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धन की बात हाथ के साथ

धन की बात हाथ के साथ  

सुखमय जीवन के लिए धन की आवश्यकता होती है। इसलिए आज के इस भौतिकतावादी युग में हर व्यक्ति कम से कम समय में अधिक से अधिक धन अर्जित कर लेना चाहता है। किंतु अक्सर देखने में आता है कि ज्ञान के अभाववश पर्याप्त प्रयास के बावजूद लोग वांछित धन का उपार्जन तथा संचय नहीं कर पाते। धनोपार्जन और धन संचय का रहस्य हर व्यक्ति के हाथ में छिपा होता है। यदि वह इसे जान ले, तो उसे इस दिशा में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है और वह धनोपार्जन में सफल हो सकता है। यहां हाथ के कुछ उन्हीं रहस्यों का विश्लेषण प्रस्तुत है।

  • भाग्य रेखा के ऊपर काले तिल या दाग-धब्बे होने से व्यक्ति कई प्रकार के दोषों से ग्रस्त होता है। इससे उसे धनोपार्जन में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
  • जीवन रेखा गोल व हाथ नरम हो और गुरु व शनि की स्थिति अच्छी हो, तो व्यक्ति के जीवन में खूब पैसा आता है। परंतु भाग्य रेखा का अंत हृदय रेखा या मस्तिष्क रेखा पर हो, तो रुकावट भी आती है।
  • भाग्य रेखा मस्तिष्क रेखा पर रुकी हो, दोनों का जोड़ लंबा हो, अंगूठा कम खुले तथा शनि और सूर्य हाथ में दबे हों, तो व्यक्ति के पास लक्ष्मी तो रहती है, परंतु उसका खर्च भी बहुत होता है।
  • हाथ भारी हो, सभी ग्रह उन्नत हों, भाग्य रेखा मणिबंध से निकल कर शनि पर्वत तक जाती हो और जीवन रेखा से शनि रेखाएं निकलती हों, तो व्यक्ति अखंड भाग्य लक्ष्मी का स्वामी होता है।
  • भाग्य रेखा मोटी से पतली व जीवन रेखा से दूर हो, तो 25 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति का जीवन अत्यंत सुखमय होता है। वह अपना जीवन रईसी ठाट-बाट के साथ व्यतीत करता है।
  • जीवन रेखा गोल हो, शुक्र पर तिल हो, उंगलियां सीधी हों और उनके आधार बराबर हों, तो व्यक्ति अथाह धन-संपत्ति का स्वामी होता है।
  • उंगलियां लंबी, हाथ भारी और भाग्य रेखा तथा शनि व बुध उत्तम स्थिति में हों, तो व्यक्ति को अचानक धन लाभ तथा संपदा की प्राप्ति के अवसर मिलते हैं।
  • भाग्य रेखा जीवन रेखा से दूर हो, चंद्र पर्वत पर अतींद्रिय ज्ञान रेखा हो, व शनि ग्रह उन्नत हो, तो व्यक्ति देश तथा विदेश से धनोपार्जन करता है।
  • भाग्य रेखा का टूटकर चलना, धब्बे युक्त होना, शनि, बुध तथा मंगल का अशुभ स्थिति में होना ये सारे लक्षण धनोपार्जन में बाधक होते हैं। इन लक्षणों से युक्त व्यक्ति के पास धन तो आता है परंतु वह उसकी बचत नहीं कर पाता है। ऐसे लोगों का काम रुक रुक कर चलता है।

इस तरह, हाथ में ऐसे अनेकानेक लक्षण होते हैं, जिनके सम्यक् विश्लेषण से लोग बाधाओं का समय रहते उचित उपाय कर धनोपार्जन और संचय के में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।


नजर व बंधन दोष मुक्ति विशेषांक  मार्च 2010

नजरदोष के लक्षण, बचाव व उतारने के उपाय, ऊपरी बाधा की पहचान, कारण व निवारण, नजरदोष का वैज्ञानिक आधार तथा नजर दोष निवारक मंत्र व यंत्र आदि विषयों की जानकारी प्राप्त करने हेतु यह विशेषांक अत्यंत उपयोगी है। इस विशेषांक में महान आध्यात्मिक नेता आचार्य रजनीश की जन्मकुंडली का विश्लेषण भी किया गया है। इसके विविधा नामक स्तंभ में ÷हस्ताक्षर विज्ञान द्वारा रोगों का उपचार' नामक लेख उल्लेखनीय है।

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