दैनिक क्रियाओं से संबंधित शुभ-अशुभ शकुन

दैनिक क्रियाओं से संबंधित शुभ-अशुभ शकुन  

दैनिक क्रियाओं से संबंधित शुभ-अशुभ शकुन नवीन राहुजा प्रातःकालीन समय के शकुन : _प्रातः काल जागते ही शंख, घंटा आदि का स्वर सुनाई दे तो अत्यंत शुभ होता है। _यदि गन्ने पर प्रथम दृष्टि पड़े तो वह शुभ शकुन समझा जाता है। _यदि जागने पर प्रथम दृष्टि दही या दूध से भरे पात्र पर पड़े तो भी शुभ समझा जाता है। _श्रीफल, शंख, मोर, हंस, चंवर, पुष्प, पुष्पमाला आदि पर प्रथम दृष्टि पड़ना अच्छा माना जाता है। _यदि जागते ही गाय आदि दिखाई दे तो शुभ शकुन है। कपिला गाय हो तो अधिक शुभ, किंतु काली गाय हो तो अधिक शुभ नहीं समझी जाती वरन् कुछ लोगों के मत में काली गाय विपरीत फल प्रदर्शित करती है। दांतुन के समय के शकुन दॉतुन करते हुए पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ होगा। अन्य दिशाओं में मुख करके बैठना शुभ नहीं समझा जाता। _पश्चिम दिशा में मुंह करके दांतुन करने से धन का नाश संभव है। दक्षिण दिशा में दॉतुन करने से संतान के लिए हानिकारक होगा। _नीम, बबूल, आम, आदि की दांतुन उत्तम और शुभ तथा रोग नाशक होती है। _टेढ़ी, फटी, बहुत मोटी, बहुत पतली दांतुन भी अशुभ होती है। उससे धन-हानि की संभावना बढ़ जाती है। ऋ द्वार की देहली पर बैठकर दांतुन कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि फलस्वरूप गृह-कलह और धन की हानि का कुयोग उपस्थित हो सकता है। _यदि पांवों के बल बैठकर दॉतुन करें तो भयंकर रोगों की उत्पत्ति हो सकती है। _यदि दांतुन करते समय सामने आकर गधा रेंके तो यह लक्षण कुटुम्बियों में कलह होने का है। _यदि दांतुन करते समय कोई बिल्ली सामने आकर मल-त्याग करे तो राज-भय की सूचक है। _दांतुन करते समय पुस्तक या पत्र आदि पढ़ने पर निषेध है, क्योंकि इससे धन हानि होती है। _दांतुन करते समय कोई गाय आ जाए तो ध्यान रखना चाहिए कि उस पर छींटे न पड़ें, क्योंकि इससे भी धन हानि का कुयोग बनता है। _दांतुन करते समय कौआ आकर कांव-कांव करने लगे तो अशुभ होता है। _यदि दांतुन करते समय कुत्तों का कोई जोड़ा आकर मैथुन करने लगे तो उस दिन व्यापार में घाटे की संभावना होती है। _यदि दांतुन करते समय सहसा छिपकली सिर पर आ गिरे तो बहुत धन-लाभ का सूचक है। _यदि दांतुन के समय सहसा कोई पुष्प आकर गिरे तो बहुत शुभ होता है। _यदि दांतुन करते समय ईख के रस के छींटे जातक के शरीर पर आ पड़े तो यह शकुन किसी के साथ लड़ाई झगड़े का है। _यदि दांतुन करते समय कबूतर की बीठ आ पड़े तो यह बहुत बुरा शकुन होता है। _यदि दांतुन चीर कर फेंकते समय चित्त पड़े तो शुभ और अन्य स्थितियों में अशुभ होती है। _यदि दांतुन करते समय कोई कुत्ता आकर पांवों को सूंघने लगे तो हितकर बताया जाता है। स्नान के समय के शकुुन _ यदि स्नान करते समय घोड़े की हर्ष सूचक हिनहिनाहट सुनाई दे तो शुभ होती है। _यदि स्नान करते समय मिचली आने लगे तो शुभ शकुन समझा जाता है। _यदि स्नान के समय स्वयं को छींक आ जाए तो शुभ नहीं है। जातक को व्यापार में नुकसान होता है। _यदि स्नान करते समय मल-मूत्र एक साथ ही आएं तो यह शकुन जातक के लिए शुभ नहीं होता। उसके फलस्वरूप एक मास में मृत्यु योग बनता है। _स्नान करते समय यदि पानी के पात्र को ठोकर लग जाय और उस पात्र का पानी यदि फैल जाय तो अपशकुन माना जाता है। _यदि स्नान के समय पानी का पात्र अपने हाथ से गिरने पर पानी फैले तो भी शुभ नहीं माना जाता। _ यदि स्नान के समय पानी के पात्र में कौआ मुख देखकर पानी पीने लगे तो यह भी अच्छा शकुन नहीं है। _यदि स्नान के समय सिंह के गर्जन का शब्द सुनाई दे, तो शुभ होता है। _पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्नान करना शुभ एवं अन्य दिशाओं में स्नान करना अशुभ होता है। _काले वस्त्र पहन कर स्नान करना अपशकुन कहलाता है। उसके फलस्वरूप पिशाचादि का उपद्रव हो सकता है। _यदि स्नान करते समय खून का वमन हो जाय तो यह लक्षण तीन मास में मृत्यु का सूचक है। _यदि स्नान करने पर अपने हृदय का भाग पहले सूख जाय तो अनिष्ट फलकारी है। इससे छः मास में मृत्यु की आशंका व्यक्त होना समझा जाता है। _स्नान करने वाला यदि पहले अपनी पीठ पर पानी डाले तो यह शुभ नहीं होता। इसलिए पहले सिर पर पानी डालना चाहिए। _बिल्कुल वस्त्र रहित होकर स्नान कभी न करें, इसके फलस्वरूप धन, संतान के पक्ष में अहित होना संभव है। भोजेजेजन के समय के शकुनुनुन _भोजन करते समय भी ऐसे अनेक शकुन होते हैं, जिनसे शुभ या अशुभ फल की उत्पत्ति होती है। यहां इनका वर्णन करना भी आवश्यक होगा। ऋ यदि भोजन करते समय कोई कौआ सिर पर आकर बैठ जाय तो अशुभ होता है। _यदि वह कौआ दायें कन्धे पर आकर बैठे तो उदर विकारों को उत्पन्न करेगा और बायें कंधे पर बैठे तो वर्ण को नष्ट करने वाला होगा। _यदि भोजन करते समय सामने ही बिल्ली मल-मूत्र त्याग करे तो भी शुभ नहीं है। _यदि भोजन करते समय सियार का शब्द सुनाई दे, तो बहुत अशुभ समझा जाता है। _यदि भोजन करते समय कुत्ते का रोना सुनाई दे, तो वह अशुभ संवाद का सूचक है। _यदि भोजन करते समय भोजन में रुचि न हो तो अजीर्ण का लक्षण समझना चाहिए। _यदि भोजन के समय गृह-कलह उपस्थित हो जाय तो यह शकुन घर में अन्न संकट की संभावना व्यक्त करता है तथा अशुभ होता है। _यदि भोजन के समय रुदन का शब्द सुनाई दे तो वह जातक के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा। _यदि भोजन करते समय असमय ही वर्षा आ जाय तो शुभ है। उसे सूखा न पड़ने का लक्षण माना जा सकता है। _यदि भोजन के समय उबकाई आने लगे तो यह लक्षण मंदाग्नि और अजीर्ण से संबंधित है। इससे जितना खा लिया, उससे अधिक नहीं खाना चाहिए। _यदि भोजन करते समय घर में सांप निकल आए तो शुभ नहीं समझना चाहिए। विद्वानों के मत में भोजन के समय सर्प का दिखाई देना भोजन के विष-मिश्रित होने की शंका व्यक्त करता है। _यदि भोजन करते समय कुत्ता भौंकने लगे तो यह शकुन अनाज की चोरी होने से संबंधित है। _यदि भोजन करते समय काली चिड़िया शरीर पर बैठ जाय तो वह सामान्य फल प्रदर्शित करती है। _यदि उस समय पकती हुई रोटी अधिक जल जाय तो अन्न के नष्ट होने की सूचक होगी। रात्रि में शय्या के समय के शकुनुनुन _रात्रि में शयन के उद्देश्य से शय्या पर जाते समय यदि शंख-ध्वनि सुनाई दे तो शुभ होगी। _यदि बैल की हुंकार सुनाई दे, तो भी शुभ एवं हितकर समझना चाहिए। _यदि सिंह की गर्जना और घोड़े की प्रसन्नता से हिनहिनाना सुनाई दे तो शुभ होगा। _यदि चारपाई (पलंग) पर जाते समय वीणा का शब्द सुनाई दे तो वह भी मंगलकारी होगा। _यदि उस समय चारपाई पर चूहा बैठा हो, तो इसे भी शुभ समझना चाहिए। _यदि पलंग पर जाते समय सहसा स्वयं को रोमांच हो आए तो भी अच्छा शकुन है। _यदि चारपाई (पलंग) पर सोने के लिए जाते समय घर में प्रसन्नता का वातावरण हो तो लाभकारी होता है। _यदि उस समय पत्नी की आंखों में आंसू हो तो यह अपशकुन माना जाता है। _यदि पलंग पर जाते समय गीदड़ बोले या कुत्ता भौंके तो यह लक्षण चोरी होने का है। _यदि उस समय बिल्ली या कुत्ता रोता हो, तो अच्छा शकुन नहीं माना जाता। _यदि उस समय पलंग पर छिपकली हो और वह पावों की तरफ भाग जाए तो शुभ होता है। _यदि उस समय घर की पालतू गाय सहसा रो उठे तो यह अच्छा लक्षण नहीं होता। _यदि सोने के लिए जाते समय कोई पान या सुपारी लाकर दे तो शुभ है। _यदि सोने के लिए जाते समय कोई सामने से छींक दे तो यह कोई अच्छा शकुन नहीं होगा। _यदि पलंग पर जाते समय पुरुष का सूर्य स्वर चल रहा हो तो शुभ होता है। _यदि पलंग पर जाते समय स्त्री का चंद्र स्वर चले तो शुभ समझना चाहिए।


स्वप्न एवं शकुन विशेषांक  जून 2010

इस विशेषांक से स्वप्न के वैज्ञानिक आधार, स्वप्न की प्रक्रिया, सपनों का सच, स्वप्नेश्वरी देवी साधना, स्वप्नों के अर्थ के अतिरिक्त शकुन-अपशकुन आदि विषयों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इस विशेषांक में श्री अरुण बंसल का 'सपनों का सच' नामक संपादकीय अत्यंत लोकप्रिय हुआ। आज ही ले आएं लोकप्रिय स्वप्न एवं शकुन विशेषांक तथा इसके फलित विचार नामक स्तंभ में पढ़े स्वतंत्र व्यवसाय के ग्रह योगों की विवेचना।

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