दीपावली के दिन लक्ष्मी एवं समृद्धि प्राप्ति हेतु निम्नलिखित विशेष उपाय किए जा सकते हैं: प्रचुर मात्रा में धनागमन हेतु - दीपावली से पूर्व धन त्रयोदशी के दिन लाल वस्त्र पर धातु से बने कुबेर एवं लक्ष्मी यंत्र को प्रतिष्ठित करके उनकी लाल पुष्प, अष्टगंध, अनार, कमलगट्टे, कमल के फूल, सिंदूर आदि से पूजा करें। फिर कमलगट्टे की माला पर कुबेर के मंत्र का जप करें तथा माला को गले में धारण कर लें। ¬ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन्याधिपतये, धन धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा। धन संग्रह हेतु - दीपावली के दिन प्रातः काल स्नानादि करके मां भगवती के श्रीसूक्त का पाठ करें। लक्ष्मी जी की प्रतिमा को लाल अनार के दानों का भोग लगाएं और आरती करें। घर की उŸार दिशा की ओर से प्रस्थान करके बेल का छोटा पेड़ घर में लाएं और उसे लक्ष्मी सूक्त पढ़ते हुए घर की उŸार दिशा में किसी गमले में लगाएं। फिर प्रत्येक सायंकाल वहां शुद्ध देशी घी का दीपक जलाएं। कर्ज मुक्ति हेतु - दक्षिणावर्ती गणेश जी की उपासना करें तथा ‘गजेन्द्र मोक्ष’ स्तोत्र का पाठ करें। दक्षिणावर्ती गणेश जी की मूर्ति के साथ गणपति यंत्र को भी स्थापित करें। इस यंत्र के दायीं ओर कुबेर यंत्र को स्थापित करना चाहिए। जप के पश्चात् हवन, तर्पण, मार्जन आदि करना आवश्यक माना गया है। व्यापार में धन वृद्धि हेतु - शालिग्राम को श्वेत कमल एवं लक्ष्मी यंत्र को लाल कमल के पुष्प पर स्थापित करके पुरुष सूक्त तथा लक्ष्मी सूक्त को आपस में संपुटित कर पाठ करें। क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम्। अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात्। निम्नलिखित किसी एक मंत्र का जप कमल गट्टे, स्फटिक या लाल चंदन की माला पर करना श्रेष्ठ है। प्रतिदिन एक माला जप लक्ष्मी दोष को सर्वदा के लिए दूर करने में सक्षम है। 1. ¬ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। 2. ¬ श्री श्री ललिता महात्रिपुरसुन्दर्यै श्री महालक्ष्म्यै नमः।। 3. ¬ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं हीं श्रीं ¬ महालक्ष्म्यै नमः।। 4. महालक्ष्म्यै च विùहे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्। 5. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनमः।। दीपावली पूजन स्थिर लग्न में ही करना चाहिए, ताकि लक्ष्मी जी घर में स्थिरता से वास करे। दीपावली पर स्थिर लग्न संध्या काल में वृष एवं सिंह लग्न होते हैं। दिल्ली में वृष लग्न 19.20 से 21.15 तक रहेगा एवं सिंह लग्न मध्य रात्रि उपरांत 1.54 से 4.11 तक रहेगा। वृष लग्न गृहस्थ के लिए एवं सिंह लग्न तांत्रिकों के लिए उत्तम है। व्यापारियों के लिए दिन में कुंभ लग्न में 14ः52 से 16ः20 तक अपने प्रतिष्ठानों में लक्ष्मी पूजन उत्तम रहेगा। पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश जी के चित्र, या मूर्ति लेने चाहिए। स्फटिक, रजत या स्वर्ण की मूर्तियों की विशेष महिमा है। साथ ही कोई श्री यंत्र आदि भी स्थापित करना लक्ष्मी वास के लिए उत्तम माना गया है। इन सबका पूजन कर श्री सूक्त या लक्ष्मी सूक्त आदि का पाठ धन की कमी को दूर कर, स्थिर लक्ष्मी का वास देता है।


दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2009

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