संपूर्ण फलदायक त्रिशक्ति लाकेट

संपूर्ण फलदायक त्रिशक्ति लाकेट  

व्यूस : 7324 | मई 2009
संपूर्ण फलदायक त्रिशक्ति लाॅकेट ‘सर्वेगुणाः कांचनमाश्रयन्ते’- शास्त्र वचन के अनुसार जो व्यक्ति धन-संपदा से संपन्न होता है वह समाज की दृष्टि में सर्वगुण संपन्न माना जाता है। आज प्रत्येक व्यक्ति आर्थिक रूप से संपन्न होना चाहता है। ऐसी स्थिति में यह लाॅकेट धारण करना लक्ष्मी वृद्धि में विशेष लाभदायक है। धन संपदा आज के भौतिकवादी एवं महानगरीय जीवनशैली की प्रमुख शर्त बन गई है और जरूरत भी। धन-संपदा नहीं है तो कदम-कदम पर आपको विभिन्न कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। इसके अभाव में पारिवारिक जीवन छिन्न-भिन्न हो जाता है। धन-संपदा नहीं हो, आय नहीं हो तो स्वयं का कैरियर एवं संतान की शिक्षा-दीक्षा विशेष रूप से प्रभावित होती है। ऐसे ही जीवन की तमाम समस्याओं, बाधाओं आदि से मुक्ति, सतत् सफलता एवं अपार धन-संपदा पाने के लिए शास्त्रों में वर्णित विधि से निर्मित इस त्रिशक्ति लाॅकेट या कवच को किसी शुभ मुहूर्त में धारण करें। आप पर त्रिदेवी श्री लक्ष्मी, श्री दुर्गा एवं श्री सरस्वती की कृपा निरंतर बनी रहेगी। यह लाॅकेट मूंगा, मोती और पीतांबरी इन तीन रत्नों को एक साथ जोड़कर बनाया गया है। मूंगा मंगल का रत्न है। मंगल ग्रह शक्ति एवं साहस का प्रतीक है। मूंगा धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, कार्यों में मन लगता है तथा परिश्रम का उत्तम फल प्राप्त होता है। मोती चंद्रमा का रत्न है। मोती रत्न का लक्ष्मी के साथ विशेष संबंध है, क्योंकि इन दोनों की उत्पत्ति समुद्र से ही हुई है। यह रत्न लक्ष्मी वृद्धि में विशेष सहायक है। मन के कारक ग्रह चंद्र का रत्न होने के कारण मोती मानसिक शांति भी प्रदान करता है। पीतांबरी रत्न बृहस्पति ग्रह का उपरत्न है। बृहस्पति धन एवं विद्या का कारक ग्रह है। इस रत्न को धारण करने से विद्यार्थियों को ज्ञान, सरकारी नौकर को सम्मान और व्यापारी को धन की प्राप्ति होती है तथा आय के नवीन स्रोतों में वृद्धि होती है। इन तीनों रत्नों से बने लाॅकेट को गले में धारण करने से जीवन में आर्थिक सम्पन्नता बनी रहती है। इसे धारण करने से न सिर्फ लक्ष्मी की प्राप्ति होती है बल्कि यष, कीर्ति, सुख स्वास्थ्य, विद्या, शत्रु विजय एवं हर कार्य में सफलता भी मिलती है। इस लाॅकेट को धारण करने वालों को अपार लोकप्रियता और समाज में प्रतिष्ठा मिलती है और हर प्रकार की बाधाएं एवं दरिद्रता दूर होती त्रिशक्ति लाॅकेट/नवरत्न लाॅकेट/ नवरत्न ब्रेसलेट भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रहों की मान्यता है - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। इन ग्रहों से जुड़े रत्नों का उपयोग अत्यंत ही लाभदायक और अमोघ सिद्ध हुआ है। शुद्ध नवरत्नों से बने नवरत्न लाॅकेट या ब्रेसलेट के अनेक गुण हैं। इसे पहनने से जातक को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है। इसके कुछ दैवीय गुण हैं। लाॅकेट और ब्रेसलेट में जड़े विभिन्न रत्न संबद्ध ग्रहों की रश्मियों को अवशोषित कर उनका लाभ जातक को प्रदान करते हैं। नवरत्न और कंगन में सभी नौ ग्रहों के रत्न जड़े होते हैं। इसे धारण करने वाले व्यक्ति को नाम और यश, सम्मान, समृद्धि, भौतिक सुख आदि की प्राप्ति तथा कफ, ज्वर आदि विभिन्न बीमारियों से मुक्ति मिलती है। नव रत्न लाॅकेट में नौ ग्रहों के रत्न और उनके लाभ निम्न प्रकार से होते हैं रत्न ग्रह लाभ माणिक सूर्य स्वास्थ्य मोती चंद्र मानसिक शांति मूंगा मंगल पराक्रम लाभ पन्ना बुध बुद्धि एवं विद्या सुनैला गुरु धन जरकन शुक्र ऐश्वर्य नीली शनि कष्ट निवारण गोमेद राहु शत्रु पर विजय लहसुनिया केतु जादू टोने व उपरी शक्तियों से बचाव नवरत्न लाॅकेट या ब्रेसलेट हर व्यक्ति धारण कर सकता है। सोने, चांदी अथवा अष्टधातु में बने इस नवरत्न या लाॅकेट में नौ रत्न जड़े होते हैं। ग्रहों के कुप्रभाव के कारण कभी कभी व्यक्ति के सारे प्रयास व्यर्थ हो जाते हैं। यह लाॅकेट या ब्रेसलेट धारण करने वाले की ग्रहों की कुदृष्टि और शनि की साढ़े साती तथा महादशा के बुरे प्रभावों से रक्षा करता है। इस नवरत्न लाॅकेट अथवा ब्रेसलेट को धारण करने से अपार लोकप्रियता और समाज में प्रतिष्ठा मिलती है और हर प्रकार की बाधाएं एवं दरिद्रता दूर होती है। धारण विधि: उक्त लाॅकेट या ब्रेसलेट को किसी भी शुभ दिन या किसी सिद्ध मुहूर्त में सुबह स्नानादि करके पंचामृत से धोकर तथा पूजन आदि करके धारण करें। इच्छित फल प्राप्ति के लिए प्रतिदिन 108 बार निम्न में एक या अनेक मंत्रों का जप करें और सुखद जीवन व्यतीत करें। जप के लिए विभिन्न मंत्र (धन संपदा एवं समृद्धि के लिए)ः ¬ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः। (स्वास्थ्य वृद्धि के लिए)ः ¬ त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। (विद्या प्राप्ति के लिए)ः ¬ ह्रीं ऐं ह्रीं ¬ सरस्वत्यै नमः। (विजय प्राप्ति के लिए)ः सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वाथसाधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते। (शांति के लिए)ः ¬ नमः शिवाय। (पुत्र प्राप्ति के लिए)ः ¬ देवकीसुतगोविंद वासुदेवजगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।। (पत्नी प्राप्ति के लिए)ः पत्नीं मनोरमां देहि, मनोवृत्तानुसारिणम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भ्भवाम्।। (वर प्राप्ति के लिए)ः कात्यायनि महाभाये महायोगिन्य धीश्वरि! नन्दगोपसुतं देवं पतिं मे कुरु ते नमः। (बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए)ः सर्वाबाधा-विनिर्मुक्तो, धनधान्यसमान्वितः। मनुष्यो त्वत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः।। (नवग्रह शांति के लिए)ः ¬ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु शशि भूमि सुतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्ति करा भवन्तु। नवरत्न या लाॅकेट धारण करने के बाद निम्नलिखित मंत्र का नियमित रूप से यथासंभव जप करना चाहिए। ¬ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशिः भूमि सुतो बुधश्च। गुरूश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शन्ति करा भवन्तु।।

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महामृत्युजय उपासना विशेषांक  मई 2009

महामृत्युंजय उपासना विशेषांक में महामृत्युंजय मंत्र की महिमा जानी जा सकती है. महामृत्युंजय उपासना हेतु सामग्री एवं साधना विधि, सर्वरक्षाकारक महामृत्युंजय लाकेट, कवच एवं यंत्र का महत्व तथा महामृत्युंजय उपासना के लाभ बताए गए है.

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