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रुद्राक्ष जिज्ञासा और समाधान

रुद्राक्ष जिज्ञासा और समाधान  

प्रश्न: रुद्राक्ष कैसे धारण करें? प्रश्न: क्या एकमुखी रुद्राक्ष मिलता है? प्रश्न: रुद्राक्ष के क्या उपयोग हैं? प्रश्न: रुद्राक्ष और रत्न में क्या अंतर है? प्रश्न: रुद्राक्ष माला का वांछित फल नहीं मिल रहा हो तो क्या करें? उत्तर: रुद्राक्ष को सोमवार को प्रातः काल पहले कच्चे दूध से और फिर गंगाजल से धोकर व अष्टगंध लगाकर ¬ नमः शिवाय मंत्र का जप कर धारण करना चाहिए। उत्तर: रुद्राक्ष नारंगी की तरह होता है, जिसमें अलग-अलग फांकें होती हैं। इन फांकों को मुख कहते हैं। जितनी फांकें होती हैं, उतने ही उनमें बीज होते हैं। जिस प्रकार एक फांक की नारंगी नहीं होती, उसी प्रकार एक मुखी रुद्राक्ष भी सामान्यतः नहीं होता है। लेकिन कुछ प्रजातियों में, जैसे काजूदाना प्रजापति में, एक मुखी रुद्राक्ष होता है। उत्तर: रुद्राक्ष ऊर्जा व शक्तिदायक होते हैं। ये ग्रहों की अशुभता को कम कर उनकी शुभता को बढ़ाते हैं। अतः ये किसी भी क्षेत्र में उपयोग में लाए जा सकते हैं। जैसे स्वास्थ्य की अनुकूलता, शिक्षा में सफलता, व्यवसाय में उन्नति, स्थायी शांति, मुकदमे आदि में विजय व शक्ति की प्राप्ति हेतु इनका उपयोग वांछनीय है। उत्तर: रुद्राक्ष ग्रहों को सदैव व्यवस्थित करते हैं, उन्हें शुभ बनाते हैं, जबकि रत्न ग्रहों को शक्तिशाली बनाते हैं- वे चाहे शुभ हों या अशुभ। रत्नों का प्रभाव उनकी शुद्धता और वर्ण पर निर्भर करता है। रुद्राक्षों का प्रभाव उनके मुख पर निर्भर करता है। रत्नों का शरीर से स्पर्श आवश्यक है, जबकि रुद्राक्षों की अपनी आभा होती है और वे समीप रखने पर भी प्रभाव छोड़ते हैं। अतः जब कोई ग्रह अशुभ हो, तो उसकी शुभता हेतु रुद्राक्ष ही धारण करना उचित है। उत्तर: किसी भी रुद्राक्ष का पूर्ण फल तीन से छह महीने में प्राप्त होता है और लगभग एक वर्ष तक में स्थिति में अंतर दिखाई देता है। अतः रुद्राक्ष धारण करने के बाद प्रतीक्षा करें। दूसरे, समस्या व उसकी गंभीरता के अनुरूप कितने रुद्राक्ष व कितने मुखी रुद्राक्ष धारण करें, इसका किसी विद्वान से परामर्श ले लें, लाभ अवश्य होगा। उत्तर: कोई भी औषधि किसी धर्म या जाति विशेष के लिए नहीं होती, अपितु समस्त मानव जाति के लिए होती है। रुद्राक्ष का वर्णन केवल हिंदू धर्म ग्रंथों में अवश्य है, लेकिन इसका उपयोग कोई भी कर सकता है। उत्तर: माला में 27, 54 या 108 दानें शुभ माने गए हैं। कंठी में 32 दानों का, बाजूबंद में 6, 11 या 15 दानों का व कमर में 5 दानों का विधान है। मणिबंध हेतु 12, 14 या 27 दानें शुभ हैं। लेकिन संख्या की कोई सीमा नहीं है। उत्तर: जब कोई रुद्राक्ष धारण करता है तब उसके साथ उस व्यक्ति की आभा व कर्म आदि की छाप भी उसके द्वारा धारण की हुई वस्तु पर लग जाती है। अतः दूसरे की धारण की हुई माला या कोई अन्य वस्तु धारण करना सर्वदा वर्जित है। उत्तर: शिव सदैव शक्ति के साथ ही पूर्ण हैं। दैवी शक्तियों मंे लिंग भेद नहीं होता है। स्त्री-पुरुष का भेद केवल पृथ्वी लोक में ही होता है। रुद्राक्ष, जिसमें दैवी शक्तियां विद्यमान हैं, स्त्रियां अवश्य धारण कर सकती हैं। गौरीशंकर रुद्राक्ष व गौरी गणेश रुद्राक्ष खासकर स्त्रियों के लिए ही हैं - पहला सफल वैवाहिक जीवन के लिए एवं दूसरा संतान सुख के लिए। उत्तर: शुचिता की दृष्टि से रजोदर्शन के तीन दिनों तक रुद्राक्ष न धारण किया जाए, तो अच्छा है। प्रश्न: क्या रुद्राक्ष केवल हिंदू पहन सकते हैं? प्रश्न: कितने रुद्राक्ष पहनें? प्रश्न: क्या परिवार के सदस्य एक दूसरे की माला पहन सकते हैं? प्रश्न: क्या स्त्रियां रुद्राक्ष धारण कर सकती हैं? प्रश्न: क्या रजस्वला स्त्रियां रुद्राक्ष पहन सकती हैं? प्रश्न: क्या रात को सोते समय रुद्राक्ष पहनना चाहिए? उत्तर: रात को सोते समय रुद्राक्ष पहनने से प्रथमतः रुद्राक्ष के खंडित होने का डर रहता है। साथ ही सोने में भी असुविधा होती है। प्रातः काल भी शौचादि की अशुद्धि रहती है। अतः उत्तम यही है कि रात को रुद्राक्ष न पहनें। वैसे, सोते समय रुद्राक्ष पहनना वर्जित नहीं है। उत्तर: मांस व मदिरा आदि काल से भोजन के रूप में ग्राह्य रहे हैं। शांति व शक्ति पर केवल शाकाहारियों का वर्चस्व नहीं है। रुद्राक्ष में शुद्धीकरण की शक्ति होती है, अतः आप भोजन कुछ भी करें, रुद्राक्ष की महिमा व कार्यक्षमता इससे घटती नहीं है। उत्तर: रुद्राक्ष पहनने में किसी विशेष सावधानी की आवश्यकता नहीं है, लेकिन जिस प्रकार दैवी शक्तियों को हम पवित्र वातावरण में रखने का प्रयास करते हैं, उसी प्रकार रुद्राक्ष पहनकर शुचिता बरती जाए, तो उत्तम है। अतः साधारणतया रुद्राक्ष को रात को उतार कर रख देना चाहिए और प्रातः स्नानादि के पश्चात मंत्र जप कर धारण करना चाहिए। इससे यह रात्रि व प्रातः की अशुचिता से बचकर जप की ऊर्जा से परिपूर्ण होकर हमें ऊर्जा प्रदान करता है। उत्तर: रुद्राक्ष एक कोमल व जैव पदार्थ है। अतः इससे किसी प्रकार की एलर्जी आदि की कोई शिकायत नहीं मिलती है। किसी की त्वचा कितनी भी संवेदनशील क्यों न हो, वह इसे धारण कर सकता है। उत्तर: पानी में डूब जाना रुद्राक्ष के असली होने की पहचान प्रश्न: क्या रुद्राक्ष पहनकर मांस खा सकते हैं? प्रश्न: रुद्राक्ष पहनते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? प्रश्न: क्या रुद्राक्ष सभी की त्वचा के लिए उपयुक्त है? प्रश्न: क्या असली रुद्राक्ष पानी में डूबना चाहिए? नहीं है। रुद्राक्ष एक प्रकार का काठ है, जिसका घनत्व लगभग पानी के बराबर होता है - कभी कम, तो कभी ज्यादा। कुछ रुद्राक्ष डूबते हैं, तो कुछ नहीं। जो नहीं डूबते वे भी असली हो सकते हैं और जो डूबते हैं वे भी नकली हो सकते हैं। उत्तर: रुद्राक्ष में कुछ बिंदु निकले होते हैं, जिनके कारण दो सिक्कों के बीच वह घूमता नजर आता है। लेकिन यह शुद्धता की पहचान नहीं है, क्योंकि इस प्रकार की कोई भी वस्तु इस स्थिति में घूम सकती है। उत्तर: एक्स-रे रुद्राक्ष की सर्वश्रेष्ठ पहचान विधि है। इसमें रुद्राक्ष के मुख बीज रूप में दिखाई दे जाते हैं। वहीं कृत्रिम जोड़ आदि भी पकड़ में आ जाते हैं। माइक्रोस्कोप द्वारा भी मुख की लकीर की गहराई के भीतर एक सफेद उभरी हुई लकीर-सी देखी जा सकती है, जैसी कि चींटी के पीछे-पीछे एक लकीर सी दिखाई देती है। यही शुद्धता की असली पहचान है।

रुद्राक्ष विशेषांक  मई 2010

रुद्राक्ष की उत्पत्ति व प्राप्ती स्थल, धारण नियम व विधि, रुद्राक्ष के प्रकार, औषधीय उपयोग, ज्योतिषीय महत्व और उपाय के रूप में इसके प्रयोग आदि विषयों पर ज्ञानवर्धन हेतु आज ही पढ़े फ्यूचर समाचार का रुद्राक्ष विशेषांक। ज्योतिष प्रेमियों के लिए विचार गोष्ठी स्तंभ के अंतर्गत वैवाहिक जीवन दोष एवं निवारण विषय पर की गई ज्योतिषीय परिचर्चा अत्यंत उपयोगी है।

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