महामृत्युंजय मंत्र उपासना

महामृत्युंजय मंत्र उपासना  

महामृत्युंजय मंत्र की महिमा और उपासना का महत्व नागेंद्र भारद्वाज शिव अर्थात् वह चेतन शक्ति जो प्रत्येक प्राणी में आत्म ज्योति के रूप में विद्यमान है। भगवान शिव काल के स्वामी तथा मृत्युंजय हैं। इसीलिए लोग इनकी महाकाल मृत्यंुजय एवं शिव आदि अनेक नामों से पूजा-अर्चना करते हैं। शास्त्रों में भगवान शिव की पूजा का कलिकाल में विशेष महत्व बताया गया है। परिचय: मंत्रों में श्रेष्ठ महामृत्युंजय मंत्र से भगवान शिव की पूजा अत्यंत फलदायी सिद्ध होती है, क्यांेकि इसका संबंध भगवान शिव से है और यह अपने आप में सिद्ध है। यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है। महामृत्युंजय मंत्रों में त्र्यंबक मंत्र, महामृत्युंजय त्र्यंबक, मृत्युंजय मंत्र तथा महामृत्यंुजय मंत्र शीघ्रातिशीघ्र सिद्ध होने वाले तथा श्रेष्ठ फलप्रदाता हैं। नारायणोपनिषद् में मृत्युंजय शिव के शास्त्रोक्त स्वरूप का उल्लेख है जिसका अर्थ है- ‘एक ही अन्यात्मा महादेव की जिसमें आनंद, विज्ञान, मन, प्राण और वाक्’ रूप पांच कलाएं हैं। इनमें मृत्युंजय शिव आनंद कलामयरूप हैं। विज्ञान दक्षिणामूर्ति, मन कामेश्वर, प्राण पशुपति (नील लोहितरूप) वाक् भूतेशरूप है। उपर्युक्त उपनिषत् प्रदर्शित तत्व के आधार पर ही मृत्युंजय भगवान के आनंद की प्राप्ति के लिए चिरकाल से साधना पूजा स्मरण होते आए हैं।



महामृत्युजय उपासना विशेषांक  मई 2009

महामृत्युंजय उपासना विशेषांक में महामृत्युंजय मंत्र की महिमा जानी जा सकती है. महामृत्युंजय उपासना हेतु सामग्री एवं साधना विधि, सर्वरक्षाकारक महामृत्युंजय लाकेट, कवच एवं यंत्र का महत्व तथा महामृत्युंजय उपासना के लाभ बताए गए है.

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