उपायों में मंत्र व उपासना का महत्व

उपायों में मंत्र व उपासना का महत्व  

उपायों में मंत्र व उपासना का महत्व पं. महेश चंद्र भट्ट यदि अशुभ ग्रहों के प्रभावस्वरूप बार-बार प्रयत्न करने पर भी जीवन में विघ्नों एवं विफलताओं का सामना करना पड़े और भाग्य साथ न देता हो तो अशुभ ग्रहों की अनुकूलता हेतु ज्योतिष आचार्यों द्वारा प्रतिपादित अनिष्ट ग्रहों के उपायों को अपनाकर जीवन को स्वस्थ, खुशहाल एवं सुखी बनाया जा सकता है। अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिये ज्योतिष शास्त्र में अनेक प्रकार के उपाय बताये गये हैं, जैसे मंत्र जप, हवन, दान, औषधि स्नान, तीर्थ स्नान, व्रत , रत्न एवं यंत्र धारण करना इत्यादि। पूर्व जन्मों में कृत शुभाशुभ कर्मों के अनुसार एवम् ग्रहों के द्वारा अनुप्रेरित होकर मनुष्य ऐहिक जीवन में सुख-दुख, लाभ-हानि, इष्ट अनिष्टादि फल प्राप्त करता है। जन्मपत्री एवं वर्ष कुंडली में क्रूर ग्रह मनुष्य के जीवन में प्रतिकूल एवं कठिन समस्यायें उत्पन्न करते हैं जबकि शुभ एवं योगकारक ग्रह अनुकूल व सौभाग्यवर्द्धक परिस्थितियां बनाने में सहायक होते हैं। सूर्य शांति के लिए उपाय : यदि जातक की जन्म अथवा वर्ष कुंडली में सूर्य अशुभ हो तो निम्नलिखित मंत्र का (अपने सामर्थ्यनुसार) कम से कम 7000 की संखया में जप करना चाहिये। जप का आरंभ शुक्ल पक्षीय रविवार प्रातः सूर्योदय से करना चाहिये। पाठ करते समय ताम्र बर्तन में शुद्ध जल, ताण्डुल, लाल चंदन, लाल पुष्प, गंगाजल व थोड़ा गुड़ डालकर पात्र को लाल वस्त्र और आम के पत्तों एवं नारियल द्वारा ढक लेना चाहिये। साथ ही दान योग्य सभी वस्तुओं को संकल्प करके पहले से पास में रख लेना चाहिए। बीज मंत्र : ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः। दान हेतु वस्तुएं : गेहूं, लाल चंदन, गुड़, लाल पुष्प, लाल वस्त्र, घी, लाल वर्ण की गाय, सुवर्ण, माणिक्य, ताम्र पात्र, नारियल, लाल फल, मिष्ठान, दक्षिणा आदि। अन्य उपाय : 1. तांबे की अंगूठी में माणिक्य अथवा विधिवत् तैयार किया हुआ सूर्य-यंत्र (ताम्र पत्र पर) धारण करें। 2. खाना खाते समय सोने अथवा तांबे के चम्मच का प्रयोग करना तथा 11 रविवार तक सूर्य स्नान करना। 3. सूर्य स्तोत्र का 108 रविवार तक पाठ करना शुभ है। 4. 40 या 43 दिन तक चलते (बहते) पानी में गुड़ या तांबे के सिक्के बहाना शुभ होगा। 5. सर्वप्रथम प्रातःकाल उठकर स्नान उपरांत ताम्र कलश में जल, दूध, पुष्प, गंध, लाल चंदन आदि लेकर पूर्वाभिमुख होकर गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य प्रदान करना चाहिये। चंद्रमा शांति के लिये उपाय : जब जन्म या वर्ष कुंडली में चंद्र ग्रह अशुभ हो तो निम्नलिखित मंत्र को 11 हजार की संखया में जप करना और तदुपरांत दशमांश संखया में हवन करना कल्याणकारी होता है। जप का आरंभ पूर्णिमा या शुक्ल पक्ष के सोमवार से करना चाहिए। तंत्रोक्त चंद्र मंत्र : ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः। दान योग्य वस्तुएं : चावल, सफेद चंदन, शंख, कपूर, घी, दही, चीनी, मिश्री, मोती, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, श्वेत फल, चांदी, मिठाई और दक्षिणा। अन्य उपाय : 1. चांदी के बर्तनों का प्रयोग करना एवं चारपाई के (सोने योग्य दीवान इत्यादि भी) पायों में चांदी के कील ठुकवाना। 2. सफेद मोतियों की माला अथवा चांदी की अंगूठी में मोती धारण करना। 3. शीशे के गिलास में दूध, पानी आदि पीने से परहेज रखना तथा चांदी के बर्तनों में दूध, पानी पीना शुभ होगा। 4. पानी में कच्चा दूध मिलाकर चंद्रमा का बीज मंत्र पढ़ते हुए पीपल पर डालना। 5. लगातार 16 सोमवार व्रत रखकर सायंकाल सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिये तथा पांच छोटी कन्याओं को क्षीर सहित भोजन कराना चाहिये। 6. सोमवार को ही प्रातः काल स्नानादि करके ताम्र वर्तन में कच्ची लस्सी (जल तथा थोड़ा सा दूध) भगवान की मूर्ति या शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिये। 7. चांदी का कड़ा, चेन या सिक्का धारण करना चाहिये। मंगल शांति के लिए उपाय : जन्म या वर्ष कुंडली में मंगल अशुभ एवं बाधाकारक हो, तो निम्न मंत्र का जप कम-से-कम 10 हजार संखया में शुक्ल पक्ष के मंगलवार से प्रारंभ करें। तंत्रोक्त मंगल मंत्र : ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः। दान योग्य वस्तुएं : गेहूं, मसूर, लाल बैल, घी, गुड़, सुवर्ण, मूंगा, ताम्र बर्तन, कनेर पुष्प, लाल चंदन, लाल वस्त्र, केसर, लाल फल, नारियल, मीठी चपाती, गुड़ से निर्मित रेवड़ियां, दक्षिणा आदि। मंगल का दान युवा ब्राह्मण को करना शुभ होता है। अन्य उपाय : 1. तांबे की अंगूठी में मूंगा धारण करना अथवा तांबे का कड़ा पहनना चाहिये। 2. मंगलवार को घर में गुलाब का पौधा लगाना तथा 108 दिन तक रात को तांबे के बर्तन में पानी सिरहाने रखें और सुबह इस पानी को घर में गुलाब के पौधे को डालें। 3. मंगलवार का व्रत रखकर 27 मंगल किसी अपाहिज (अपंग) को मीठा विशेषकर गुड़ से निर्मित भोजन खिलायें। 4. नारियल को तिलक करके तथा लाल कपड़े में लपेटकर लगातार 3 मंगलवार चलते पानी में बहायें। 5. लाल रंग की गाय या लाल वर्ण के कुत्ते को भोजन खिलाना शुभ होगा। 6. मंगलवार का व्रत रखना चाहिये विशेषकर उन कन्याओं को जिनकी कुंडली में मंगल मंगलीक योग बनाकर विवाह मे बाधा उत्पन्न कर रहा हो तो मंगलागौरी का व्रत लगातार 7 मंगलवार करना चाहिए। बुध शांति के लिए उपाय : जन्म या वर्ष कुंडली में बुध ग्रह अशुभ हो तो भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए शुक्ल पक्ष के बुधवार से आरंभ करके 9000 की संखया में बीज मंत्र का जप करना चाहिए। तंत्रोक्त बुध मंत्र : ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः। दान योग्य वस्तुएं : मूंगी, 5 हरे फल, चीनी, हरे पुष्प, हरी इलायची, कांस्य-पत्र, पन्ना, सोना, हाथी का दांत, षड्रसों से युक्त भोजन, हरी सब्जी व हरा कपड़ा दक्षिणा सहित दान करें। अन्य उपाय : 1. हरे रंग का पन्ना बुधवार को सोने की अंगूठी में धारण करना चाहिये। हरे रंग के वस्त्र पहनना तथा हरे रंग के पर्दे लगाना शुभ होगा। हरे रंग की गाड़ी, स्कूटर या साईकिल आदि का प्रयोग करें परंतु यदि बुध अशुभ हो तो हरे वस्त्र कदापि न पहनें। 2. बुधवार को चांदी या कांस्य के गोल टुकड़े को हरे वस्त्र में लपेट कर चलते पानी में बहाना शुभ होगा। पानी में बहाते समय कम से कम 7 बार बुध के बीज मंत्र को अवश्य पढ़ें। 4. हरे रंग के वस्त्र (परिधान) किसी हिजड़े को बुधवार के दिन देना शुभ होगा। 5. बुधवार के दिन 6 इलायची हरे रूमाल में लपेटकर अपने पास रखें तथा इसके पश्चात एक इलायची व तुलसीपत्र का सेवन करना शुभ रहेगा। गुरु शांति के लिए उपाय : जब किसी व्यक्ति की जन्म या वर्ष कुंडली में गुरु शुभ फल दायी न हो तो उसे शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार को शुभ मुहूर्त में निम्नलिखित मंत्र का 19, 000 की संखया में पाठ करना तथा तदुपरांत दशांश संखया में हवन करना कल्याणकारी होगा। तंत्रोक्त गुरु मंत्र : क्कऊँ xzka xzha xzkSa सः गुरुवे नमः दान की वस्तुएं : पीले चावल, पुखराज, चने की दाल, हल्दी, शहद, पीला कपड़ा, पीले पुष्प व पीले फल (जैसे आम, केले आदि), कांस्य पात्र, घोड़ा, लवण, शक्कर, घी, धर्मग्रंथ, सुवर्ण, पीली मिठाई, दक्षिणा आदि। अन्य उपाय : 1. सोने या चांदी की अंगूठी में तर्जनी अंगुली में तथा शुभ मुहूर्त में पुखराज धारण करें। 2. 27 गुरुवार केसर का तिलक लगाना तथा केसर की पुड़िया पीले रंग के कपड़े या कागज में अपने पास रखना शुभ होगा। 3. चलते पानी में बादाम एवं नारियल पीले कपड़े में लपेटकर बहाना शुभ होगा। 4. पीपल के वृक्ष को गुरुवार एवं शनिवार के दिन गुरु का बीज मंत्र एवं गुरु गायत्री मंत्र पढ़ते हुए जल दें। 5. वृद्ध ब्राह्मण को यथा शक्ति पीली वस्तुएं जैसे-चने की दाल, लड्डू, पीले वस्त्र, शहदादि का दान करना चाहिये। शुक्र शांति के लिए उपाय : जन्म या वर्ष कुंडली में शुक्र अशुभकारक हो तो शुभ मुहूर्त्त में निम्न मंत्र का 16,000 की संखया में जप तथा तदुपरांत दशांश संखया में हवन करना कल्याणकारी होगा। तंत्रोक्त शुक्र मंत्र : ऊँ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः। दान की वस्तुएं : चांदी, चावल, सुवर्ण, दूध, दही अथवा दुग्ध निर्मित वस्तुएं, मिश्री, श्वेत चंदन, श्वेत घोड़ा, श्वेत वस्त्र, श्वेत पुष्प, श्वेत फल एवं सुगंधित पदार्थ। अन्य उपाय : 1. चांदी की कटोरी में सफेद चंदन, मुश्कपूर, सफेद पत्थर का टुकड़ा रखकर सोने वाले कमरे में रखें। चंदन की अगरबत्ती जलाना शुभ होगा। 2. घर में तुलसी का पौधा लगाना, सफेद गाय रखना, सफेद पुष्प लगवाना शुभ होगा तथा क्रीम रंग के रेशमी कपड़े में चांदी के चौरस टुकड़े पर शुक्र यंत्र उत्कीर्ण कर अपने पास रखें। 3. शुक्रवार को श्री दुर्गा पूजन, 5 कन्या पूजन, उन्हें खीरादि श्वेत वस्तुएं देना तथा गौशाला में शुक्रवार से शुरू करके सात दिन तक गाय को हरा चारा, शक्कर एवं चरी डालें। 4. सफेद रंग के पत्थर पर चंदन का तिलक लगाकर चलते पानी में बहा देना या चांदी के टुकड़े पर शुक्र यंत्र रेशमी क्रीम रंग के वस्त्र में लपेट कर शुक्रवार को नीम के वृक्ष के नीचे दबायें। 5. शुक्रवार का विधिवत व्रत रखना चाहिये तथा पांच शुक्रवार पांच कन्याओं का पूजन कर उन्हें मिश्री सहित श्वेत वस्तुएं भेंट करें। शनि शांति के लिए उपाय : जन्म या वर्ष कुंडली में शनि अशुभ फल दायक हो तो किसी शुभ मुहूर्त में आरंभ करके निम्न मंत्र का श्रद्धापूर्वक भगवान शंकर का एवं शनि के रूप का ध्यान करते हुए 23 हजार संखया पूर्ण करने के पश्चात् दशांश संखया में हवन करने से शुभ प्रभाव पड़ता है। तंत्रोक्त शनि मंत्र : ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। दान योग्य वस्तुएं : नीलम, लोहा, तिल, उड़द (माश), सरसों का तेल, काला वस्त्र, काली गाय, कुल्थी, लौह निर्मित पात्र, जूता, भैंस, कस्तूरी, सुवर्ण, नारियल, काले अथवा नीले पुष्प, फल, दक्षिणा इत्यादि। अन्य उपाय : 1. सोने की अंगूठी में नीलम धारण करें। उसके अभाव में नाव के कील की अंगूठी अथवा काले घोड़े की नाल की अंगूठी बनवाकर मध्यमा ऊंगली में धारण करें। 2. घर में नीले रंग के पर्दे तथा नीले रंग की चादरों का प्रयोग करना और स्वयं भी बहुधा नीले रंग के वस्त्रों का प्रयोग करना शुभ होगा। 3. शनिवार का व्रत और दशरथकृत 'शनि स्तोत्र' का पाठ करें। 4. स्टील या लोहे की कटोरी में तेल में अपनी छाया देखकर इस तेल को पांच शनिवार तक आक के पौधे पर अथवा 'शनि मंदिर' में डालना शुभ होगा। 5वें शनिवार को तेल चढ़ाने के बाद तेल वाली कटोरी को वहीं दबा देना या वहीं चढ़ा देना शुभ होगा। तेल चढा़ते समय शनि का बीज मंत्र पढ़ें। राहु शांति के लिए उपाय : जन्म या वर्ष कुंडली में राहु अशुभ हो तो निम्नलिखित मंत्र का 18,000 की संखया में जप करके दशमांश का हवन करें। मंत्र : ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। दान योग्य वस्तुएं : सप्तधान्य, गोमेद, सीसा, काला घोड़ा, तिल, तेल, सोने या चांदी का सर्प, उड़द, खड़ग (तलवार) कवच, नीले वस्त्र, काले रंग के पुष्प, नारियल, दक्षिणा आदि। अन्य उपाय : 1. काले व नीले वस्त्र पहनने से परहेज करें तथा चांदी की चेन या लॉकेट पहनना शुभ होगा। 2. रोटी को खीर लगाकर कौओं को एवं काले रंग की गाय को खिलाएं। 3. काले तिल, कच्चा कोयला, नीले रंग के ऊनी कपड़े में बांधकर शनिवार अथवा राहु के नक्षत्रों में घर के आंगन में दबाना शुभ होगा अथवा नीले वस्त्र के रूमाल को राहु मंत्र पढ़ते हुए जल में प्रवाहित कर दें। केतु शांति के लिए उपाय : जन्म या वर्ष कुंडली में केतु अशुभ फलकारी हो तो किसी शुभ मुहूर्त्त में नीचे लिखे मंत्र को 17 हजार की संखया में जप करें तथा दशमांश का हवन करें। मंत्र : ऊँ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः। दान योग्य वस्तुएं : लहसुनिया, लोहा, बकरा, नारियल, तिल, सप्तधान्य धूम (धूएं जैसा) वर्ण का वस्त्र, कस्तूरी, लौह चाकू, कपिला गाय, दक्षिणा सहित।क्क अन्य उपाय : 1. केतु की शांति के लिये श्री गणेश चतुर्थी का व्रत रखें तथा श्री गणेश पूजन एवं लडडुओं का भोग लगाना शुभ होगा। 2. काले वस्त्र में बांधकर काले व सफेद तिल चलते पानी में बहाना चाहिये। 3. रंग-बिरंगी (चितकबरी) गाय की सेवा करें एवं रंग-बिरंगे कुत्ते को दूध व रोटी डालें।


ग्रह शांति एवं उपाय विशेषांक  सितम्बर 2010

ज्योतिष में विभिन्न उपायों का फल, लाल किताब के उपाय, व्यवहारिक उपाय, उपायों का उद्देश्य, औषधि स्नान व रत्नों का प्रयोग इत्यादि सभी विषयों की सांगोपांग जानकारी देने वाला यह विशेषांक प्रत्येक घर की आवश्यकता है। उपायों में मंत्र व उपासना के महत्व के अतिरिक्त यंत्र धारण/पूजन द्वारा ग्रह दोष निवारण की विधि भी स्पष्ट की गई है। ज्योतिष द्वारा भविष्यकथन में सहायता मिलती है परंतु इसका मूल उद्देश्य समस्याओं के सटीक समाधान जुटाना है। इस उद्देश्य की प्रतिपूर्ति करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह अंक विशेष उपयोगी है।

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