brihat_report No Thanks Get this offer
fututrepoint
futurepoint_offer Get Offer
राहू कि महादशा में नवग्रहों कि अंतर्दशाओं का फल एवं उपाय

राहू कि महादशा में नवग्रहों कि अंतर्दशाओं का फल एवं उपाय  आगस्त 2008

राहु मूलतः छाया ग्रह है, फिर भी उसे एक पूर्ण ग्रह के समान ही माना जाता है। यह आद्र्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। राहु की दृष्टि कुंडली के पंचम, सप्तम और नवम भाव पर पड़ती है। जिन भावों पर राहु की दृष्टि का प्रभाव पड़ता है, वे राहु की महादशा में अवश्य प्रभावित होते हैं। राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है। राहु में राहु की अंतर्दशा का काल 2 वर्ष 8 माह और 12 दिन का होता है। इस अवधि में राहु से प्रभावित जातक को अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। विष और जल के कारण पीड़ा हो सकती है। विषाक्त भोजन, से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त अपच, सर्पदंश, परस्त्री या पर पुरुष गमन की आशंका भी इस अवधि में बनी रहती है। अशुभ राहु की इस अवधि में जातक के किसी प्रिय से वियोग, समाज में अपयश, निंदा आदि की संभावना भी रहती है। किसी दुष्ट व्यक्ति के कारण उस परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

उपाय:

  • भगवान शिव के रौद्र अवतार भगवान भैरव के मंदिर में रविवार को शराब चढ़ाएं और तेल का दीपक जलाएं।
  • शराब का सेवन कतई न करें।
  • लावारिस शव के दाह-संस्कार के लिए शमशान में लकड़िया दान करें।
  • अप्रिय वचनों का प्रयोग न करें।

राहु में बृहस्पति:

राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा की यह अवधि दो वर्ष चार माह और 24 दिन की होती है।

राक्षस प्रवृत्ति के ग्रह राहु और देवताओं के गुरु बृहस्पति का यह संयोग सुखदायी होता है। जातक के मन में श्रेष्ठ विचारों का संचार होता है और उसका शरीर स्वस्थ रहता है। धार्मिक कार्यों में उसका मन लगता है। यदि कुंडली में गुरु अशुभ प्रभाव में हो, राहु के साथ या उसकी दृष्टि में हो तो उक्त फल का अभाव रहता है। ऐसी स्थिति में निम्नांकित उपाय करने चाहिए।

  • किसी अपंग छात्र की पढ़ाई या इलाज में सहायता करें।
  • शैक्षणिक संस्था के शौचालयों की सफाई की व्यवस्था कराएं।
  • शिव मंदिर में नित्य झाड़ू लगाएं।
  • पीले रंग के फूलों से शिव पूजन करें।

राहु में शनि:

राहु में शनि की अंतदर्शा का काल 2 वर्ष 10 माह और 6 दिन का होता है। इस अवधि में परिवार में कलह की स्थिति बनती है। तलाक भाई, बहन और संतान से अनबन, नौकरी में या अधीनस्थ नौकर से संकट की संभावना रहती है। शरीर में अचानक चोट या दुर्घटना के दुर्योग, कुसंगति आदि की संभावना भी रहती है। साथ ही वात और पित्त जनित रोग भी हो सकता है।

दो अशुभ ग्रहों की दशा-अंतर्दशा कष्ट कारक हो सकती है। इससे बचने के लिए निम्न उपाय अवश्य करने चाहिए।

भगवान शिव की शमी के पत्रों से पूजा और शिव सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।

  • महामृत्युंजय मंत्र के जप स्वयं, अथवा किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण से कराएं। जप के पश्चात् दशांश हवन कराएं जिसमें जायफल की आहुतियां अवश्य दें।
  • नवचंडी का पूर्ण अनुष्ठान करते हुए पाठ एवं हवन कराएं।
  • काले तिल से शिव का पूजन करें।

राहु में बुध:

राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा की अवधि 2 वर्ष 3 माह और 6 दिन की होती है। इस समय धन और पुत्र की प्राप्ति के योग बनते हैं। राहु और बुध की मित्रता के कारण मित्रों का सहयोग प्राप्त होता है। साथ ही कार्य कौशल और चतुराई में वृद्धि होती है। व्यापार का विस्तार होता है और मान, सम्मान यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

उपाय:

  • भगवान गणेश को शतनाम सहित दूर्वाकुंर चढ़ाते रहें।
  • हाथी को हरे पत्ते, नारियल गोले या गुड़ खिलाएं।
  • कोढ़ी, रोगी और अपंग को खाना खिलाएं।
  • पक्षी को हरी मूंग खिलाएं।

राहु में केतु:

राहु की महादशा में केतु की यह अवधि शुभ फल नहीं देती है। एक वर्ष और 18 दिन की इस अवधि के दौरान जातक को सिर में रोग, ज्वर, शत्रुओं से परेशानी, शस्त्रों से घात, अग्नि से हानि, शारीरिक पीड़ा आदि का सामना करना पड़ता है। रिश्तेदारों और मित्रों से परेशानियां व परिवार में क्लेश भी हो सकता है।

उपाय:

  • भैरवजी के मंदिर में ध्वजा चढ़ाएं। कुत्तों को रोटी, ब्रेड या बिस्कुट खिलाएं।
  • कौओं को खीर-पूरी खिलाएं।
  • घर या मंदिर में गुग्गुल का धूप करें।

राहु में शुक्र:

राहु की महादशा में शुक्र की प्रत्यंतर दशा पूरे तीन वर्ष चलती है। इस अवधि में शुभ स्थिति में दाम्पत्य जीवन में सुख मिलता है। वाहन और भूमि की प्राप्ति तथा भोग-विलास के योग बनते हैं। यदि शुक्र और राहु शुभ नहीं हों तो शीत संबंधित रोग, बदनामी और विरोध का सामना करना पड़ सकता है। इस अवधि में अनुकूलता और शुभत्व की प्राप्ति के लिए निम्न उपाय करें-

  • सांड को गुड़ या घास खिलाएं।
  • शिव मंदिर में स्थित नंदी की पूजा करें और वस्त्र आदि दें।
  • एकाक्षी श्रीफल की स्थापना कर पूजा करें।
  • स्फटिक की माला धारण करें।

राहु में सूर्य:

राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा की अवधि 10 माह और 24 दिन की होती है, जो अन्य ग्रहों की तुलना में सर्वाधिक कम है। इस अवधि में शत्रुओं से संकट, शस्त्र से घात, अग्नि और विष से हानि, आंखों में रोग, राज्य या शासन से भय, परिवार में कलह आदि हो सकते हैं। सामान्यतः यह समय अशुभ प्रभाव देने वाला ही होता है।


Also Read: Vastu Tips & Tricks for Bedroom that works wonders!


उपाय:

  • इस अवधि में सूर्य को अघ्र्य दें। उनका पूजन एवं उनके मंत्र का नित्य जप करें।
  • हरिवंश पुराण का पाठ या श्रवण करते रहें।
  • चाक्षुषोपनिषद् का पाठ करें।
  • सूअर को मसूर की दाल खिलाएं।

राहु में चंद्र:

एक वर्ष 6 माह की इस अवधि में जातक को असीम मानसिक कष्ट होता है। इस अवधि में जीवन साथी से अनबन, तलाक या मृत्यु भी हो सकती है। लोगों से मतांतर, आकस्मिक संकट एवं जल जनित पीड़ा की संभावना भी रहती है। इसके अतिरिक्त पशु या कृषि की हानि, धन का नाश, संतान को कष्ट और मृत्युतुल्य पीड़ा भी हो सकती है।

उपाय:

  • राहु और चंद्र की दशा में उत्पन्न होने वाली विषम परिस्थितियों से बचने के लिए माता की सेवा करें।
  • माता की उम्र वाली महिलाओं का सम्मान और सेवा करें।
  • प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का शुद्ध दूध से अभिषेक करें।
  • चांदी की प्रतिमा या कोई अन्य वस्तु मौसी, बुआ या बड़ी बहन को भेंट करें।

राहु में मंगल:

राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा का यह समय एक वर्ष 18 दिन का होता है। इस काल में शासन व अग्नि से भय, चोरी, अस्त्र शस्त्र से चोट, शारीरिक पीड़ा, गंभीर रोग, नेत्रों को पीड़ा आदि हो सकते हंै। इस अवधि में पद एवं स्थान परिवर्तन तथा भाई को या भाई से पीड़ा की संभावना भी रहती है।


Astrology Consultation

राहु-केतु विशेषांक  आगस्त 2008

राहू केतु का ज्योतिषीय, पौराणिक एवं खगोलीय आधार, राहू-केतु से बनने वाले ज्योतिषीय योग एवं प्रभाव, राहू केतु का द्वादश भावों में शुभाशुभ फल, राहू केतु की दशा-अंतर्दशा का फलकथन सिद्धांत, राहू केतु के दुष्प्रभावों से बचने हेतु उपाय

सब्सक्राइब

.