:नशे के आदि क्यों? कारण व उपाय

:नशे के आदि क्यों? कारण व उपाय  

नशे के आदि क्यों? कारण व उपाय भारती आनंद दि लग्न में पाप ग्रह नीच के होकर विद्यमान हों, तुला और वृष लग्न को छोड़कर, शुक्र ग्रह छठे या आठवें भाव में विद्यमान हो। 12 वें घर में शुक्र के साथ मंगल राहु, केतु आदि ग्रह बैठे हांे तो व्यक्ति को नशा बीमारी के रूप में आ सकता है। नशे की आदत इतनी बढ़ जाती है कि उसके प्राण भी जा सकते हैं। उसकी कमाई का अधिकतम हिस्सा नशा लेने में लग जाता है। तुला और वृष लग्न में चंद्र छठे या आठवें घर में हो या 12 वें घर में शुक्र और मंगल के साथ बैठा हो तो भी व्यक्ति नशे का आदि हो सकता है। यदि पत्री में शुक्र, बुध या राहु नीच राशी में हों तो इन ग्रहों की महादशा या अंतर्दशा के समय में व्यक्ति इन व्यसनों का आदि होकर अपने स्वास्थ्य और धन का नाश कर सकता है। यदि 12 वें घर पर एक से अधिक पाप ग्रहों की दृष्टि हो तो जातक का खर्चा नशीले पदार्थों के सेवन पर हो सकता है। 1. यदि भाग्य रेखा मोटी होकर मस्तिष्क रेखा पर रूकती हो, हाथ का रंग काला हो तो व्यक्ति को यह आदत बहुत पक्की हो जाती है। 2. हथेली व नखूनों पर काले धब्बे हों, अंगुलियां व अंगूठा मोटा हो, हाथ सख्त हांे तो भी जातक किसी न किसी नशे का शिकार होता है। 3. हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा एक हो किंतु वह जीवन रेखा व भाग्य रेखा से मोटी होने पर व्यक्ति को अगर कोई लत लग जाये जैसे शराब, सिगरेट व गुटके आदि की तो वह इसका नियमित रूप से सेवन करता है। 4. यदि शुक्र ग्रह पर तिल हो, भाग्य रेखा में द्वीप हो तो भी जातक को नशे की आदत हो जाती है। यह आदत उसे गलत संगति की वजह से ज्यादा हो जाती है। 5. मस्तिष्क रेखा मोटी हो, मस्तिष्क रेखा के ऊपर मोटी-मोटी राहु रेखाएं आती हों तो भी व्यक्ति को जीवन में नशा अंधकार की तरफ ले जाता है। 6. हाथ नरम या गुलाबी में लालिमा लिए हो तो व्यक्ति उच्च कोटी के नशे उच्च कोटी की सोसाइटी में लेता है। 7. हाथ का रंग लाल हो, उस पर लाल धब्बे हो, मंगल ग्रह उठा हुआ हो व भाग्य रेखा पर द्वीप हो तो जातक शराब या सिगरेट का नशा करता है। 8. हाथ भारी हो, शुक्र ग्रह उभार लिए हो, अंगुलियां मोटी हो, हाथ सख्त होने पर कई प्रकार के व्यसनों से जातक युक्त होता है। 9. हृदय रेखा खंडित हो या जंजीराकार होने पर हृदय टूटने पर व्यक्ति व्यसनों का शिकार हो जाता है। 10. मंगल और यदि शुक्र हाथ में अत्यधिक उभार लिए हो तो भी व्यक्ति व्यसनों का शिकार हो जाता है और किसी की भी नहीं सुनता है। उपाय 1. रोजाना तीन बार दो तीन उबले सेबों का सेवन कराने से धीरे-धीरे शराब टूटेगी व ‘‘¬ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’’ मंत्रा का जप करें। 2. नित्य व ¬ शं शनिश्चरायै मंत्रा का जप करें। 3. तंबाकू का नशा छुडाने के लिए आधा पाव धनिया, सौंफ और आजवाइन सुखाकर पीस लें ओर उसमें करीब एक छटांक काला नमक पीसकर मिला दे फिर मिश्रण में तीन कागजी नींबुओं का रस निचोड़कर उसे 12 घंटे तक ढककर रख दें। मंदिर में इसके बाद उस मिश्रण को तवे पर रखकर धीमी आंच पर सुखा लें और इस मिश्रण को किसी और बरतन में रख दें और उसमें गरम पानी के छींटे देकर मटर के बराबर गोली बना लें। जब तंबाकू की लत लगे तो जातक को चाहिए कि एक गोली मुंह में डालकर चूस लें। व ¬ नमः शिवाय का जप करें।


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