अमित कुमार राम


(28 लेख)
लग्नानुसार विदेश यात्रा के प्रमुख योग

अप्रैल 2013

व्यूस: 20233

जन्मकुंडली के द्वादश भावों में से प्रमुखता, अष्टम भाव, नवम, सप्तम, बारहवां भाव विदेश यात्रा से सम्बंधित है। तृतीय भाव से भी लघु यात्राओं की जानकारी ली जाती है।... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीकराशि

हस्तरेखा द्वारा विदेश यात्रा का विचार

मार्च 2015

व्यूस: 11693

विदेश यात्रा आज अधिकांश जनों की प्रबल चाह बन गयी है। पूर्वकाल में विदेश गमन संबंधी जिन ज्योतिषीय योगों को दुर्भाग्य समझा जाता था, वर्तमान की अतिभोगी सभ्यता में उन्हें सुयोग कहा जाता है। प्रायः व्यक्ति के मन में विदेश यात्रा की आ... और पढ़ें

हस्तरेखा शास्रग्रह पर्वत व रेखाएंभविष्यवाणी तकनीक

अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल

अप्रैल 2015

व्यूस: 11476

अस्तग्रहों के बारे में कहा गया है -‘त्रीणि अस्ते भवे जड़वत’ अर्थात किसी जन्म चक्र में तीन ग्रहों के अस्त हो जाने पर व्यक्ति जड़ पदार्थ के समान हो जाता है। ऐसा व्यक्ति स्थिर बना रहना चाहता है, उसके शरीर, मन और वचन सभी में शिथिलता... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

भोग कारक शुक्र और बारहवां भाव

मई 2013

व्यूस: 8866

द्वादश भाव को प्रान्त्य, अन्त्य और निपु ये तीन संज्ञायें दी जाती हैं और द्वादश स्थान (बारहवां) को त्रिक भावों में से एक माना जाता है, अक्सर यह माना जाता है कि जो भी ग्रह बारहवें भाव में स्थित होता है वह ग्रह इस भाव की हानि करता है... और पढ़ें

ज्योतिषघरभविष्यवाणी तकनीक

शारीरिक हाव-भाव द्वारा पुरूष व्यक्तित्व की पहचान

आगस्त 2014

व्यूस: 7744

उदर (पेट) जिस व्यक्ति का पेट आगे को निकला हुआ हो, यह शुभ लक्षण नहीं है। जबकि ऐसा व्यक्ति जिसका उदर बराबर सा हो, वह धन ऐश्वर्य संपन्न होता है। जिसका पेट घड़े के समान हो, यह निशानी दरिद्रता की है। जिसका पेट व्याघ्र या सि... और पढ़ें

ज्योतिषअन्य पराविद्याएंविविधभविष्यवाणी तकनीक

गंडमूल संज्ञक नक्षत्र

फ़रवरी 2013

व्यूस: 7614

संधिकाल या संक्रमण काल सदैव से ही अशुभ हानिकारक, कष्टदायक एवं असमंजसपूर्ण माना जाता रहा हैं। संधि से तात्पर्य है एक की समाप्ति तथा दूसरे का प्रारंभ, चाहे वह समय हो या स्थान हो या परिस्थिति हो।... और पढ़ें

ज्योतिषनक्षत्रभविष्यवाणी तकनीक

मेष लग्न: विभिन्न भावों में शुक्र की दशा का फल

जून 2013

व्यूस: 5886

शुक्र की महादशा मेष लग्न में शुक्र धन भाव का स्वामी होता है और जन्म कुंडली में किस भाव में स्थित है उसका भी विशेष महत्व है। जब भी शुक्र की दशा आयेगी धन योग का फल मिलेगा लेकिन दशा के अनुसार ही शुभ-अशुभ फल प्राप्त होगा। लग्न में शुक... और पढ़ें

ज्योतिषदशाघरग्रह

धन-संपत्ति प्राप्त करने के स्वप्न

जून 2014

व्यूस: 5822

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक फ्रायड का कहना है कि बहुत से स्वप्न केवल मनुष्य की इच्छापूर्ति की ओर संकेत करते हैं और ऐसे स्वप्नों को समझने के लिए किसी मनोवैज्ञानिक के पास जाने की आवश्यकता नहीं है।... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंसपनेसंपत्ति

प्रेम विवाह कैसे, कहां और किससे ?

जुलाई 2015

व्यूस: 4157

प्रेम मनुष्य के अन्तर्गत मन की वह सृष्टि है, जिसमें आप्लावित होकर मानव मन उस हर्षातिरेक में निमग्न हो जाता है। राधा कृष्ण की जुगल जोड़ी से जिस प्रेम की गंगोत्री का उद्गम माना जाता है तथा हीर-रांझा और लैला-मजनंू, शिरी-फरहाद और न ज... और पढ़ें

ज्योतिषआकर्षणविवाह

शिक्षा के क्षेत्र में सफलता व असफलता के योग

जुलाई 2013

व्यूस: 4146

प्रत्येक व्यक्ति का भावी जीवन स्तर उसके द्वारा अध्ययनकाल में किया गया परिश्रम ही तय करता है। अध्ययनकाल में यदि उसका परीक्षा परिणाम निरंतर अच्छा रहता है, तो प्रायः यह निश्चित होता है कि वह व्यक्ति आगे जाकर सुखी जीवन व्यतीत करेगा और... और पढ़ें

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