भगवद् प्राप्ति के सरल उपाय

भगवद् प्राप्ति के सरल उपाय  

भगवद् प्राप्ति के सरल उपाय नवीन राहुजा यद्यपि भगवद् प्राप्ति का मार्ग सुगम और सरल है परंतु वह उतना ही कठिन भी है क्योंकि भगवद् प्राप्ति के लिए जिस सरल हृदयता की आवश्यकता होती है उस निश्छल स्थिति को प्राप्त करना उतना ही दुरूह और कठिन है। प्रत्येक व्यक्ति का सरल अहंकार भाव इस मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। अहंकार का पर्दा उठते ही भगवद् दर्शन होने लगते हैं। इस लेख में भगवद् प्राप्ति के सरल उपायों का वर्णन दिया गया है जो अनुसरणीय है। भगवद् प्राप्ति का मार्ग सुगम है, सरल है, परंतु उसके लिए चाहिए एक दृढ़ प्रतिज्ञा, दृढ़ निश्चय अपने लक्ष्य तक पहुंचने की। प्रत्येक मनुष्य जब यह जान गया कि इस धरती पर जन्म लेने का मुखय उद्देश्य भगवद् प्राप्ति ही है तो क्यों नहीं आज से ही हम भगवद् प्राप्ति के सरल उपायों को अपने जीवन में अपनाएं ताकि शीघ्रातिशीघ्र हम भगवद् प्राप्ति के मार्ग की तरफ अग्रसर होकर अपने मानव जीवन को सफल बना सके। भगवद् प्राप्ति के सरल उपायों का नित्य जीवन में पालन करने से प्रत्येक मानव के लिए अल्प समय में ही भगवद् प्राप्ति संभव है। अन्य उद्देश्य इस उद्देश्य के सामने गौण हैं। जब यह बात मन में निश्चित रूप से बैठ जाएगी तो ज्यों-ज्यों हम इस लक्ष्य की ओर अग्रसर होंगे वैसे-वैसे हम पाएंगे कि हमें एक अजीब तरह की मस्ती आएगी, एक अजीब उत्साह, एक अजीब ताजगी और एक अजीब दिव्य रोशनी की प्राप्ति होगी जिसकी कल्पना नहीं केवल अनुभूति ही की जा सकती है। भगवद् प्राप्ति के लिए शीघ्रातिशीघ्र अपनी नीच प्रवृत्ति को छोड़ें, अपने क्रोधी स्वभाव को, अपने घमंडी चरित्र को छोड़ें। ये बातें भगवद् प्राप्ति के मार्ग में बाधक हैं। इन प्रवृत्तियों वाला व्यक्ति अगर भगवद् प्राप्ति की तरफ उन्मुख होता भी है तो ये दुष्प्रवृत्तियां उसे पीछे की तरफ ढकेल देती हैं और इस प्रकार भगवद् प्राप्ति के मार्ग में विघ्न पड़ जाता है और साधक/मनुष्य को पता भी नहीं चलता कि इस तरह की प्रवृत्तियों से ही उसका पतन हो रहा है। अतः इन गलत प्रवृत्तियों को शीघ्रातिशीघ्र त्याग कर सच्ची राह से, लालच-लोभ से परे, दैनिक जीवन का निर्वाह करें, तब संभवतः भगवद् प्राप्ति सरल एवं सुगम होगी। प्रतिदिन गीता के कुछ अंश अवश्य पढ़ें अथवा दूसरे लोगों से भगवद् गीता ज्ञान की चर्चा भी कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके मन को असीम शांति मिलेगी एवं आप में आध्यात्मिक प्रवृत्ति पनपने लगेगी। तब आप देखेंगे कि भगवद् प्राप्ति का मार्ग और भी सुगम और सुंदर बनता जा रहा है। सभी समय व सभी वर्ग के लोगों से हमेशा वाणी में मधुरता और प्यार से ओत-प्रोत व्यवहार रखें, क्योंकि यह भगवान को प्रिय हैं। ज्यों-ज्यों आपकी वाणी मधुर होती चली जाएगी, त्यों-त्यों आप सुगमता से भगवद् प्राप्ति की तरफ बढ़ते जाएंगे क्योंकि वाणी में मधुरता एवं प्राणी मात्र के प्रति प्यार की वृत्ति अपनाने से चित्त परिष्कृत एवं शरीर स्फूर्तिदायक रहता है, जिससे भगवद् प्राप्ति के कार्य में सुगमता आती है। दुःखी जनों को भगवान का स्वरूप मानें और जितना हो सके, उनकी सेवा करें। इस बात का अवश्य ध्यान रहे कि इस कार्य में दिखावा अथवा किसी प्रकार का कोई प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। तन, मन, धन से ऐसे दीन दुःखियों की सेवा करने से भगवद् प्राप्ति सुगम होती है और अपार मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। ईर्ष्या, जलन, साधारण मनुष्य में होना स्वाभाविक है, परंतु जो सज्जन भगवद् प्राप्ति की तरफ अग्रसर होना चाहते हैं, उन्हें तो इन प्रवृत्तियों का त्याग करना पड़ेगा। ऐसी प्रवृत्तियां भगवद्-प्राप्ति के मार्ग में कैंसर जैसी बीमारी की तरह कार्य करती हैं। अतः इन गलत प्रवृित्तयों का शीघ्रातिशीघ्र त्याग करें। गुस्से का त्याग करना भगवद् प्राप्ति के लिए बहुत जरूरी है। अगर आपका गुस्सा आपके साथ है तो भगवद् प्राप्ति के रास्तें में बाधा उत्पन्न करेगा। अतः अंदर के गुस्से रूपी राक्षस को निकाल बाहर करें, तब हमारा हृदय भगवद् प्राप्ति की तरफ अग्रसर होगा। वर्ष में कम से कम एक बार किसी भी पवित्र तीर्थ स्थान की यात्रा/दर्शन करें। तब आप स्वयं अनुभव करेंगे कि भगवद् प्राप्ति का मार्ग सुगम हो रहा है तथा भगवान के प्रति आपकी रुचि बढ़ रही है। सिगरेट, शराब, भांग, गांजा इत्यादि नशीले पदार्थों का शीघ्रातिशीघ्र त्याग करें। केवल शाकाहारी भोजन ही करें, मांसाहारी भोजन का त्याग करें क्योंकि यह भगवद् प्राप्ति के मार्ग में एक सबसे बड़ा पत्थर है। अपने जीवन में कभी भी पराई स्त्री/पुरुष से संपर्क नहीं बनाएं। अपने सभी कार्यों को भगवान को समर्पित करके ही संपन्न करें। तब आपका मन भगवद् प्राप्ति की तरफ ज्यादा अग्रसर होगा। अतः दैनिक दिनचर्या को, सभी तरह के कार्यों को, भगवान का ही प्रसाद मानकर चलें। हर अवस्था में सम भाव जैसी वृत्ति बना पाएंगे तो निश्चय ही भगवद् प्राप्ति के लिए आपकी वृत्ति ठीक दिशा में अग्रसर होगी। इन छोटी-छोटी एवं सरल बातों का मनन करते हुए अगर कोई व्यक्ति भगवद् प्राप्ति की तरफ अग्रसर होगा तो निश्चित रूप से उसे भगवद्- प्राप्ति के मार्ग में कोई बाधा नहीं आएगी।

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भगवत प्राप्ति  फ़रवरी 2011

भगवत प्राप्ति के अनेक साधन हैं। यह मार्ग कठिन होते हुए भी जिस एक मात्र साधन अनन्यता के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, आइए ,जानें सहज शब्दों में निरुपित साधना का यह स्वरूप।

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