूबर 2009

व्यूस: 3842

इस आलेख में उन ग्रह स्थितियों दशा तथा गोचर का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है जिनके कारण जातक आत्महत्या जैसा दुःसाहस कर बैठता है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टम भावस्थ शनि-व्यवसाय

अप्रैल 2006

व्यूस: 2591

जन्म कुंडली के दशम भाव को कर्म भाव कहा गया है और द्वितीय भाव का संबंध आय व संचित धन से होना बताया गया है। धन तथा कर्म का मुख्य कारक बृहस्पति है, शनि भी कर्म तथा नौकरी का कारक है। यदि दशम व द्वितीय भाव तथा उनके स्वामी और बृहस्पति ए... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

अष्टम भावस्थ शनि-II संतान

अकतूबर 2005

व्यूस: 2290

पिछले शोध पत्र में शनि के अष्टम भावस्थ होने को रहस्यमय कहा गया था। अष्टमस्थ शनि की पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि होने के कारण इसका शुभ-अशुभ प्रभाव शिक्षा, संतान आदि पर होना चाहिए। पंचम भाव को पूर्व पुण्य भाव भी कहा जाता है। पूर्व जन्म ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगबाल-बच्चेग्रहभविष्यवाणी तकनीक

अष्टम भावस्थ शनि और शिक्षा

जनवरी 2006

व्यूस: 1909

जीवन में शिक्षा का स्थान महत्वपूर्ण है, विशेषकर आधुनिक समय में क्योंकि यह शिक्षा ही जीवन के आधार-व्यवसाय का निर्णय करती है। समय परिवर्तन से इस संसार का परिवेश बदला, नये मार्ग खुले तथा नये-नये व्यवसायों का निर्माण हुआ। इसके साथ ही ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योग

थैलेसीमिया: एक रक्ताल्पता रोग

अप्रैल 2005

व्यूस: 1559

थैलेसीमिया एक ऐसा रोग है जो विरासत में बच्चे को माता-पिता से मिलता है। इसे समझने और इसके कारणों का ज्योतिषीय आधार जानने के लिए बुनियादी विषय में बुनियादी ज्ञान का होना आवश्यक है। भिन्न-भिन्न समूहों की वंशानुगत अव्यवस्थाओं के कारण... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यज्योतिषीय योगचिकित्सा ज्योतिष

कैंसर ज्योतिष के आईने से

अप्रैल 2008

व्यूस: 1435

हमारे शरीर में कई अंग हैं जो अवयवों व नाड़ी जाल से मिलकर बने हैं। इन सबके समुचित ढंग से कार्य करते रहने से यह शरीर सुचारु रूप से कार्य करता रहता है। हमारे शरीर में असंख्य सूक्ष्म कोशिकाएं हैं जिनसे अंग-प्रत्यंग बने हैं। ये कोशिकाएं... और पढ़ें

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