शुभ हैं या अशुभ हाथ में छः उंगलियां

शुभ हैं या अशुभ हाथ में छः उंगलियां  

शुभ या अशुभ हैं हाथ में छः अंगुलियां एक रहस्य नवीन राहूजा कहते हैं जिसके हाथ में छः अंगुलियां होती हैं, वह व्यक्ति बहुत भाग्यशाली होता है, परंतु कुछ लोग इसे एक अशुभ लक्षण भी मानते हैं। लेकिन वास्तव में छः अंगुलियां होने पर व्यक्ति को अपने जीवन में किस प्रकार के फल प्राप्त होते हैं, आईये, इस लेख के द्वारा देखते हैं- सामान्य तौर पर प्रत्येक मनुष्य के हाथ में पांच अंगुलियां होती हैं। किंतु कई बार आनुवांशिक अव्यवस्था के कारण परिवार में अतिरिक्त (छठी) अंगुली वाली संताने भी पैदा हो जाती हैं। हाथ में स्थित छठी अंगुली की अपनी कोई स्वतंत्र कार्य प्रणाली नहीं होती, ना ही इस अतिरिक्त अगं ुली का अपना कार्इे पर्वत होता है। हाथ में यह छठी अंगुली जिस अंगुली के साथ जुड़ी हुई होती है, उसी अंगुली की क्रियाशीलता पर अतिरिक्त अंगुली की क्रिया निर्भर करती है अर्थात् इस अतिरिक्त अंगुली का अपना कार्इे स्वतत्रं अस्तित्व नहीं हातो। यह तो मृत अंगुली के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहती है। इसीलिए मध्यकालीन युग में आरै आज भी कुछ लोग इस अतिरिक्त अंगुली को शल्य चिकित्सा द्वारा कटवा दिया करते हैं। कुछ शाधेकर्ताओं का मत है कि प्रत्यके 1,00,000 बच्चों में लगभग 50 बच्चे ऐसे पैदा होते हैं जिनके हाथ में यह अतिरिक्त अंगुली पाई जाती है। हाथ में इस अतिरिक्त छठी अंगुली की स्थिति दो प्रकार से पाई जाती है। पहली स्थिति में छठी अगुंली कनिष्ठिका अंगुली की जुड़वा अंगुली के रूप में दिखाई देती है। दूसरी स्थिति में यह छठी अंगुली, अंगूठे के साथ जुड़ी हुई दिखाई देती है। पा्रचीन मत के अनसुार छठी अंगुली को सौभाग्य के सूचक के रूप में माना जाता रहा है। जबकि मध्यकालीन युग में इस छठी अगुंली का संबधं जादू टाने में माहिर व्यक्ति से माना जाता था और छठी अंगुली के धारक व्यक्ति को जादू-टोने, इंद्रजाल और मायावी विद्याओं में पारंगत समझा जाता था। आधुनिक मतानुसार छः अंगुलियों के धारक व्यक्ति को विश्वास के योग्य नहीं पाया जाता है। यदि यह छठी अंगुली कनिष्ठिका से जुड़ी हो तो ऐसे व्यक्ति बिल्कुल भी विश्वास के योग्य नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में बात-बात पर केवल झूठ ही बोलते हैं, इसलिए ऐसे लोग विश्वास के योग्य बिल्कुल भी नहीं होते हैं। जनश्रुति के अनुसार 'ऐनी बोलेन' जो कि 'हैनरी' (अष्टम) की पत्नी एवं एलिजाबेथ (प्रथम) की मां थी, इनके दोनों हाथों में छः-छः अंगुलियां थीं। अपनी इसी प्रसिद्धि के कारण ये अपने इन हाथों को हमेशा लंबी आस्तीन के वस्त्रों से ढककर रखती थी। लेवीन ऐनी बोलेन के प्रतिपक्षी उन पर हमेशा वास्तव में एक डायन होने के आरोप लगाते थे। प्राचीन मतानुसार छः अंगुलियों को सौभाग्य का परिचायक मानते थ,े कितुं एसे ा ऐनी बोलने के साथ असत्य साबित हुआ। 1536 में ऐनी बोलेन का सिर हैनरी (अष्टम) के आदेशानुसार कलम करवा दिया गया। आधुनिक मतानुसार छः अंगुलियों के धारक व्यक्ति को विश्वास के योग्य नहीं पाया जाता है। यदि यह छठी अगं ुली कनिष्ठिका से जुडी़ हो ता े ऐसे व्यक्ति बिल्कुल भी विश्वास के योग्य नहीं होते हैं। ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में बात-बात पर केवल झूठ ही बोलते हं,ै इसलिए एसे लागे विश्वास के याग्ेय बिल्कुल भी नहीं होते हैं। यह छठी अंगुली कनिष्ठिका से जुड़ी होने पर व्यक्ति के अंदर चालाकी, बेईमानी, कूटनीति आदि में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि कर देती है। ऐसे व्यक्ति कब किस स्थिति में धोखा दे जाएं, इस बात की पहचान करना भी असंभव प्रतीत होता है। ऐसे व्यक्ति चालाकी और बइे र्म ानी में बहतु निपण्ुा हाते ह,ैं इसलिए ये लागे विश्वास याग्े य नहीं माने जाते है इसी तरह, यदि यह छठी अगंलुी अंगष्ुठ के साथ जुड़ी हो तो ऐसे व्यक्ति में विवेक की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक होती है। लेकिन कभी-कभी इसी विवेक का दुरुपयोग भी इस छठी अंगुली के कारण ही होता है। अपने हाथ में छठी अंगुली के रूप में अंगुष्ठ के कारण रातां-े रात प्रसिद्ध हुए सिने अभिनेता ऋतिक रोशन को इस बात के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है कि किस तरह अपने विवेक से ऋतिक रोशन ने सिने जगत में बहु-प्रसिद्ध अभिनेता के रूप में अपना स्थान बनाया है। आजकल उनकी जो भी फिल्में आ रही हैं, उनमें वे अपने हाथ की इस छठी अंगुली को छिपाने का प्रयास नहीं करते हैं वरन् उसे सामान्य रूप से दिखाते हैं। उनकी पहली फिल्म (कहो ना प्यार है) में आप उनकी इस छठी अगं ुली को साफ रूप से देख सकते हैं। कुल मिलाकर इस छठी अंगुली का होना अच्छा नहीं माना जाता है। इसे प्रायः लोग बुरा ही मानते हैं, क्योंकि एक कहावत बहुत ही प्रसिद्ध है ''अति सर्वत्र वर्जयेत्'' अर्थात् अति हर चीज की बुरी होती है।


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