बाराक ओबामा सितारों की कहानी सितारों की जुबानी स्तंभ में हम जन्मपत्रियों के विश्लेषण के आधार पर यह बताने का प्रयास करते हैं कि कौन से ग्रह योग किसी व्यक्ति को सफलता के शिखर तक ले जाने में सहायक होते हैं। यह स्तंभ जहां एक ओर ज्योतिर्विदों को ग्रह योगों का व्यावहारिक अनुभव कराएगा, वहीं दूसरी ओर अध्येताओं को श्रेष्ठ पाठ प्रदान करेगा तथा पाठकों को ज्योतिष की प्रासंगिकता, उसकी अर्थवत्ता तथा सत्यता का बोध कराने में मील का पत्थर साबित होगा। अमेरीका के 44वें राष्ट्रपति बाराक हुसैन ओबामा महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वास से युक्त प्रभावशाली व्यक्ति हैं। पहले अश्वेत राष्ट्रपति बनने पर इन्होंने इतिहास रच दिया। ओबामा जन-जन का सहयोग करने में विश्वास रखने वाले, स्वाभिमानी, श्रेष्ठ विचारक, लेखक, सरल हृदय वाले, कुशाग्रबुद्धि, ऊर्जावान, आकर्षक, नेतृत्वशक्तिसंपन्न, दृढ़निश्चयी तथा विचारों के मतभेद को सुलझाने और मध्यस्थता व समझौता करवाने में कुशल हैं। ओबामा का जन्म 4 अगस्त 1961 को हुआ। अमेरीका के राष्ट्रपति बनने वाले यह पहले अक्रीकी अमेरीकी हैं। ओबामा राष्ट्रपति बनने से पहले सन 2005 में इलिनाॅइस से सिनेटर के पद पर कार्यरत थे। होनोलूलू हवाई के स्थाई निवासी ओबामा कोलंबिया विश्वविद्यालय व हार्वार्ड लाॅ स्कूल के स्नातक हैं जहां वे हार्वार्ड लाॅ रिव्यू के अध्यक्ष थे। कानून की डिग्री प्राप्त होने तक शिकागो में कम्यूनिटी आॅरगैनाइजर के रूप में कार्य करते रहे। शिकागो में सिविल राइटस अटाॅरनी के पद पर नियुक्त होने के बाद शिकागो विश्वविद्यालय के लाॅ स्कूल में 1992 से 2004 तक संवैधानिक कानून पढ़ाने लगे। इलिनाॅइस सिनेट में 1997 से 2004 तक ओबामा ने तीन कार्यकाल पूरे किए। सन् 2000 में यू.एस. हाउस आॅफ रिप्रैजैन्टेटिव में स्थान प्राप्त करने का प्रयास विफल रहा। सन् 2004 में ओबामा यूनाइटेड स्टेटस सिनेट की ओर बढ़े। इस अभियान के दौरान घटी बहुत सी घटनाओं के कारण पूरे राष्ट्र का ध्यान इनकी ओर जाने लगा। इन घटनाओं में से एक प्रमुख घटना उनकी मार्च 2004 की डैमोक्रेटिक प्राइमरी की जीत व। जुलाई 2004 में डैमोक्रेटिक नैशनल कन्वैंशन में दिया गया भाषण शामिल है। इन्हें नवंबर 2004 में अमेरिकी सिनेट चुनाव में विजय प्राप्त हुई। इनकी प्रैजिडेन्शियल कैंपेन फरवरी 2007 में आरंभ हुई और सन 2008 में ये डैमोक्रेटिक पार्टी प्रैजिडेन्शियल प्रायमरीज़ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार चुने गए। 2008 के आम चुनाव में ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जाॅन मैक केन को हराया और 20 जनवरी 2009 को अमेरीका के 44वें राष्ट्रपति बन गए। इनके पिता की मृत्यु सन 1982 में कार दुर्घटना में हुई। सन् 1983 में कोलंबिया विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1985 में ओबामा एक चर्च बेसड ग्रुप के लिए कार्य करने के लिए शिकागो चले गए। 1988 में ओबामा ने हार्वार्ड लाॅ स्कूल में दाखिला लिया। 1990 में हार्वार्ड लाॅ रिव्यू के संपादक बने। सन् 1992 में इनका विवाह संपन्न हुआ। 1995 में इन्होंने अपनी प्रथम पुस्तक ”ड्रीम्ज़ फ्राॅम माई फादर“ प्रकाशित की। अक्तूबर 2002 में इन्होंने इराक के खिलाफ बल प्रयोग की वकालत करने वाले विधेयक का विरोध करने के लिए एक रैली के दौरान शिकागो फैडरल प्लाजा में भाषण दिया। जनवरी 2005 में इलिनाइस के सिनेटर के रूप में शपथ ग्रहण की। 2006 में इन्होंने अपनी दूसरी पुस्तक ”द आॅडेसिटी आॅफ होप“ प्रकाशित की। 2006 में ही इन्होंने अपनी तीसरी पुस्तक ”इट टेक्स ए नेशन“ प्रकाशित की। प्रस्तुत है ओबामा की जन्मकुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण। लग्नेश शुक्र की नवम भाव में स्थिति यह स्पष्ट करती है कि वे बुद्धिमान, लोकप्रिय और सात्विक विचारधारा के व्यक्ति हैं। दशम भाव में सूर्य बुध व लग्नेश की नवम भाव में श्रेष्ठ स्थिति उत्तम राजयोग का निर्माण कर रही है। भाग्येश व लाभेश का दशमस्थ होना भी उत्तम राजयोग माना जाता है। धनेश मंगल लाभ स्थान में स्थित होकर धन भाव पर दृष्टि डालकर उत्तम लक्ष्मी योग बना रहा है। एकादशस्थ राहु से लक्ष्मी योग को अतिरिक्त बल मिल रहा है। ग्यारहवें भाव को बड़े लाभ व इच्छाओं की पूर्ति का कारक माना जाता है। इस भाव को संसार में मित्रों और प्रशंसकों का भी कारक माना जाता है। इसलिए इस प्रकार की ग्रह स्थिति जातक को अत्यधिक लोकप्रिय तथा राजनीतिक क्षेत्र में विशेष सफलता दायक सिद्ध होती है। तृतीयेश की उत्तम स्थिति लग्नेश व मंगल के बली होने पर जातक को विशेष प्रभावशाली बना देती है। ओबामा इतने प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरे कि ये बोल्ड ओबामा के नाम से लोकप्रिय होने लगे। इनकी कुंडली में मंगल सिंह राशिस्थ होकर एकादशस्थ है। लग्नेश भाग्य भाव में अर्थात् शुभ भाव में स्थित है। तृतीयेश गुरु वक्री होकर नीच भंग राजयोग बना रहा है। यह विशेष शिक्षित, कुशल व निर्भीक वक्ता, चालाक, वकील, काननूविद, कानून के प्रोफैसर, लेखक और संपादक भी हैं। शश योग बनाने वाला शनि, दशमस्थ सूर्य व एकादशस्थ राहु इन्हें विशेष प्रतापी बना रहे हैं। इनकी कुंडली में मंगल आत्माकारक होकर लगन व नवांश दोनों में अग्नितत्व राशि में स्थित है। राहु, केतु व बुध उच्च नवांश में, शनि वर्गोत्तमी व गुरु स्वनवांश में स्थित है। मंगल का आत्मकारक होकर बलवान होना, जन्मकुंडली में लक्ष्मी योग, श्रेष्ठ राजयोग, नीच भंग राजयोग, विपरीत राजयोग, पाराशरीय राजयोग, उभयचरी राजयोग, सुनफायोग, प्रसिद्धि योग, बुधादित्य योग व शश योग होने से व नवांश कुंडली में समस्त ग्रहों की शुभ स्थिति से इनकी कुंडली में विद्यमान योग पूर्णतया फलीभूत हुए। कुंडली में यदि लग्नेश शुभ भाव में हो, भाग्य भाव व भाग्येश की स्थिति उत्तम हो तथा कुंडली में अन्यान्य शुभ योग हों तो ऐसी स्थिति में यदि पूर्व जन्म के कारक ग्रह व भाव बाधक न बनें तो समस्त शुभ योग निश्चित रूप से फलीभूत होते हैं। पंचम भाव से पूर्व जन्म का विचार किया जाता है, केतु को पूर्व जन्म के बारे में अनुमान करने के लिए कारक ग्रह माना जाता है, गुरु को पंचम भाव का कारक तथा पंचमेश से भी पूर्व जन्म के कर्मों का विचार किया जाता है। इसके अतिरिक्त शनि से पूर्व जन्मार्जित पाप कर्मों का विचार किया जाता है। यदि पूर्व जन्म के कारक पंचम भाव से संबंधित सभी पक्ष पूर्णतया सकारात्मक हों तो जातक के जीवन में विघ्न बाधाएं नहीं आती क्योंकि पंचम भाव नवम से नवम होता है। ओबामा की कुंडली में केतु पंचम भावस्थ है। पंचमेश शश योग का निर्माण कर रहे हैं। पंचम भाव के कारक गुरु नीचभंग राजयोग बना रहे हैं। इसी प्रकार नवम भाव, नवमेश व सर्वाधिक सौभाग्यदायक शुक्र की स्थिति भी श्रेष्ठ है। यही कारण है कि ओबामा के भाग्य ने इनका पूर्णतया साथ दिया। तुला लग्न होने तथा योगकारक शनि के श्रेष्ठ स्थिति में होने के कारण ओबामा सुलझे हुए व संतुलित मस्तिष्क के व्यक्ति हैं। शनि का लगन, गुरु व चतुर्थ भाव पर प्रभाव होने से ये आध्यात्मिक दृष्टि संपन्न श्रेष्ठ विचारक भी हैं। दशम भाव में सूर्य बुध की स्थिति अन्य शुभ लक्षण होने पर राज सुख प्राप्ति के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। लग्नेश के भाग्य भाव में व नवमेश के दशमस्थ होने को पाराशरी पद्धति में बली राजयोग माना जाता है विशेष रूप से जब बली ग्रहों का प्रभाव नवम, दशम व एकादश भाव पर हो। 1983 में स्नातक की उपाधि प्राप्त होने के समय गोचर में पंचमेश शनि उच्च राशि में थे तथा उच्च शिक्षा कारक भाग्येश बुध पर शनि और गुरु का संयुक्त गोचरीय प्रभाव था। 1985 में राहु की महादशा में गुरु और शनि का संयुक्त गोचरीय प्रभाव महादशानाथ राहु पर होने के समय यह एक चर्च बेसड ग्रुप के लिए कार्य करने हेतु शिकागो चले गए। नवम भाव में लग्नेश शुक्र पर गुरु का गोचर होने पर ओबामा 1990 में हार्वार्ड लाॅ रिव्यू के संपादक बने। 1992 में राहु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा के समय गोचर के गुरु की सप्तम भाव पर दृष्टि होने के समय इनका विवाह संपन्न हुआ। राहु में मंगल की अंतर्दशा में इन्होंने सक्रिय राजनीति में भाग लेना आरंभ कर दिया तथा 2004 तक इलिनाॅइस सिनेट में तीन कार्यकाल पूरे किए। राहु और मंगल राजनीति के प्रधान कारक हैं। 2004 में गुरु की महादशा में दशम भाव में स्थित भाग्येश बुध की अंतर्दशा आने पर इन्हें पूरे राष्ट्र में मान-सम्मान की प्राप्ती हुई। इस समय तृतीय भाव पर गुरु और शनि का संयुक्त गोचरीय प्रभाव होने से इनका पराक्रम व प्रभाव बढ़ने लगा। 1995 में अपनी पहली पुस्तक के प्रकाशन के समय में गोचरीय गुरु की दृष्टि जन्मकुंडली में दशम भाव में स्थित सूर्य बुध पर पड़ रही थी। बुध लेखन कला के प्रधान कारक हैं। 2006 में दूसरी और तीसरी पुस्तक के प्रकाशन के समय में गोचरीय गुरु की दृष्टि जन्मकुंडली में दशम भाव में स्थित सूर्य बुध पर पड़ रही थी। 2006 में दूसरी और तीसरी पुस्तक के प्रकाशन के समय में गुरु में शनि और बुध की अंतर्दशाएं थीं तथा जन्मकुंडली के भाग्येश बुध पर जो लेखन का मुख्य कारक ग्रह है शनि का गोचर हो रहा था। नवंबर-दिसंबर 2006 में गुरु और शनि दोनों का गोचरीय प्रभाव इस बुध पर था। सन् 2009 में राष्ट्रपति बनने के समय गुरु की महादशा व सूर्य की अंतर्दशा में गोचर के गुरु महादशानाथ के ऊपर चल रहे थे। ज्योतिष शिक्षा: ज्योतिष में नियम है कि सूर्य का दिग्बल प्रधान होता है। ऐसा सूर्य भाग्येश से संयुक्त होने पर चमत्कारी हो जाता है। दशम भाव पर चार बली ग्रहों का प्रभाव है और दशमेश भी उच्चराशिस्थ होकर गुरु से दृष्ट है अर्थात दशम भाव, दशमेश व दशम के कारक सभी बलवान हैं। दशम भाव में बैठा हुआ भाग्येश बुध लग्नेश अधिष्ठित राशि का स्वामी होकर नवांश में उच्चराशिस्थ है व दशम भाव में सूर्य से संयुक्त होकर उत्तम पाराशरीय राजयोग का निर्माण कर रहा है। वक्री गुरु उच्च का फल देकर पूरी कुंडली को बल दे रहा है। दशम भाव से उच्च कोटि के राजयोग व अक्षय कीर्ति का विचार किया जाता है। ओबामा की कुंडली में राजयोग को अतिरिक्त बल प्रदान करने वाले दशम भाव से संबंधित सभी पक्ष जैसे दशम भाव, दशमेश, दशम भाव के कारक सूर्य, बुध, शनि व गुरु के अतिरिक्त लग्नेश, भाग्येश, द्वितीयेश, लाभेश आदि सभी उत्तमोत्तम अवस्था में होने से इन्हें सर्वश्रेष्ठ पद प्राप्त हुआ।


वशीकरण व सम्मोहन  आगस्त 2010

सम्मोहन परिचय, सम्मोहन व वशीकरण लाभ कैसे लें ? जड़ी बूटी के सम्मोहन कारक प्रयोग, षटकर्म साधन, दत्तात्रेय तंत्र में वशीकरण, तांत्रिक अभिकर्म से प्रतिरक्षण आदि विषयों की जानकारी के लिए आज ही पढ़ें वशीकरण व सम्मोहन विशेषांक। फलित विचार कॉलम में पढ़ें आचार्य किशोर द्वारा लिखित राजभंग योग नामक ज्ञानवर्धक लेख। इस विशेषांक की सत्यकथा विशेष रोचक है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.