नितिन गडकरी स्वयंसेवक से अध्यक्ष तक का सफर

नितिन गडकरी स्वयंसेवक से अध्यक्ष तक का सफर  

उमाधर बहुगुणा
व्यूस : 1768 | मार्च 2010

भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन गडकरी का जन्म नागपुर के महल इलाके में श्री एवं श्रीमती जयराम गडकरी और भानुताई के घर हुआ। श्री गडकरी का लग्नेश सूर्य दशम स्थान में दशमेश शुक्र के साथ एक पराशरीय राज योग का सृजन कर रहा है, जो उन्हें हमेशा नए-नए कार्य करने को पे्ररित करता है। वह प्रबंधन के कुशल खिलाड़ी हैं। वर्ष 1995 में जब पहली बार लोक निर्माण मंत्री बने तो हांगकांग गए। वहां से लौटकर मुंबई में भी हांगकांग की तर्ज पर फ्लाई ओवर और एक्सप्रेस-वे बनाने की कल्पना की और लगभग 55 फ्लाई ओवर, पुल और मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया।

उन्हें आज भी महराष्ट्र मंे फ्लाई ओवर मैन के नाम से जाना जाता है। द्वितीयेश और लाभेश बुध की भाग्य भाव में केतु व चंद्र के साथ स्थिति शुभ नहीं है। लेकिन बुध के घर धन भाव में बृहस्पति की तथा बुध के ही भाग्य भाव में धनेश लाभेश की स्थिति के कारण वह एक सफल उद्यमी हैं। लाभ के बुध के कारण नितिन गडकरी की करोड़ों की आय है। पराक्रम भाव के राहु के कारण वह छात्र जीवन में पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। छात्र जीवन से अब तक के सफर में उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पार्टी के प्रति अपनी इसी निष्ठा तथा समर्पण के कारण वह पार्टी के आज तक के सबसे कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।


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किंतु षष्ठेश और सप्तमेश शनि की चैथे भाव में तथा चंद्र की भाग्य भाव में स्थिति शुभ नहीं है जिसके फलस्वरूप योग्य और ऊर्जावान होने के बावजूद वह न तो विधान सभा का और न ही लोकसभा का कोई चुनाव जीत सके, हालांकि एकाधिक बार एमएलसी अवश्य चुने गए। भाग्य भावस्थ चंद्र, केतु और बुध ने उन्हें छात्र जीवन से ही राजनीति की ओर मोड़ दिया। इन तीन ग्रहों की इस स्थिति के फलस्वरूप ही वह कहीं झुकते नहीं हैं और उनकी कार्यशैली आक्रामक है, किंतु उनमें विनम्रता कूट-कूट कर भरी हुई है।

व्ययेश चंद्र के प्रभाववश वह पार्टी को एक गरिमापूर्ण स्थिति तक ले जाने में अवश्य सफल होंगे। नितिन का शाब्दिक अर्थ रक्षक होता है। इस दृष्टि से भी वह पार्टी के रक्षक सिद्ध होंगे। श्री गडकरी की जन्म कुंडली में कई राजयोग है। भाग्येश और चतुर्थेश मंगल के कारण वे एक कुशल प्रशासक तथा उच्च कोटि के योजनाकार हैं। इसी मंगल के कारण वह किसी के दबाव में नहीं आते। उन्हें महाराष्ट्र में ढांचागत विकास को लेकर काफी प्रसिद्धि मिली और इसी प्रसिद्धि के बल पर वह प्रदेश की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे और इन्हीं राजयोगों के कारण पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।

श्री गडकरी की कुंडली में भाग्येश चतुर्थेश मंगल तथा लाभेश धनेश बुध के कारण एक अति प्रभावशाली राजयोग बन रहा है जिसके फलस्वरूप वह समझदार, दूरदर्शी, विनम्र तथा दृढ़प्रतिज्ञ हैं। अपने लोक निर्माण मंत्रित्व काल में वह हांगकांग गए और फ्लाई ओवर की तकनीक सीखकर वापस आए। उन्हीं दिनों हाइवे निर्माण के लिए धीरूभाई अंबानी की कंपनी रिलाएंस ने 3600 करोड़ का लोएस्ट टेंडर भरा लेकिन उन्होंने स्व. प्रमोद महाजन के दबाव के बाद भी यह टेंडर उन्हें नहीं दिया और कहा कि मैं इस हाइवे को 1600 करोड़ में बनाकर दिखाऊंगा और उन्होंने वैसा ही कर दिखाया।


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विंशोŸारी दशा क्रम में लगभग 41 वर्ष की आयु में जब से मंगल की दशा शुरू हुई, वह राजनीति में दिन-प्रतिदिन आगे बढ़ते गए। राहु की दशा 49 वर्ष की आयु से आरंभ हुई जो 67 वर्ष की आयु तक चलेगी। राहु की विंशोŸारी दशा में जैसे ही बृहस्पति की अंतर्दशा शुरू हुई, वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। राहु की दशा में शनि की अंतर्दशा उन्हें तपाएगी।

श्री गडकरी के ग्रह नक्षत्रों के अध्ययन से प्रतीत होता है कि अगले एक दो वर्षों में वह आरएसएस द्वारा अपनी नियुक्ति को सही एवं सार्थक सिद्ध करेंगे। अपने पद की गरिमा का निर्वाह करते हुए वह पार्टी को संगठित एवं मजबूत करने का हरसंभव प्रयास करेंगे और उनके कार्यकाल में पार्टी एक बार फिर से सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आएगी। उनके ग्रह योग उनके जननायक होने का संकेत भी देते हैं।

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