स्वप्नों का अर्थ

स्वप्नों का अर्थ  

स्वप्नों का अर्थ महेश चंद्र भट्ट भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहता है। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है। जाव्यक्ति सक्रिय है, वह स्वप्न अवश्य देखता है। सभी प्राणियों में मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जो स्वप्न देख सकता है। अर्थात् जो मनुष्य स्वप्न नहीं देखता, वह जीवित नहीं रह सकता। इसका अभिप्राय यह है कि जो जीवित और सक्रिय है, वह स्वप्न अवश्य देखता है। केवल जन्म से अंधे व्यक्ति स्वप्न नहीं देख सकते लेकिन वे भी स्वप्न में ध्वनियां तो सुनते ही हैं। अर्थात स्वप्न तो उनको भी आते हैं। स्वप्न सोते हुए ही नहीं, जागते हुए भी देखे जा सकते हैं। इस प्रकार स्वप्न को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। ऋ जागृत अवस्था के स्वप्न ऋ निद्रावस्था के स्वप्न जागृत अवस्था के स्वप्न कवियों, दार्शनिकों, प्रेमी-प्रेमिकाओं, अविवाहित किशोर, युवक-युवतियों को अधिक आते हैं। ये स्वप्न कलात्मक होते हैं। भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार भूत, वर्तमान और भविष्य का सूक्ष्म आकार हर समय वायुमंडल में विद्यमान रहता है। जब व्यक्ति निद्रावस्था में होता है तो सूक्ष्माकार होकर अपने भूत और भविष्य से संपर्क स्थापित करता है। यही संपर्क स्वप्न का कारण और स्वप्न का माध्यम बनता है। जिस व्यक्ति विशेष की साधना इतनी प्रबल होती है कि वह जागृतावस्था में या ध्यानावस्था में इन भूत-भविष्य के सूक्ष्म आकारों से संपर्क कर लेता है, वही योगी और भविष्यदृष्टा कहलाता है। अवचेतन मन की पहुंच हमारे शरीर तक ही सीमित नहीं, वरन् वह विश्व के किसी भी भाग में जब चाहे पहुंच सकता है। उसके द्वारा तीनों लोकों के कोने-कोने का समाचार प्राप्त हो सकता है। अतः भूत, भविष्य और वर्तमान तीनों कालों का ज्ञान अवचेतन मन से ही संभव है। नीचे कुछ मुखय-मुखय स्वप्नों के भावों फलों का संक्षिप्त वर्णन किया जा रहा है। स्वप्न फलों के संबंध में निम्न बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है। रात्रि में तीन बजे से सूर्योदय के पूर्व के स्वप्न सात दिन में, मध्य रात्रि के स्वप्न 1 माह में, मध्य रात्रि से पहले के स्वप्न 1 वर्ष में अपना फल प्रदान करते हैं। दिन के स्वप्न महत्वहीन होते हैं। एक रात में एक से अधिक स्वप्न आएं तो अंतिम स्वप्न ही फलदायक होगा। शुभ्ुभ्ुभ स्वप्न फल विचार ऋ स्वप्न में जिस पुरुष को अपने सिर पर घर जलता दिखाई दे, उसे राज्य पद मिलता है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में कानों में कुंडल, माथे पर मुकुट और गले में मोतियों का हार धारण करता है वह निश्चित ही राज्यपद को प्राप्त करता है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में अपने शत्रुओं को पराजित होते हुए देखता है वह पुरुष पदोन्नति प्राप्त करता है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में गाय, बैल, पक्षी, हाथी पर चढ़कर अपने आपको समुद्र को पार करता हुआ देखता है वह राजा है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में कमल के पत्ते पर बैठकर खीर खाता है वह राज्यपद को प्राप्त करता है। ऋ यदि कोई स्त्री स्वप्न में अपनी योनि के क्षेत्र को विकसित देखती है तो उसे किसी पुरुष के धन की प्राप्ति होती है। ऋ जिस पुरुष के स्वप्न में सारे बाल झड़ जाते हैं या वह अपने आपको केश विहीन देखता है तो उसे अतुल्य धन की प्राप्ति होती है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में कुम्हार को घड़ा बनाते देखता है उसके शोक का नाश होता है और उसे बहुत धन की प्राप्ति होती है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में अपने आपको ऊंची दीवार पर बैठा देखे तो उसको सुख-संपत्ति प्राप्त होती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में अपने को अपनी आयु से बड़ा देखे तो उसको मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। अशुभ स्वप्न फल विचार : ऋ यदि कोई स्त्री अपने आपको स्वप्न में गंजा देखे तो उसे गरीबी का सामना करना पड़ेगा। ऋ यदि पुरुष स्वप्न में देखे कि उसके साथ दुर्घटना घट गयी है तो उसे शीघ्र ही बीमारी जकड़ लेती है। ऋ यदि कोई स्वप्न में यात्रा के लिए वाहन द्वारा जाने की तैयारी में है तो उसे यात्रा छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि यात्रा में उसकी मृत्यु हो सकती है। ऋ यदि कोई स्वप्न में अपने आपको शीशा तोड़ते हुए देखता है तो उसके परिवार में शीघ्र ही किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में चीटियों को मारे तो व्यापार का नाश होता है। ऋ जो पुरुष अपनी नाव को तूफान में फंसते देखता है तो आने वाला समय दुर्भाग्य की सूचना देता है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में कड़वी दवा लेता है तो वह अनेक प्रकार की कठिनाईयों में पड़ जाता है। ऋ स्वप्न में रोता बच्चा देखना बीमारी और निराशा की सूचना देता है। प्रणय संबंधी स्वप्न फल विचार : ऋ यदि कोई युवती स्वप्न में किसी रत्न जड़ी अंगूठी अथवा नैकलेस को देखती है तो उसका दांपत्य जीवन सुखी व्यतीत होता है। ऋ यदि युवती स्वप्न में किसी मित्र के दिये हुए कंगन पहनती है तो उसका शीघ्र ही विवाह हो जाता है। ऋ यदि पुरुष स्वप्न में कोई सुंदर वस्त्र देखता है तो उसे मधुर स्वभाव वाली विदुषी पत्नी की प्राप्ति होती है। ऋ यदि पुरुष स्वप्न में औरत को घूंघट निकालते देखता है तो उसका दांपत्य जीवन सुखमय व्यतीत होता है। ऋ जब कोई पुरुष स्वप्न में अपनी खोई हुई वस्तु प्राप्त करता है तो उसे आगामी जीवन में सुख मिलता है। ऋ यदि कोई युवती स्वप्न में अपने आपको मेले अथवा नुमाइश में घूमती देखे तो उसे योग्य पति की प्राप्ति होती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में इंद्र धनुष देखता है तो उसका वास्तविक जीवन सुखमय व्यतीत होता है। ऋ यदि अविवाहित युवती अपने प्रेमी को किसी अन्य युवती से विवाह करता देखे तो विवाह शीघ्र हो जाता है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में किसी सुंदर व स्वस्थ्य नवजात शिशु को देखता है तो उसको संतान प्राप्त होती है। ऋ यदि किसी स्त्री को कोई पुरुष स्वप्न में अंगूठी भेंट में दे तो उसका पति उसे अत्यंत प्रेम करेगा। मिश्रित स्वप्न फल विचार : ऋ जो पुरुष स्वप्न में जीवित गिद्ध को देखता है उसके सौभाग्य में वृद्धि होती है। यदि गिद्ध आकाश में ऊंचाई पर उड़ता दिखाई दे तो अत्यधिक सौभाग्यशाली होता है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में साफ-सुथरी श्मशान भूमि को देखे तो उसके व्यापार में वृद्धि होती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में अपने आपको पुस्तक पढ़ते देखता है तो उसका समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। ऋ स्वप्न में मशीन द्वारा घास काटना सौभाग्य वृद्धि का प्रतीक है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में किसी युवती को कर्णफूल पहने देखे तो उसे कोई शुभ समाचार मिलता है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में खटमलों को अथवा मच्छरों को मारता है तो उसके कार्य सफल हो जाते हैं। ऋ जो पुरुष स्वप्न में अनाज का ढेर देखता है उसे अपने परिश्रम से सफलता प्राप्त होती है। ऋ जो पुरुष स्वप्न में कॉफी अथवा चाय पीता है, उसे जीवन में हर्षोल्लास और समृद्धि मिलती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में अपने पैरों-हाथों में दर्द का अनुभव करे तो उसे धन की प्राप्ति होती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में अपने पैरों-हाथों में दर्द का अनुभव करे तो उसे धन की प्राप्ति होती है। ऋ यदि कोई पुरुष स्वप्न में कारीगर बनकर मकान बनाता है तो उसको जीवन में अपार सफलता मिलती है। pg-34 स्वप्नफल एवं अचूक उपाय रंजू नारंग मानव मन का स्वप्नों के साथ गहरा संबंध है निद्रा की अवस्था में भी मस्तिष्क सक्रिय रहता है। अवचेतन मन की इच्छाएँ, दिन प्रतिदिन के तनाव एवं चिन्ताएं स्वप्न के रूप में दिखाई देती हैं। मनोवैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि कभी-कभी स्वप्न भविष्य में होने वाली घटनाओं का भी संकेत देते हैं। स्वप्नों से भविष्य संकेत की पुष्टि कई प्राचीन ग्रंथों द्वारा होती है। ननिहाल में भरत ने एक स्वप्न देखा था जिसका परिणाम सामने आया। त्रिजटा ने भी लंका के विध्वंस होने का स्वप्न देखा था। स्वप्नों के शुभ व अशुभ फलों की अवधारणाएं प्रस्तुत हैं इस आलेख में ......... शुभ्ुभ स्वप्न ऋ जो व्यक्ति स्वप्नावस्था में घोड़ा, हाथी, सफेद बैल, जूते, रथ में स्वयं को सवार देखता है-उसे ग्राम, नगर, राज्य अथवा देश से अवश्य ही सम्मान की प्राप्ति होती है। ऋ किसी बड़े जलाशय, सरोवर, नदी अथवा सागर में स्वयं को तैरता देखने वाला मनुष्य सभी प्रकार के संकटों से मुक्त हो जाता है। ऋ स्वप्न में उल्लू देखने से भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति होती है। ऋ जो व्यक्ति स्वप्नावस्था में तिल, चावल गेहूं, सरसों, जौ, अन्न का ढेर, पुष्प, छाता, ध्वज, दही, पान, कमल, कलश, शंख और सोने के गहने देखता है उसे सभी प्रकार का सुख मिलता है। ऋ स्वप्न में देवी लक्ष्मी की मूर्ति देखने से धन की प्राप्ति होती है। ऋ गोरैया, नीलकंठ, कबूतर, सारस, तोता व तीतर दिखाई देने से गृहस्थ जीवन खुशहाल होता है। ऋ स्वप्न में स्वयं को किसी महल के ऊँचे बुर्ज पर खड़े देखना भावी जीवन में उन्नति का संकेत है। ऋ यदि कोई रोगी स्वप्न में दवाई की बोतल टूटी हुई देखता है तो वह शीघ्र ही रोग मुक्त हो जाता है। ऋ स्वप्न में फल देखना बहुत शुभ होता है। ऋ यदि आप स्वयं को किसी ऊंचाई पर चढ़ता देखें तो यह भविष्य में उन्नति का संकेत है। ऋ यदि आप स्वप्न में नए वस्त्र पहने दिखते हैं तो आपको कोई मांगलिक कार्य का संदेश मिलने वाला है। ऋ यदि आप किसी वृद्ध व्यक्ति अथवा साधु को देखते हैं तो आपको बड़ा लाभ अथवा सम्मान मिलने वाला है। अशुभ्ुभ स्वप्न ऋ यदि स्वप्न में किसी बच्चे का जन्म होता दिखाई दे तो सावधान होना चाहिए क्योंकि यह आगामी दुर्घटना का संकेत है। ऋ यदि स्वप्न में किसी रोते बच्चे को देखें तो कोई संकट आने वाला है। ऋ स्वप्न में जिस व्यक्ति को दक्षिण दिशा में खड़े पितर बुलाते हैं उसको अपना अंतिम समय आया हुआ जान लेना चाहिए। ऋ स्वप्न में कोई खंडहर, सुनसान जगह देखना, भटक जाना और निकलने का कोई मार्ग न मिलना हानि कारक होता है। ऋ स्वप्न में यदि कोई किसी के पांवों को कटा हुआ देखेगा तो उसके जीवन में अनेक प्रकार की आर्थिक और व्यवसायिक बाधाएं आने वाली हैं। ऋ स्वप्न में यदि कोई पानी में डूबता जा रहा है तो यह आने वाले संकटों का सूचक है। ऋ यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में स्वयं को डोरी से बंधा हुआ देखता है तो उसे शीघ्र ही किसी अपराध में बंदी बनाया जा सकता है। ऋ स्वप्न में यदि ऐसा प्रतीत हो कि कोई व्यक्ति स्वप्न देखने वाले की पत्नी का अपहरण करके ले जा रहा है तो शीघ्र ही उसके धन की हानि होती है। ऋ स्वप्न में किसी बारात में शामिल होना अशुभ है। ऋ स्वप्न में किसी की हत्या होते देखने का अर्थ है कि कोई आपक खिलाफ बगावत कर रहा है। ऋ स्वप्न में यदि कोई सोना चांदी आदि धातुओं की चोरी करता है तो यह अशुभ है। इस का प्रभाव व्यवसाय पर पड़ सकता है। अनिष्ट फल नाशक उपाय ऋ यदि मन यह स्वीकार करे कि देखे गए स्वप्न का परिणाम अनिष्टकारी हो सकता है तो उसके निवारण का उपाय अवश्य किया जाना चाहिए। चित्रकूट वास के समय श्री राम ने भी एक स्वप्न देखा था जिसके अनिष्ट फल के निवारण हेतु उन्होंने भगवान शंकर की पूजा की थी। उचित उपाय करने से बुरे स्वप्न से होने वाला दुष्प्रभाव अत्यन्त क्षीण अथवा समाप्त हो जाता है। ऋ यदि स्वप्न अधिक भयानक और रात्रि 12 से 2 बजे देखा जए तो तुरंत श्री शिव का नाम स्मरण करें। 'ऊँ नमः शिवाय' का जप करते हुए सो जाएं। तत्पश्चात् ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि करके शिवमंदिर में जाकर जल चढ़ाएं पूजा करें व पुजारी को कुछ दान करें। इससे संकट नष्ट हो जाता है। ऋ यदि स्वप्न 4 बजे के बाद देखा गया है और स्वप्न बुरा है, तो प्रातः उठकर बिना किसी से कुछ बोले तुलसी के पौधे से पूरा स्वप्न कह डालें। कोई दुष्परिणाम नहीं होगा। स्नान के बाद 'ऊँ नमः शिवाय' का 108 बार जप करें। ऋ हनुमान जी सब प्रकार का अनिष्ट दूर करने वाले हैं। बुरे स्वप्न का अनिष्ट दूर करने के लिए सुंदरकांड, बजरंग बाण, संकटमोचन स्तोत्र अथवा हनुमान चालीसा का पाठ भी सांयकाल के समय किया जा सकता है। ऋ यदि स्वप्न बहुत बुरा है और आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो सुबह उठकर सफेद कागज पर स्वप्न को लिखें फिर उसे जला दें। राख नाली में पानी डाल कर बहा दें। फिर स्नान करके एक माला शिव के मंत्र 'ऊँ नमः शिवाय' का जप करें। दुष्प्रभाव नष्ट हो जाएगा।


स्वप्न एवं शकुन विशेषांक  जून 2010

इस विशेषांक से स्वप्न के वैज्ञानिक आधार, स्वप्न की प्रक्रिया, सपनों का सच, स्वप्नेश्वरी देवी साधना, स्वप्नों के अर्थ के अतिरिक्त शकुन-अपशकुन आदि विषयों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस विशेषांक में श्री अरुण बंसल का 'सपनों का सच' नामक संपादकीय अत्यंत लोकप्रिय हुआ। आज ही ले आएं लोकप्रिय स्वप्न एवं शकुन विशेषांक तथा इसके फलित विचार नामक स्तंभ में पढ़े स्वतंत्र व्यवसाय के ग्रह योगों की विवेचना।

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