शीघ्र प्रभावी हनुमानोपासना

शीघ्र प्रभावी हनुमानोपासना  

वेद पुराणों में हनुमान जी को अजर-अमर कहा गया है। शास्त्रों में सप्त चिरंजीवों का उल्लेख प्राप्त होता है - हनुमान, राजाबली, महामुनि व्यास, अंगद, अश्वत्थामा कृपाचार्य और विभीषण। ये सब आज भी इस धरा पर विचरण करते हैं। इनमें सर्वाधिक पूजनीय श्री हनुमानजी ही हैं। चूंकि हनुमान जी सदेह इस भूमि पर विद्यमान हैं अतः उनकी उपासना किसी भी विधि से की जाए, निश्चित रूप से फलदायी होती है। तंत्र शास्त्र के कुछ प्रयोगों में हनुमान जी के साथ साथ अंगद तथा विभीषण की साधना भी प्रचलित है। संकलित प्रयोग तंत्र की महत्वपूर्ण विद्या शाबर मंत्र का शीघ्र फलदायी प्रयोग है।

विघ्न निवारक मंत्र प्रयोग

विधान- हनुमान जी के विग्रह के सामने बैठकर ऊँ नमो हनुमन्ते भय भंजनाय सुखं कुरु कुरु फट् स्वाहा मंत्र का नित्य एक हजार आठ बार जप करें। जप लाल वस्त्र पहनकर ही करें। फिर विधिवत् पूजन तथा आरती करें। यह प्रयोग एक सौ साठ दिन तक नियमित रूप से करना चाहिए।

रोग, ग्रहदोष, शत्रुपीड़ा, ऊपरी बाधा आदि से मुक्ति और शत्रु पर विजय हेतु प्रयोग

मंत्र-

ऊँ ऐं श्रीं ह्रीं ह्रीं हं ह्रौं ह्रः ऊँ नमो भगवते महाबल पराक्रमाय भूत-प्रेत-पिशाच ब्रह्म राक्षस शाकिनी डाकिनी यक्षिणी पूतना मारी-महामारी राक्षस भैरव बेताल ग्रह राक्षसादिकान् क्षणेन हन हन, भंजय भंजय मारय मारय, शिक्षय शिक्षय महा-महेश्वर रुद्रावतार ऊँ हुम् फट स्वाहा। ऊँ नमो भगवते हनुमदाख्याय रुद्राय सर्व दुष्टजन मुख स्तम्भनं कुरु स्वाहा। ऊँ ह्रीं ह्रीं हं ह्रौं ह्रः ऊँ ठं ठं ठं फट् स्वाहा।

विधि: मंगलवार को व्रत रखें और सूर्यास्त के समय पूर्ण विधि से हनुमानजी की मंदिर में पूजा करें। फिर उक्त मंत्र का सात हजार बार जप करें और अर्धरात्रि के पश्चात् दशांश हवन करें। यह प्रयोग सात मंगलवार तक करने से कार्य सिद्ध हो जाता है। प्रतिद्वंद्वी को परास्त करने के लिए इस मंत्र का विशेष महत्व है। सिर्फ हवन सामग्री में परिवर्तन किया जाता है।

शत्रु संकट निवारण हेतु

ऊँ पूर्व कपि मुखाय पंचमुख हनुमते टं टं टं टं सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा।।

इस मंत्र का पंचमुखी हनुमान जी के मंदिर या चित्र के समक्ष नित्य जप करें तथा गुग्गुल का धूप दें। यदि गंभीर संकट या शत्रु से अधिक पीड़ा हो तो सात दिन में 27 हजार जप करके आठवें दिन मंगलवार को रात्रि में सरसों का हवन करें। इसी मंत्र को बोलते हुए स्वाहा के साथ सरसों की आहुतियां दें। 270 आहुतियां देना आवश्यक है।

अनिष्टों से रक्षा तथा भय से मुक्ति के लिए निम्नलिखित मंत्र का जप करना चाहिए।

आसन बांधू, वासन बांधू, बांधू अपनी काया।

चारि खूंट धरती के बांधू हनुमत! तोर दोहाई।।

साधारण शब्दों का यह छोटा सा मंत्र अद्भुत प्रभाव वाला दिव्य मंत्र है। इसके जप से गंभीर से गंभीर अनिष्टों से रक्षा होती है।

मंत्र की प्रयोग विधि:

  • हनुमान जी के मंदिर के समीप स्थित बरगद या पीपल के वृक्ष की छोटी-छोटी चार टहनियां ले लें और उसी मंदिर में हनुमान जी के समक्ष रखकर उक्त मंत्र का एक माला (108 बार) जप करें और टहनियां घर ले आएं। अगले दिन पुनः उन टहनियों को लेकर उसी मंदिर में जाएं, 108 बार उक्त मंत्र का जप करें और पुनः वापस ले आएं। ऐसा 16 दिन करें। सत्रहवें दिन उन टहनियों को अपने घर या दुकान या कार्यालय के चारों दिशाओं में गाड़ दें। एक बार में सिर्फ चार टहनियां ही अभिमंत्रित करें। यह प्रयोग स्वयं करे, किसी अन्य व्यक्ति से न कराए।
  • हनुमान जी को लाल धागे में बनी लाल फूलों की माला चढ़ाएं। फिर वहीं मंदिर में बैठकर उक्त मंत्र का तीन हजार दो सौ बार जप करें। फिर उस माला फूलों को सावधानी से निकाल कर मंदिर की दहलीज पर रख दें और लाल धागा घर ले आएं। रात्रि में 10 बजे के बाद उक्त धागे में सात बार बारी बारी से मंत्र बोलकर सात गांठ लगाएं। फिर इस माला को हाथ अथवा गले में धारण करें, संकटों से रक्षा होगी।
  • एक नींबू, पांच साबुत सुपारियां, एक हल्दी की गांठ, काजल की डिबिया, 16 साबुत काली मिर्च, पांच लौंग तथा रुमाल के आकार का लाल कपड़ा घर या मंदिर में एकांत में बैठ जाएं। उक्त मंत्र का 108 बार जप करके उक्त सामग्री को लाल कपड़े में बांध लें। इस पोटली को घर या दुकान के मुख्य द्वार पर लगा दें, संकटों से मुक्ति मिलेगी। इस प्रयोग से कर्मचारियों की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है और स्थायित्व भी आ जाता है।
  • यात्रा की सफलता के लिए:

    मंत्र: रामलखन कौशिक सहित, सुमिरहु करहु पयान। लच्छि लाभ लौ जगत यश, मंगल सगुन प्रमान।।

    यात्रा के पहले ग्रहण काल, हनुमान जयंती, रामनवी, होली, दीपावली या नवरात्रि के अवसर पर उक्त मंत्र का हनुमान जी के मंदिर में एक हजार आठ बार जप करके उसे सिद्ध कर लें। फिर जब भी यात्रा पर जाएं, यह मंत्र सात बार बोलकर घर से निकलें। सफलता प्राप्त होगी।

    अन्य मंत्र:

    प्रविसि नगर कीजे सब काजा।
    हृदय राखि कौसल पुर राजा।।

    उक्त विधान से यह मंत्र भी सिद्ध कर लें। जिस स्थान की यात्रा करनी हो, वहां पहुंचते ही उक्त मंत्र सात बार बोलें, उस स्थान से लाभ प्राप्त होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

    परीक्षा में सफलता तथा विद्या की प्राप्ति के लिए:

    बुद्धिहीन तनु जानुकै सुमिरो पवन कुमार ।
    बल बुद्धि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश बिकार।।

    हनुमान चालीसा का यह दोहा न सिर्फ विद्यार्थियों के लिए बल्कि हर व्यक्ति के लिए हर क्षेत्र में लाभदायक है। इसके नियमित जप से बुद्धि, बल, विद्या आदि की प्राप्ति तथा क्रोध, क्लेश, रोग-विकार आदि से बचाव होता है। किसी भी पर्व के अवसर पर श्रद्धापूर्वक हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और फिर नित्य नियमित रूप से एक पाठ करते रहें, हनुमान जी की दिव्य कृपा प्राप्त होगी।

    हनुमान जी के मंदिर में या चित्र के सामने बैठकर एकाग्रचित्त होकर हनुमान चालीसा का पाठ श्रद्धापूर्वक करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती ही है।

    शत्रु शमन के लिए उग्र प्रयोग

    शत्रु शमन के लिए हनुमान जी की उग्र साधना की जाती है। इससे अकारण या ईष्र्यावश शत्रुता रखने वाले व्यक्ति की दुष्ट भावना का शमन होता है। चूंकि यह प्रयोग उग्र है इसीलिए इसे नितांत आवश्यक होने पर ही इसका उपयोग करना चाहिए। अन्यथा हानि हो सकती है। चुनाव में प्रतिद्वंद्वी को परास्त करने अथवा व्यवसाय में दूसरों से आगे निकलने के ध्येय से या फिर स्थिति सामान्य होने पर यह प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    मंत्र:

    उलटंत पलटंत काया। जागुवीर हनुमन्त आसा चकर पर चकर फिरे, सुरबोना चलय, डाकिनी चलय, शाकिनी चलय, जोगिनी चलय। बज्र को डण्डा लैकाल मारौ। महावीर हनुमान साहब मेरा शत्रु मार काडो। शत्रु दुष्टमति फैरी डालो। गुरु की शक्ति। फुरो मंत्र हनमानौवाच।

    पहले पर्वकाल में उक्त मंत्र का दस हजार बार जप करें। फिर गुग्गुल व गाय के घी से उक्त मंत्र की एक हजार आहुतियां दें, वांछित फल मिलेगा।

    प्रयोग विधि: एक नींबू में बबूल के सात कांटे मंत्र से लगाने हैं। प्रत्येक कांटे पर इक्कीस बार उक्त मंत्र का जप करके ही नींबू में कांटे गाड़ें। यह क्रिया करते समय ‘मेरा शत्रु अमुक (अमुक के स्थान पर शत्रु का नाम लें) मार काडो’ की प्रार्थना करें। फिर यह नींबू शत्रु के घर में डाल दें, शत्रु की मति आपके पक्ष में हो जाएगी। यह प्रयोग कुतूहलवश या जांच के लिए नहीं करें।



शनि कष्टनिवारक हनुमान विशेषांक   सितम्बर 2009

शनि कष्टनिवारक श्री हनुमान विशेषांक आधारित है- शनि ग्रह एंव हनुमान जी के आपसी संबंधों, हनुमान जी के जन्म एवं जीवन से संबंधित कथाएं, हनुमान जी के तीर्थ स्थान, यात्रा एवं महत्व, हनुमान जी से संबंधित पूजाएं, पूजा विधि एवं महत्व.

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.