अमिताभ बच्चन यशकरन शर्मा सुपर स्टार अमिताभ बच्चन को भारतीय फिल्म जगत में अभिनय कला के शहंशाह के नाम से जाना जाता है। इनकी लोकप्रियता जगजाहिर है। इनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली है, जिसका समस्त संसार कायल है। इनका जन्म कुंभ लग्न, तुला राशि में हुआ, जिसके फलस्वरूप वह धीर गंभीर व संतुलित स्वभाव के व्यक्ति हैं। लग्न में केतु स्थित है, उच्चराशिस्थ गुरु वर्गोत्तमी है और लग्नेश शनि केंद्रस्थ होकर जन्म लग्न व गुरु पर दृष्टि डाल रहा है। इन सारे योगों के फलस्वरूप अमिताभ का व्यक्तित्व प्रभावशाली है। ज्योतिष में सिद्धांत है कि जिस भाव पर अधिकाधिक ग्रहों का प्रभाव पड़ता है, वह अत्यधिक बलवान हो जाता है। अमिताभ के अष्टम भाव में उच्च के बुध को मिलाकर चार ग्रह स्थित हैं व द्वितीय भाव पर पांच ग्रहों की दृष्टि है। अष्टम भाव में चार ग्रहों की स्थिति से अष्टम भाव के राजयोग का निर्माण हो रहा है, जिसके फलस्वरूप वह अद्वितीय प्रतिभा, गुप्त शक्ति, दैवी संपदा व गूढ़ ज्ञान से संपन्न हैं। अष्टमेश उच्च राशि का होकर अष्टम भाव में ही स्थ्ति है। ज्ञान व ईश्वर कृपा का कारक गुरु उच्च का होकर वर्गोत्तमी है तथा द्वितीयेश व लाभेश होकर कीर्ति व व्यवसाय के दशम भाव और धन के द्वितीय भाव पर दृष्टि डाल रहा है। लग्नेश केंद्र में है और दशम, एकादश तथा धन भावों की स्थिति भी उत्तम है। फलस्वरूप उन्हें कैरियर में शीघ्रता से उन्नति मिली। भाग्य भाव में चंद्र की स्थिति तथा अष्टम भाव के राजयोग से उनकी कुंडली में भाग्योन्नति और धन वृद्धि के पूर्ण संकेत हैं। धनेश व लाभेश गुरु उच्च का होकर वर्गोत्तमी है। धन भाव पर उसके कारक गुरु के अतिरिक्त चार और ग्रहों की दृष्टि के कारण अमिताभ का धन भाव विशेष बलवान हो गया है। अमिताभ ! एक अजीम तरीन शखिसयत ! एक शखिसयत जिसने मुंबई सिने जगत की दिशा बदल डाली। अपने कैरियर की शुरुआत में अमिताभ ने अनेक उतार देखे, पर जब भाग्य ने पलटा खाया तो वह फिल्म जगत के क्षितिज पर चमक उठे - ध्रुव तारा की तरह। कैसे हुआ यह? क्या रही अष्टम भाव के राजयोग की भूमिका उनके जीवन में? आइए, जानें... गुरु ग्रह ओजस्विता का कारक और वाणी भाव का स्वामी होकर उस पर दृष्टि डाल रहा है। वाणी के द्वितीय भाव का स्वामी तथा कारक बुध दोनों ही उच्चराशिस्थ होकर वाणी के भाव पर दृष्टि डाल रहे हैं। इस भाव पर कुल पांच ग्रहों की दृष्टि होने के फलस्वरूप वह वाक्पटु हैं और उनकी वाणी अत्यंत ओजस्वी है। बुद्धि के पंचम भाव का स्वामी, पंचम भाव का कारक व बुद्धि का कारक उच्चराशि में है, पंचम से पंचम भाव में चंद्र स्थित है तथा बुद्धि को ओजस्विता व बल प्रदान करने वाला गुरु उच्चराशि का होकर वर्गोत्तमी भी है। इस ग्रह योग ने अमिताभ को बुद्धिमान बनाया। पंचम भाव की उत्तम स्थिति पूर्ण संतान सुख की द्योतक है। अष्टम भाव का राजयोग होने के कारण तथा अभिनय के कारक बुध की उच्च स्थिति और द्वितीय, पंचम, नवम व एकादश के कारक गुरु के वर्गोत्तमी होने के फलस्वरूप उन्हें अभिनय के क्षेत्र में उच्चकोटि की सफलता मिली। अष्टम भाव के राजयोग के फलीभूत होने की आवश्यक शर्त पंचम भाव की उत्तम स्थिति होती है। अमिताभ की कुंडली में यह शर्त भी पूरी हो रही है। कैरियर में श्रेष्ठ सफलता के लिए राजयोग तथा लग्नेश व धन भाव का उत्तम होना आवश्यक होता है। इनकी कुंडली में ये सभी शर्तें पूरी हो रही हैं। पंचम भाव से पूर्व जन्म के पुण्यों का विचार किया जाता है। जिस जातक की कुंडली में पंचम भाव की स्थिति उत्तम नहीं होती, उसे भाग्य के क्षेत्र में रुकावटों का सामना करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त पंचम भाव नवम से नवम होने के कारण भाग्य को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है। नवमस्थ चंद्र को भाग्य का विशेष कारक माना जाता है। चंद्र से गुरु की केंद्र में स्थिति गजकेसरी योग का निर्माण कर रही है। इस प्रकार पंचम भाव व पंचम भाव के कारक ग्रहों की श्रेष्ठ स्थिति ने इनके भाग्य के द्वार खोल दिए। फलित के सुप्रसिद्ध ग्रंथ होरा शतक के अनुसार शुक्र बारहवें भाव में, बारहवीं राशि (अर्थात् मीन) तथा स्वराशियों से बारहवीं राशियों अर्थात् मेष व कन्या में सर्वश्रेष्ठ फल देता है। इसके अनुसार इनके शुक्र को भी कुल मिलाकर श्रेष्ठ ही कहा जाएगा। इसके अतिरिक्त यह शुक्र उच्च के बुध के साथ होने से नीच भंग राजयोग को भी जन्म दे रहा है तथा साथ ही अष्टम भाव के राजयोग में भी सहायक है व चंद्र लग्नेश भी है। इन सभी ग्रह योगों के कारण बी.बी.सीके 'ऑन लाइन पोल' ने उन्हें सुपरस्टार ऑफ मिलेनियम के रूप में खयाति दिलाई। भारतीय फिल्म जगत में अमिताभ को 1970 के दशक में एंग्री यंग मैन के रूप लोकप्रियता प्राप्त हुई। उस समय इन पर लग्नेश शनि की महादशा आरंभ हुई थी जो इनकी राशि के लिए कारक ग्रह भी है। 1973 से 1980 तक इनकी अनेकानेक फिल्में हिट हुईं। 1982 में अष्टम भाव स्थित मंगल व अन्य ग्रहों के ऊपर से शनि की साढ़ेसाती के समय कुली फिल्म की शूटिंग करते हुए इन्हें इतनी जबरदस्त चोट लगी कि यह मृत्यु के द्वार पर जा पहुंचे। अत्यधिक लोकप्रियता पा चुके अमिताभ बच्चन के देश-विदेश के लाखों चाहने वालों ने दुआ मांगी और इनकी राशि के ऊपर से होने वाले गुरु के शुभ गोचर तथा महादशानाथ व लग्नेश शनि ने इनके प्राणों की रक्षा की। सन् 1983 में साढ़ेसाती के दौरान शनि के उच्चराशि में गोचर के समय इनकी यह फिल्म रिलीज हुई और इनकी लोकप्रियता के कारण अत्यधिक सफल रही। सन् 1988 में गोचर के शनि व जन्म कुंडली के मंगल में परस्पर दृष्टि योग के समय धीरे-धीरे इनका कैरियर नीचे की ओर जाने लगा और इन्हें लगातार असफलताओं का मुंह देखना पड़ा। सन् 1976 में बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा के समय इन्होंने वापसी करने का भरपूर प्रयास किया लेकिन इन्हें सफलता नहीं मिल सकी। इनकी एबीसीएल कंपनी तथा इनके द्वारा बनाई गई फिल्मों में भी इन्हें असफलता ही हाथ लगी। 1996 से 1998 तक का समय इनके लिए साधारण ही रहा। उस समय भी जन्मकुंडली के मंगल व गोचर के शनि में परस्पर दृष्टि योग की स्थिति बन रही थी इसलिए इस समय इन्हें काफी कठिनाइयों से गुजरना पड़ा। वर्ष 2000 में अमिताभ बच्चन को स्टार प्लस के 'कौन बनेगा करोड़पति' से अत्यधिक लोकप्रियता प्राप्त हुई। जब सितंबर 2000 के बाद शनि नीच राशि के गोचर से बाहर आया तो नवंबर 2000 में कैनरा बैंक ने इन पर दायर किया हुआ मुकदमा वापस ले लिया। तत्पश्चात् इनके जन्मकालीन शनि पर शनि का सितंबर 2000 के बाद का गोचर अत्यंत शुभ सिद्ध हुआ और तत्पश्चात् इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जबरदस्त वापसी की।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

विद्या बाधा मुक्ति विशेषांक  फ़रवरी 2010

इस विशेषांक में ज्योतिष में विद्या प्राप्ति व उच्च शिक्षा के योग, विद्या प्राप्ति में बाधा, ज्ञान प्रदायिनी तारा महाविद्या साधना, विद्या व ज्ञान प्राप्ति के ज्योतिषीय उपाय इत्यादि विषयों का समावेश किया गया है। इस विशेषांक में विक्रमी संवत्‌ २०६७ ज्योतिष के आइने में' लेख के अंतर्गत भारत के समाजिक, आर्थिक व सामाजिक भविष्य पर चर्चा की गई है। संपादकीय लेख में श्री अरुण कुमार बंसल जी ने विद्यार्थियों के लिए विद्या बाधा मुक्ति के कुछ सरल व सटीक उपाय प्रस्तुत किए हैं।

सब्सक्राइब

.