सपनों का सच मीतू सहगल हर इंसान स्वप्न देखता है। कुछ हमें याद रहते हैं और कुछ भूल जाते हैं। यदि आप अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं, किसी कार्य को कुद्गालता से कर सकते हैं तो आप स्वप्न देखते हैं। सपने हमारे मानसिक संतुलन को बनाये रखने में सहायता करते हैं। यदि हम स्वप्न न देखें तो हमारा मस्तिष्क इतने विचारों से भर जाएगा की हम सोचने समझने की शक्ति खो देंगे। स्वप्नों को समझने के लिए हमें अपने चित्त को समझना होगा। मद्गाहूर मनोचिकित्सक, कार्ल गुस्ताव जंग, ने चित्त को तीन भागों में बांटा है सचेत वैयक्तिक अचेत मन और सामूहिक अचेत मन। सोचने, समझने, महसूस करने का कार्य सचेत मन से करते हैं। किन्तु हमारे कई अव्यक्त विचार व भावनाएं, जीवन के अनुभव, भय आदि अचेत मन में रहते हैं जो जाने अनजाने हमारे व्यक्तित्व को निर्धारित करते हैं। मनोचिकित्सक फ्रायड का ऐसा मानना है कि हमारे स्वप्न अचेत मन के विचारों को व्यक्त करते हैं। लेकिन स्वप्न इसके अतिरिक्त और भी कई उद्देद्गयों के लिए उपयोग किये जा सकते हैं। हमें हमारे जीवन के कई प्रद्गनों का उत्तर इनमें मिल सकता है। स्वप्न संकेतों की भाषा बोलते हैं जिसे समझने के लिए हमें उन संकेतों को समझना पड़ता है। इन्हें समझने का सबसे अच्छा तरीका है स्वप्न को लिखना। आप जिस प्रद्गन का उत्तर चाहते हैं या जीवन की किसी स्थिति को समझना चाहते हैं तो रात को सोने से पहले अपने प्रद्गन को मन में या बोलकर स्पष्ट कीजिये। आपने जो स्वप्न देखा उसे उठते ही सबसे पहले संक्षेप में लिखिए। फिर बारीकियां जो आपको याद हों वह लिखिए। यदि आपको स्वप्न याद न रहते हों, तो सोने से पहले यह भी बोलिए कि आपको स्वप्न याद रहें। हमारा मस्तिष्क बहुत ही विचित्र यंत्र है। हम जैसा सोचते हैं वह वैसे ही काम करने लगता है। यही आधार है रेकी जैसी कई चिकित्सा पद्धतियों का। स्वप्न लिखने से हमें उसकी बहुत सी बारीकियों का पता चलेगा जो शायद केवल मनन करने से न पता चले। जरूरी नहीं कि हमें एक ही बार में पूर्ण उत्तर मिल जाये। ऐसा भी होता है कि कई स्वप्न एक ही जवाब के अलग-अलग हिस्से हों। स्वप्नों की सांकेतिक भाषा को समझने के लिए हमें निष्पक्षता से उन संकेतों और अपने विचारों को समझना होगा। आजकल स्वप्न विद्गलेषण विद्गोषज्ञ हमारी सहायता भी कर सकते हैं। क्योंकि वे एक निष्पक्ष विद्गलेषण कर सकते हैं व कई संकेतों को समझने की क्षमता रखते हैं। आजकल इन्टरनेट पर स्वप्न समझने के कई स्रोत हैं। किन्तु सामान्यतः यह संकेत बहुत ही व्यक्तिगत होते हैं और हर स्थिति में अलग अर्थ भी हो सकता है। जैसे नौजवान के लिए गाड़ी आजादी का सूचक हो सकती है, लेकिन यदि किसी की गाड़ी से कोई दुर्घटना हो चुकी हो, उसके लिए गाड़ी एक भयानक याद भी हो सकती है। इसलिए हमारे स्वप्नों को समझने के लिए हमसे बेहतर कोई नहीं। कुछ स्वप्न बहुत सरल होते हैं जो आसानी से समझ आ जाते हैं। किन्तु कुछ जटिल भी होते हैं। हमने जो स्वप्न लिखे हैं, उन्हें कुछ दिन बाद पढने पर हमें एक पैटर्न नजर आएगा। उस पैटर्न का विद्गलेषण एक बहुत ही सटीक व पूर्ण उत्तर दे सकता है। उदाहरण के लिये, एक व्यक्ति कुछ समय से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था। एक दिन उसने स्वप्न देखा कि एक चिड़िया उसके घर में फंस गई है और बाहर निकलने के लिए पंख फड़फड़ा रही है। लेकिन जैसे ही वह चिड़िया घर से बाहर निकली, नीचे गिर गयी। उस व्यक्ति ने देखा कि वह चिड़िया इतनी कमजोर थी कि वह उड़ नहीं पा रही थी। इस स्वप्न का मतलब था कि वह व्यक्ति अपनी बीमारी से बहुत परेद्गाान हो गया था व बाहर जाना चाहता था। लेकिन वह बहुत कमजोर भी हो गया था। उसे पूर्णतया से ठीक होने के लिए अभी और कुछ दिन चिकित्सा की आवद्गयकता थी । इस प्रकार स्वप्न हमारे मन के प्रद्गनों के उत्तर दे कर हमें कई बार कई कार्यों के प्रति सचेत भी कर सकते हैं। इसलिए अपने स्वप्नों को समझना आना चाहिए और यह एक बहुत ही रोचक कार्य भी है। कौन नहीं चाहता कि उसके पास एक खुद का मार्गदर्द्गान करने का स्रोत हो। सपने देखना और समझना अपने आप को समझने जैसा है। हम जितना अपने आप को समझेंगे, हमारा जीवन उतना ही सरल और सकारात्मक होगा।


स्वप्न एवं शकुन विशेषांक  जून 2010

इस विशेषांक से स्वप्न के वैज्ञानिक आधार, स्वप्न की प्रक्रिया, सपनों का सच, स्वप्नेश्वरी देवी साधना, स्वप्नों के अर्थ के अतिरिक्त शकुन-अपशकुन आदि विषयों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस विशेषांक में श्री अरुण बंसल का 'सपनों का सच' नामक संपादकीय अत्यंत लोकप्रिय हुआ। आज ही ले आएं लोकप्रिय स्वप्न एवं शकुन विशेषांक तथा इसके फलित विचार नामक स्तंभ में पढ़े स्वतंत्र व्यवसाय के ग्रह योगों की विवेचना।

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