विजय प्रकाश शास्त्री


(17 लेख)
पुंसवन संस्कार

मई 2014

व्यूस: 5717

पुंसवन संस्कार-(दूसरा संस्कार) पुंसवन संस्कार ‘भावी सन्तति स्वस्थ, पराक्रमी व पुत्र हो’- इस प्रयोजन से गर्भ के संस्कार के रूप में किया जाता है। पुत्र अभिलाषा न होने पर भी धर्मसिन्धु के अनुसार यह संस्कार प्रत्येक ग... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

गर्भाधान संस्कार

अप्रैल 2014

व्यूस: 3860

भारतीय संस्कृति में कलिकाल में मनुष्य के सोलह संस्कारों का वर्णन किया है उसमें प्रथम संस्कार है। हमारे घर में उत्तम संतान का जन्म हो यही सभी चाहते हैं। हर मनुष्य की इच्छा होती है उसकी संतान उत्तम गुणयुक्त, संस्कारी, बलवान, आरोग्यव... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

कर्मकांड में संस्कारों का महत्व

मार्च 2014

व्यूस: 3235

भारतीय संस्कृति में संस्कारों का महत्वपूर्ण स्थान है। किसी वस्तु के रूप को बदल देना या उसे नया रूप देना ही संस्कार कहलाता है। भारत में मनुष्य के लिए संस्कारों का महत्व है। भारतवर्ष ऋषि-मुनियों, देवी-देवताओं की पवित्र भूमि मानी जात... और पढ़ें

देवी और देवपर्व/व्रत

अन्नप्राशन संस्कार

अकतूबर 2014

व्यूस: 2442

जन्म से पूर्व बालक को नौ माह तक माता के गर्भ में रहना पड़ता है। इस कारण माता के गर्भ में मलिन-भक्षणजन्य दोष बालक में आ जाते हैं। इस संस्कार के द्वारा बालक में उत्पन्न इन दोषों का नाश हो जाता है। इस संदर्भ में कहा भी गया... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

सीमन्तोन्नयन संस्कार

जून 2014

व्यूस: 1981

तीसरा संस्कार ‘सीमन्तोन्नयन’ है। गर्भिणी स्त्री के मन को सन्तुष्ट और अरोग रखने तथा गर्भ की स्थिति को स्थायी एवं उत्तरोत्तर उत्कृष्ट बनते जाने की शुभाकांक्षा-सहित यह संस्कार किया जाता है। समय-पुंसवन वत् प्रथमगर्भे षष्ठ... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

यज्ञोपवीत संस्कार

जनवरी 2015

व्यूस: 1627

समस्त सोलह संस्कारों का अत्यंत महत्त्व है किंतु विद्वानों द्वारा यज्ञोपवीत संस्कार का विशेष महत्त्व माना गया है। व्यास स्मृति द्वारा कहे गये सोलह संस्कारों में यज्ञोपवीत संस्कार का वेदोक्त वर्णाश्रम धर्म के साथ अत्यंत गहरा स... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

कर्णवेधन संस्कार

दिसम्बर 2014

व्यूस: 1578

अन्य संस्कारों के समान कर्णवेध संस्कार का भी बहुत अधिक महत्त्व माना गया है। इस संस्कार के अंतर्गत बालक एवं बालिका के कानों को छिदवाया जाता है। बालिकाओं का कान छिदवाने के साथ-साथ नाक भी छिदवाया जाता है। पुरुष को पूर्ण पुरुषत... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

जातकर्म संस्कार

जुलाई 2014

व्यूस: 1508

16 संस्कारों में जातकर्म संस्कार का विशेष महत्व है। यह संस्कार शिशु के जन्म लेने के पश्चात किया जाता है- जातमात्रस्य वेदोक्तं कर्म जातकर्म अर्थात् शिशु के उत्पन्न होते ही जो वेदोक्त कर्म किया जाता है, वह जातकर्म संस्का... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

नामकरण संस्कार

आगस्त 2014

व्यूस: 1449

नाम व्यक्ति को उनके स्वयं के होने का बोध कराता है, इसलिये नाम का किसी भी व्यक्ति के लिये बहुत अधिक महत्त्व माना गया है। भीड़ में अपने किसी स्वजन के गुम हो जाने पर उसका नाम लेकर पुकारा जाता है। इस भीड़ में इस आवाज के प्रत... और पढ़ें

देवी और देवअध्यात्म, धर्म आदिविविध

वेदारम्भ संस्कार

फ़रवरी 2015

व्यूस: 1119

वेदारंभ संस्कार को अक्षरज्ञान संस्कार के साथ जोड़कर देखते हैं। उनके अनुसार अक्षरों का ज्ञान प्राप्त किये बिना न तो वेदों का अध्ययन किया जा सकता है और न शास्त्रों का लेखन कार्य संभव है। इसलिये वेदारंभ संस्कार से पूर्व अक्षरारं... और पढ़ें

अध्यात्म, धर्म आदिविविध

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