सोनिया गांधी यद्गाकरन शर्मा सितारों की कहानी सितारों की जुबानी स्तंभ में हम जन्मपत्रियों के विश्लेषण के आधार पर यह बताने का प्रयास करते हैं कि कौन से ग्रह योग किसी व्यक्ति को सफलता के शिखर तक ले जाने में सहायक होते हैं। यह स्तंभ जहां एक ओर ज्योतिर्विदों को ग्रह योगों का व्यवहारिक अनुभव कराएगा, वहीं दूसरी ओर अध्येताओं को श्रेष्ठ पाठ प्रदान करेगा तथा पाठकों को ज्योतिष की प्रासंगिकता, उसकी अर्थवत्ता तथा सत्यता का बोध कराने में मील का पत्थर साबित होगा। फोर्ब्स मैगजीन द्वारा जारी संसार के सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्तियों की सूचि में श्रीमति सोनिया गांधी नौंवें (नवम) स्थान पर हैं। इन्हें भारत के सर्वाधिक प्रतिष्ठित नेहरू गांधी परिवार की बहू बनने का गौरव प्राप्त हुआ। पिछले 11 वर्षों से कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं और किंग मेकर हैं। इटली के एक छोटे से गांव में जन्मी सोनिया गांधी भारत की भाग्य निर्धारक बन गई। क्या रही सितारों की भूमिका? आइए जानें... श्रीमति सोनिया गांधी इटली में जन्मी भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वर्तमान में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षा, लोकसभा में यू. पी. ए. की चेयरपर्सन तथा कांग्रेस संसदीय दल की नेता हैं। वे कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष के रूप में सर्वाधिक लंबी अवधि पूरी कर चुकी हैं। इनका जन्म 9/12/1946 को इटली के वेनेटो क्षेत्र में पड़ने वाले विकैंजा नामक स्थान से 30 किमी. की दूरी पर स्थित एक छोटे से गांव लुसियाना में हुआ था। इन्होंने अपनी किशोरावस्था के समय ट्यूरिन के समीप ओर बासानो नामक स्थान पर रोमन कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई की। इनके पिता एक विल्डिंग कॉन्ट्रेक्टर थे जिनकी वर्ष 1983 में मृत्यु हो गई। इनकी मां और दो बहनें ओरवासानो के आस पास ही रहती हैं। वर्ष 1964 में वे इंग्लिश पढ़ने के लिए कैंब्रिज गई जहां सन् 1965 में इनकी मुलाकात राजीव गांधी से एक ग्रीक रेस्टॉरेंट में हुई। सोनिया और राजीव ने वर्ष 1968 में विवाह कर लिया और इस प्रकार इनका पदार्पण इनकी सास व तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रमति इंदिरा गांधी के घर हुआ। वर्ष 1970 में इन्होंने बेटे राहुल गांधी तथा 1972 में पुत्री प्रियंका गांधी को जन्म दिया। प्रभावशाली नेहरु परिवार के सदस्य होने के बावजूद भी सोनिया व राजीव गांधी ने अपने आपको राजनीति से पूर्णतया दूर रखा। राजीव गांधी एयरलाइन पायलट का कार्यभार संभाला व सोनिया गांधी ने घर की देख रेख का जिम्मा संभाला। 23 जून 1980 को एक हवाई हादसे में संजय गांधी की मृत्यु हो जाने पर सन् 1982 में राजीव गांधी ने राजनीति में प्रवेश किया। सोनिया ने परिवार की देखभाल करना जारी रखा और जनता से किसी भी प्रकार का संपर्क न रखा। सोनिया गांधी का भारतीय जनता से संपर्क शुरू हुआ उनकी सास श्रीमति इंदिरा गांधी की हत्या तथा पति के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद। 1984 में सोनिया गांधी ने अपने पति के अमेठी से चुनाव लड़ने के समय राजीव गांधी का जोरदार चुनाव प्रचार किया। उस समय राजीव के विरूद्ध उनके स्वर्गीय भाई की पत्नी मेनका गांधी चुनाव में उतरी थी। राजीव गांधी की हत्या होने के पश्चात् सोनिया ने प्रधानमंत्री पद को स्वीकार करने की पेशकश को ठुकरा दिया और परिणामस्वरूप पी. वीनरिसम्हा राव को कांग्रेस का नेता बना दिया गया जो कालांतर में प्रधानमंत्री बने। आने वाले कुछ वर्षों में कांग्रेस का भाग्य टूटने लगा और बहुत से वरिष्ठ नेताओं जैसे माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट, नारायण दत्त तिवारी, अर्जुन सिंह, ममता बैनर्जी, जी. केमूथनार, पी. चिदंबरम व जयंती नटराजन आदि ने सीताराम केसरी के विरूद्ध जंग छेड़ दी और कांग्रेस को छोड़कर इसके कई टुकड़े बना दिए। कांग्रेस पार्टी का पुनरूद्धार करने के उद्देश्य से इन्होंने 1997 में कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया और 1998 में कांग्रेस की नेता बन गई। कांग्रेस पार्टी में एक प्राइमरी मेंबर के रूप में प्रवेश के मात्र 62 दिन पश्चात् इन्हें कांग्रेस अध्यक्ष के पद की पेशकश की गई जिसे इन्होंने स्वीकार कर लिया। इन्होंने बेल्लारी कर्नाटक व अमेठी उत्तर प्रदेश से 1999 में चुनाव लड़ा। बेल्लारी में इन्होंने बी. जे.पी. की सुषमा स्वराज को पराजित किया। सन् 2004 व 2009 में इनका रायबरेली उत्तरप्रदेश से लोकसभा के लिए पुननिर्वाचन हुआ। 1999 में इन्हें 13वीं लोकसभा में विरोधी दल का नेता चुना गया। इन्होंने वर्ष 2003 में वाजपेई की एन डी ए सरकार के विरूद्ध नो कान्फिडेंस मोशन बुलाया। इनके खाते में लगातार दस वर्षों तक कांग्रेस की अध्यक्षा बने रहने का रिकार्ड है। वर्ष 2004 के आम चुनावों में एन डी ए की अप्रत्याशित हार के बाद सोनिया जी का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय हो गया। 16 मई को सोनिया जी को बिना किसी विरोध के 15 दलीय कोएलिशन गवर्नमेंट का नेतृत्व करने के लिए चुन लिया गया और इस कोएलिशन गवर्नमेंट को यूनाइटेड प्रॉग्रेसिव एलांयस (यू. पी. ए.) का नाम दिया गया। चुनाव के पश्चात् एन डी ए ने इनके विदेशी मूल के होने का मुद्दा उठाया तथा वरिष्ठ बी. जे. पी. नेता सुषमा स्वराज ने सोनिया जी के प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में अपना सिर मुंडवाने व जमीन पर सोने की धमकी दे डाली। एन डी. ए. ने दावा किया कि सोनिया को सत्ता से अलग रखने के लिए कानूनी कारण भी है। एन. डी. ए. ने इंडियन सिटिजनशिप एक्ट 1955 के अनुच्छेद 5 का विशेष रूप से हवाला दिया। परंतु सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और सोनिया का प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया। चुनाव के कुछ दिन पश्चात् सोनिया जी ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के पद के लिए चुना। सोनिया के समर्थकों ने इनके इस फैसले की तुलना कांग्रेस की त्याग की पुरानी परंपरा से की जबकि विरोधियों ने इसे राजनैतिक कालाबाजी बताया। नेशनल एडवाइजरी कमेटी और यू. पी. ए. के चेयरपर्सन के रूप में उन्होंने नेशनल रूरल एम्पलायमेंट गारंटी स्कीम और द राइट टू इन्फॉमेशन एक्ट बनाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। 2 अक्तूबर 2007 को महात्मा गांधी की जयंती पर इन्होंने यूनाइटेड नेशन्ज़ को संबोधित किया। महात्मा गांधी जयंती को यूनाइटेड नेशन्ज़ ने 15 जुलाई 2007 को पारित प्रस्ताव के अनुसार अहिंसा के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनके नेतृत्व में यू. पी. ए. ने 2009 के आम चुनाव पुनः जीत लिए और मनमोहन सिंह फिर से प्रधानमंत्री बना दिए गए। अकेली कांग्रेस को 206 सीटें प्राप्त हुई जो 1991 के बाद अब तक की अवधि में किसी भी पार्टी द्वारा जीती गई सीटों में सर्वाधिक है। प्रस्तुत है सोनिया गांधी की जन्मकुंडली का संक्षिप्त ज्योतिषीय विश्लेषण सोनिया गांधी की कुंडली में कर्क लग्न है जिसे कुशल राजनीतिज्ञों का लग्न माना जाता है। लग्न में बैठा हुआ शनि भी जातक को कूटनीतिज्ञ तथा कुशल प्रशासक बनाता है। चंद्र कुंडली से पंचम भाव में विराजमान गुरु व शुक्र ने भी इन्हें राजनीति का पंडित बनाया। यदि चर लग्न हो और गुरु, शुक्र तथा शनि केंद्रों में हों तो अंशावतार योग होता है। ऐसा जातक बहुत बड़ी शखिसयत होता है और उसे युग पुरुष माना जाता है। Such a Person is competent to shape the character of the age inwhiche/she lives.इस योग के अतिरिक्त एकादशस्थ राहु तथा लग्नस्थ शनि ने इन्हें राष्ट्र की सर्वाधिक सम्मानित शखिसयत बनाया। राष्ट्र के भाग्य की बागडोर इन्हीं के हाथ में है और फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार श्रीमति सोनिया गांधी संसार के सर्वाधिक शक्तिशाली व्यक्तियों की सूचि में नौंवें (नवम) स्थान पर हैं। इनकी जन्मपत्री में लग्नस्थ शनि, केंद्रस्थ गुरु, शुक्र व एकादशस्थ राहु ने इन्हें इतने ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया। मालव्य योग बनाने वाला शुक्र नवांश में भी स्वराशिस्थ है व गुरु अधिष्ठित राशि का स्वामी होकर भाग्येश से संयुक्त है। राहु केतु उच्चराशिस्थ हैं। छठे भाव में बैठा मंगल भी राजनीति के क्षेत्र में विजयी बनाता है। कारकांश कुंडली में सू. बु. दशमस्थ हैं तथा शनि छठे भाव में स्थित हैं। लग्नचंद्रिका के अनुसार यदि सूर्य बुध दशमस्थ हों तथा पाप ग्रह छठे भाव में हो तो श्रेष्ठ राजयोग होता है। इनकी कारकांश कुंडली में यह राजयोग कारक व आत्मकारक सूर्य सप्तमेश होकर दशमस्थ है जिस कारण इनका विवाह इतने शाही परिवार में हुआ तथा उसी शाही परिवार के कारण यह भारत की राजनीति व प्रशासन में गत 10 वर्षों से सर्वोपरि हैं। धनेश सूर्य पंचमस्थ है, धन का कारक गुरु केंद्रस्थ है, चतुर्थेश (संपत्ति) व लाभेश शुक्र मालव्य योग बना रहा है। चतुर्थ भाव शुभ ग्रहों से युक्त है जो चतुर्थेश, लाभेश व भाग्येश हैं। चंद्रकुंडली में धनेश व लाभेश का परस्पर दृष्टि योग है। इस प्रकार इनकी कुंडली में लक्ष्मी कृपा प्राप्ती के सभी शुभ योग विद्यमान हैं। राजनेता के रूप में इनकी प्रतिष्ठा में निरंतर वृद्धि होती रहेगी। 1965 में प्रेम के कारक शुक्र से संयुक्त गुरु की महादशा में सप्तमेश शनि की अंतर्दशा में शनि व गुरु के प्रेम के पंचम भाव पर संयुक्त गोचरीय प्रभाव के समय इनका श्री राजीव गांधी से प्रेम संबंध हुआ और इनके भाग्य के द्वार खुल गए क्योंकि पंचम भाव नवम से नवम भाव भी होता है तथा साथ ही भाग्येश की महादशा चल रही थी। 28 जनवरी 1968 को चंद्रमा से सप्तम भाव पर गुरु व शनि का संयुक्त गोचरीय प्रभाव होने पर इनका श्रीराजीव गांधी से विवाह हुआ। संतान के कारक गुरु की महादशा में संतान के कारक ग्रह व भाव पर गोचरीय गुरु व शनि का प्रभाव होने पर इन्हें वर्ष 1970 व 1972 में योग्य संतान की प्राप्ती हुई। सन् 1998 में पंचम भाव में विराजमान चंद्र लग्नेश बुध की महादशा आने पर चंद्रमा से नवम भाव में गुरु का गोचर तथा दशम में शनि का गोचर होने के समय सोनिया जी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर आसीन हुई। 1999 में इनको विरोधि दल का नेता चुने जाने पर गुरु व शनि का लग्न से दशम भाव पर गोचरीय प्रभाव होने पर इनका राजनीतिक वर्चस्व बढ़ने लगा। 16 मई 2004 को जन्मकुंडली के छठे भाव में स्थित राजयोग कारक दशमेश मंगल पर गुरु और शनि का संयुक्त गोचरीय प्रभाव होने पर इन्हें 15 दलीय कोएलिशन गवर्नमेंट के नेतृत्व के लिए निर्विरोद्ध चुना गया। 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस और यू.पी. ए. की पुनः जीत होने पर मनमोहन सिंह को इन्होंने फिर से प्रधानमंत्री के पद पर नियुक्त किया। इस समय पंचमस्थ बुध में भाग्येश गुरु की अंतर्दशा चल रही थी तथा गोचर में चतुर्थ भाव, चतुर्थेश, लाभेश व भाग्येश पर शनि व गुरु का संयुक्त गोचरीय प्रभाव हो रहा था। शनि चंद्रमा से तृतीय व गुरु चंद्रमा से नवम में होने पर गोचर में अत्यंत शुभ चल रहे थे। कुंडली में चतुर्थ भाव जनता का भाव भी माना जाता है और इस प्रकार हम देख सकते हैं कि इन्हें जनता का समर्थन मिला। चुनाव में कांग्रेस पार्टी की सबसे ज्यादा सीटें आई। वर्तमान समय में दिसंबर 2012 तक बुध में शनि की अंतर्दशा के चलते श्रीमति सोनिया गांधी प्रशासन तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति को नियंत्रित करने के लिए शक्तिशाली योजनाओं का निर्माण करेंगी और इनके ऐसे कदम से वे देश के भविष्य को एक नई दिशा देने में सफल होंगी। वर्तमान समय में गुरु व शनि के गोचरीय प्रभाव से इनके पराक्रम तथा व्यक्तिगत, सामाजिक व राजनीतिक प्रभाव में निरंतर अभिवृद्धि होगी और भाग्य भी इनका साथ देता रहेगा। अगले वर्ष के अप्रैल महीने से इनके मान सम्मान में और अधिक वृद्धि होगी तथा नवंबर 2011 व 2012 में इन्हें अपार प्रतिष्ठा व यश प्राप्ति के ग्रह योग बन रहे हैं और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में भी इनकी पकड़ और मजबूत होंगी। 2014 के उत्तरार्द्ध में इनकी प्रतिष्ठा तेजी से बढ़ेगी क्योंकि उस समय इनकी कुंडली में पंचमस्थ केतु की दशा चल रही होगी और गोचर में इनके जन्म लग्न में उच्चराशिस्थ गुरु होंगे तथा शनि उच्च के होकर भाग्येश व सुखेश पर गोचर कर रहे होंगे। ग्रह योग के अनुसार उस समय श्रीमति सोनिया गांधी भारतीय राजनीति में और अधिक आदरणीय व प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरेंगी। ज्योतिष शिक्षा चर लग्न में जन्म हो और गुरु, शुक्र, शनि केंद्रस्थ हों तो अंशावतार योग होता है तथा ऐसा जातक युग प्रवर्त्तक होता है। लग्नस्थ शनि सफल कूटनीतिज्ञ, प्रशासक और राजनीतिज्ञ बनाता है। चतुर्थ भाव व चतुर्थेश की श्रेश्ठस्थिति अपार जनसमर्थन जुटाती है। एकादशस्थ राहु अचानक भाग्य के द्वार खोलता है और राजनीतिज्ञ का कारक होने से राजनीतिक गलियारों में अनायास ही प्रभावशाली बना देता है। अंशावतार योग, लग्नस्थ शनि व एकादशस्थ राहु जीवन में किसी भी ऊंचाई तक पहुंचाने में सक्षम होता है। जैमिनी ज्योतिष के अनुसार पंचम भाव राजयोग कारक होता है। सोनिया की कुंडली में पंचम भाव में आत्मकारक सूर्य चंद्र लग्नेश बुध व केतु के साथ स्थित है तथा राहु से दृष्ट है। पंचम भाव पर चार ग्रहों का प्रभाव होने से पंचम भाव बली हो गया है। कारकांश कुंडली में श्रेष्ठ राजयोग सफलतादायक सिद्ध होगा।


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