Congratulations!

You just unlocked 13 pages Janam Kundali absolutely FREE

I agree to recieve Free report, Exclusive offers, and discounts on email.

न्याय के स्वामी शनि

न्याय के स्वामी शनि  

न्याय के स्वामी शनि पं. महेश चन्द्र भट्ट शनि को न्याय का स्वामी माना गया है। सूर्यपुत्र शनि के प्रकोप के भय से मनुष्य तो क्या, देवता भी कांपते हैं। इसकी दृष्टि पड़ने से ही पार्वती के पुत्र गणेश का सिर धड़ से अलग हो गया। इसकी वक्र दृष्टि पड़ने से ही लंका जलकर राख हो गई। शनि ग्रह के फल अन्य सभी ग्रहों की अपेक्षा अधिक समय तक प्रभावी रहते हैं। इनका कारण है शनि का मंद गति से विचरण करना। धीमी चाल चलने के कारण ही इसका नाम शनैश्चर पड़ा है। वृषभ, तुला, मिथुन, मकर, और कुंभ राशियों में यह ग्रह शुभ और सिंह तथा वृश्चिक राशियों में अशुभ माना जाता है। शनि की दृष्टि महा विनाशकारी होती है। किंतु यदि शनि अनुकूल हो तो संसार में ऐसा कुछ भी नहीं जो प्राप्त न किया जा सके। शनि जिस भाव को देखता है उसके फल को नष्ट कर देता है। यही कारण है कि लोगों के मन में उसकी वक्र दृष्टि को लेकर भय रहता है। शनि स्थान की वृद्धि करता है। इसीलिए शनि का बैठना उतना अशुभ नहीं होता जितनी उसकी दृष्टि। ज्योतिष में मकान, धन-संपŸिा, मृत्यु, आयु, मुकदमा, हानि, संतोष, चोरी, वात रोग आदि का विचार शनि की स्थिति के आधार पर किया जाता है। शनि यदि शुभ राशि या भाव में स्थित हो तो जातक का कल्याण और यदि अशुभ राशि या भाव में स्थित हो तो हानि करता है। शनि के शुभ प्रभाव से युक्त जातक को मशीनरी, कारखाने, फैक्ट्री, चमड़े, सीमेंट, लकड़ी, लोहे, तेल, ट्रांसपोर्ट आदि के कामों में अच्छी सफलता मिलती है। इसके विपरीत शनि के अशुभ प्रभाव से पीड़ित जातक को पैर की बीमारियां, धन-संपŸिा की चोरी यहां तक कि जेल जाने की संभावना रहती है। उसे एक ही समय में कई मुसीबतें घेर लेती हंै। सीता माता की खोज के क्रम में जब हनुमान जी लंका गए और लंका को जला डाला तो शनिदेव को एक जगह ज्वालाआंे से घिरे रुदन करते हुए पाया। उनके करुण शब्द जब हनुमान जी के कानों में पड़े, तब उन्होंने उनसे पूछा- ‘‘तुम कौन हो?’’ शनिदेव ने उŸार दिया- ‘‘भगवन्! मैं शनि हूं और अकाल मृत्यु का ग्रास बन रहा हूं। कृपया मेरी रक्षा करें।’’ हनुमान जी ने शनिदेव के बंधन तोड़ दिए और उन्हें रावण की कैद से मुक्त कर दिया। शनिदेव ने कहा- ‘‘हे महावीर! मैं आपका सदा ही ऋणी रहूंगा।’’ विनीत भाव से उन्होंने श्री हनुमान जी के पैर पकड़ लिए और प्रेमाश्रु गिराने लगे। फिर उन्होंने हनुमान जी को वचन दिया कि वह उनके भक्तों को कभी पीड़ा नहीं पहुंचाएंगे, बल्कि संकट से उनकी रक्षा करेंगे। अतः जो लोग हनुमान जी की भक्ति श्रद्धापूर्वक करते हैं, अच्छे कर्म करते हैं, शनिदेव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं।


शनि कष्टनिवारक हनुमान विशेषांक   सितम्बर 2009

शनि कष्टनिवारक श्री हनुमान विशेषांक आधारित है- शनि ग्रह एंव हनुमान जी के आपसी संबंधों, हनुमान जी के जन्म एवं जीवन से संबंधित कथाएं, हनुमान जी के तीर्थ स्थान, यात्रा एवं महत्व, हनुमान जी से संबंधित पूजाएं, पूजा विधि एवं महत्व.

सब्सक्राइब

.