सानिया - शोएब विवाह क्या कहते हैं ग्रह

सानिया - शोएब विवाह क्या कहते हैं ग्रह  

सानिया का जन्म 15 नवंबर 1986 को प्रातः 11 बजकर 28 मिनट पर मुंबई में हुआ। जन्म के समय उन पर आरंभ हुई शुक्र की महादशा 25 अगस्त 2004 तक रही। अभी उन पर सूर्य की महदशा प्रभावी है, जो 25 अगस्त 2010 तक चलेगी। वर्तमान समय में प्रभावी सूर्य-शुक्र की दशा 26 अगस्त 2010 तक चलेगी। यह समय सानिया के लिए प्रतिकूल रहेगा, क्योंकि अष्टमेश सूर्य नीच राशि में शुक्र के साथ तुला राशि में स्थित है। गोचर में गुरु, शनि और मंगल अच्छी स्थिति में हैं, किंतु 14 अप्रैल से 15 मई तक इस लग्न से अष्टम भाव का स्वामी सूर्य गोचर में जन्म राशि के ऊपर रहेगा, इसलिए उन्हें मानसिक पीड़ा हो सकती है। इस तरह 26 अगस्त 2010 तक परेशानियां आती रहेंगी। अष्टम भाव और अष्टमेश की दशा में जातक को कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है, उसकी दुर्घटना या किसी कारणवश उसका आॅपरेशन हो सकता है। जहां तक सानिया मिर्जा के विवाह का प्रश्न है, शोएब के साथ उनका विवाह तो होगा, परंतु अष्टमेश की दशा में अगस्त 2010 तक परेशानियां आती रहेंगी। इस वर्ष अगस्त के बाद चंद्र की दशा में 2010-2020 तक का समय सुखमय रहेगा। देखा जाए तो सूर्य, बुध और शुक्र के चंद्र से सप्तम भाव में होने के फलस्वरूप सूर्य-शुक्र में विवाह निश्चित है। चंद्र से सप्तम भाव पर गुरु की दृष्टि है, इसलिए सानिया मिर्जा का इस समय में शादी होना स्वाभाविक है। नीच राशि के सूर्य के चंद्र से सप्तम भाव में होने के कारण उनका विवाह एक विवाहित व्यक्ति से होने जा रहा है। नवांश कुंडली में सप्तमेश चंद्र अष्टम भाव में और अष्टमेश सूर्य छठे भाव में स्थित है। यह स्थिति भी विवाहित व्यक्ति से संबंध की द्योतक है। इस कुंडली में कई राजयोग हैं। उच्च का मंगल लग्न में पंच महापुरुष के रुचक योग का निर्माण कर रहा है। लग्नेश एकादश का स्वामी शनि परस्पर राशि परिवर्तन योग में है और शुक्र दशम भाव में अपनी ही राशि में मालव्य योग का निर्माण कर रहा है। परंतु यहां पर अष्टमेश सूर्य ने राजयोग को भंग कर दिया, इसीलिए सानिया अंतर्राष्ट्रीय टेनिस में प्रथम स्थान पर कभी नहीं आ पाईं। इस कुंडली में लग्न और शनि दोनों वर्गोŸामी हैं। मंगल उच्च का है। शनि और मंगल राशि परिवर्तन योग में हैं। सूर्य के सामने चंद्र पूर्ण चंद्र है। धन भाव में गुरु, पराक्रम भाव में राहु, धर्म भाव में केतु तथा भाव चलित में दशम भाव में बुध और शुक्र नवमेश और दशमेश होकर स्थित हैं। इस प्रकार कुंडली में कई राजयोग विद्यमान हैं। नीच के सूर्य ने नीच भंग राजयोग का निर्माण किया। सूर्य जहां उच्च होता है, उसका स्वामी मंगल लग्न में केंद्र में स्थित है। सूर्य के चंद्र से भी दशम केंद्र में होने के कारण नीच भंग राजयोग का निर्माण हुआ। जिस जातक या जातका की कुंडली में इतने राजयोग हों, उसे धन, यश और मान-सम्मान की प्राप्ति अवश्य होती है। उच्च के मंगल की दृष्टि चंद्र तथा सुख स्थान पर और धन भाव में स्थित धन के कारक गुरु की दृष्टि कर्म स्थान पर है। लग्न पर एकादश भावस्थ आयुकारक ग्रह शनि की दृष्टि है। अष्टम भाव पर गुरु और शनि की दृष्टि है। इन दोनों योगों के फलस्वरूप सानिया दीर्घायु होंगी। लग्न पर लग्नेश शनि की तथा चतुर्थ भाव पर चतुर्थेश मंगल की दृष्टि है। धनकारक ग्रह गुरु धन भाव में वर्तमान समय में भी गोचर में धन भाव में और चंद्र से एकादश में रहेगा। सानिया का वैवाहिक जीवन निश्चित रूप से सुखमय रहेगा। वर्तमान समय में अष्टमेश सूर्य की दशा के साथ-साथ पंचमेश और दशमेश शुक्र की अंतर्दशा चल रही है। गोचर में शुक्र अगस्त तक उत्तम भाव में रहेगा, परंतु स्त्री जातक की कुंडली में गुरु पति का कारक है और वर्तमान समय से विवाह तक गुरु कुंभ राशि में और चंद्र से एकादश भाव में रहेगा। तुला राशि पर कुंभ राशिस्थ गुरु की दृष्टि रहेगी। अष्टमेश की दशा में सूर्य की दशा में सानिया को चंद्र की दशा तक मानसिक कष्ट मिलता रहेगा। किंतु उनकी कुंडली में इतने राजयोगों के कारण उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। रुचक योग, वासि योग, चक्रवर्ती योग, अमला योग, पर्वत योग, नीच भंग राजयोग आदि श्रेष्ठ योगों के कारण जातका का जीवन महलों की रानी जैसा सुखमय रहेगा। अगस्त 2010 के बाद चंद्र की महादशा में ख्याति प्राप्त होगी क्योंकि पूर्ण चंद्र भरणी नक्षत्र में और स्वामी शुक्र चंद्र लग्न से सप्तम तथा लग्न से दशम भाव में है। तत्पश्चात मंगल की महादशा 2020-2027 तक और अधिक अच्छी रहेगी क्योंकि उच्च का मंगल धनिष्ठा नक्षत्र में अपने ही नक्षत्र में रुचक योग बना रहा है। उसके उपरांत राहु की दशा 18 वर्ष चलेगी। यह अवधि भी अच्छी रहेगी, क्योंकि राहु पराक्रम भाव में दो शुभ ग्रहों गुरु एवं चंद्र के मध्य शुभ कर्तरी में स्थित है। पराक्रम नहीं रहता, तो खेल कूद में इतनी प्रवीण नहीं हो पातीं। लग्न और पराक्रम भाव का बलवान होना, शनि का वर्गोत्तमी होना तथा भाग्य एवं कर्म भावों का बलवान होना इन सारे योगों के बावजूद जातका को धन और मान-सम्मान की प्राप्ति हो रही है। चंद्र सुख में स्थित है और सुख भाव पर उच्च के मंगल की दृष्टि अपनी ही राशि पर है। सुख के कारक शुक्र की दृष्टि भी सुख भाव पर है। इन सारे योगों के कारण ही जातका के जीवन में चारों ओर सुख ही सुख है। लग्न से सप्तम भाव के स्वामी चंद्र पर सूर्य, बुध और शुक्र की दृष्टि है। चंद्र लग्न से सप्तम भाव में सूर्य, बुध और शुक्र हैं तथा अष्टम भाव में नवांश का सप्तमेश मित्र राशि में है। षड्बल में सप्तमेश शुक्र सबसे बलवान है। शुक्र अष्टकवर्ग में भी 31 पाॅइंट रखकर बलवान है, इसलिए सानिया का विवाह शोएब के साथ निश्चित रूप से होगा। उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा, लेकिन सूर्य की महादशा में 25 अगस्त 2010 तक मानसिक अशांति बनी रहेगी। कुछ लोग इनके पीछे पड़ेंगे परंतु कुछ कर नहीं पाएंगे। षष्ठेश बुध मित्र राशि में सूर्य के साथ है तथा षष्ठ भाव और षष्ठेश दोनों पर गुरु की दृष्टि है। इन योगों के कारण सानिया के शत्रु या विरोधी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। नवांश कुंडली में भी सूर्य षष्ठ भाव में ही है। यह भी एक शुभ योग है। दशमांश कुंडली में लग्न और तुला के स्वामी शुक्र के पंचम भाव में, शनि के मित्र की राशि में और सूर्य के दशम भाव में होने के फलस्वरूप सूर्य की महादशा में सानिया क्रीड़ा जगत में ख्याति अर्जित कर रही हैं। उक्त सारे शुभ योगों के फलस्वरूप सानिया को शारीरिक सुख, मानसिक सुख, दाम्पत्य सुख और कर्म जीवन के सुख के साथ-साथ संतान का सुख भी मिलेगा। उनके विरोधी लाख चेष्टा कर लें, उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे।


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