यंत्रों के लाॅकेटों की उपयोग विधि

यंत्रों के लाॅकेटों की उपयोग विधि  

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भौतिक जीवन में आनंद, उमंग और उत्साह होना अत्यंत आवश्यक है। परंतु चिंताओं से ग्रसित लोगों को हमेशा खुशियों से वंचित पाया गया है और अनेक चिंताएं मनुष्यों को घेरती जा रही हैं, कभी स्वास्थ्य, कभी व्यापार, कभी कर्ज की चिंता, बीमारी की चिंता एवं विवाह की चिंता आदि ऐसी हजारों चिंताएं हैं, जिनसे छुटकारा पाने के लिए यंत्र लाॅकेट एक सरल एवं चमत्कारी विधि है। अगर यंत्र का लाॅकेट मानव जीवन के लिए उपयोग में लाया जाए, तो धारक को अवश्य ही शांति मिलती है। लाॅकेट के सहारे अनेक लोगों ने दुर्लभ कार्य संपन्न किये हैं, ऐश्वर्य पाया है। साधारण सा दिखने वाला चमत्कारी लाॅकेट अपने आप में असीमित शक्ति को समाहित किये रहता है, जिसे साधारण व्यक्ति समझने में असफल है। लाॅकेट का उपयोग, जन्म से मरण तक प्रत्येक क्षण, आवश्यक है। लाॅकेट 2 धातुओं, में ज्यादा शुभ माना गया है- पहला सोने से बना और दूसरा चांदी से बना। इनका महत्व सबसे अधिक समय तक रहता है। चांदी में निर्मित अलग-अलग लाॅकेट हंै, जिनके प्रभाव से जातक अपनी परेशानी को आसानी से दूर कर सकता है। धारण विधि तथा मंत्र: सोऽहं यंत्र लाॅकेट का प्राण माना जाता है । किसी भी यंत्र के लाॅकेट को प्रतिष्ठित एवं जागृत करने के लिए ईशान आदि चारांे कोणों में बीज मंत्र द्वारा लाॅकेट की पूजा की जाती है। उस यंत्र से संबंधित देवता की षोडषोपचार विधि से पूजा-अर्चना की जाती है। दसों दिशाओं में 10 दिक्पालों की पूजा होती है। यंत्र साधक, अपने इष्ट देव का स्मरण कर के, लाॅकेट को पंचामृत एवं गंगा जल से अभिसिंचित कर के, धूप, दीप, नैवेद्य आदि से पूजा करता है। उसके बाद लाॅकेट को, स्वच्छ मन से, धारण करें। सर्वश्रेष्ठ श्री यंत्र का लाॅकेट श्री यंत्र का लाॅकेट का विशेष महत्व है। लक्ष्मी, सरस्वती, ब्रह्मणी, तीनों धन वृद्धि, कर्ज से संबंधित धन पाने के लिए श्री यंत्र उपयोगी है। श्री यंत्र के लाॅकेट की चल प्रतिष्ठा होती है। उपयोग: व्यापार में वृद्धि के लिए इस लाॅकेट को गले में धारण करें, या तिजोरी में रख सकते हैं, जिससे धन-धान्य की वृद्धि होती है। वेल वृक्ष की छाया में लाॅकेट की उपासना करने से लक्ष्मी शीघ्र ही प्रसन्न होती है और अचल संपत्ति प्रदान करती है। लाभ: खुशहाल जीवन पाने हेतु श्री यंत्र का लाॅकेट, श्रद्धापूर्वक, हमेशा धारण करें तथा देवी का भोग लगाएं, तो शीघ्र ही इसका चमत्कार होता है। लाॅकेट धारण करने से पहले कमल गट्टे की माला पर 108 बार इस मंत्र का जाप कर के धारण करें। मंत्र: ú ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः Û महामृत्युंजय यंत्र (प्राणरक्षक) लाॅकेट: आयुवर्धक भावी, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु को रोकने वाला, स्वास्थ्यवर्धक और भयंकर रोगों से मुक्ति दिलाने वाला महामृत्युंजय यंत्र का लाॅकेट है। आज की विकट परिस्थितियों में प्रत्येक मानव अपने आपको बहुत ही अशांत अनुभव करता है। जो अशांत है, उसे सुख कहां? अशांतस्थ कुतः सुखम? महामृत्युंजय यंत्र का उपयोग जिस प्रकार पूजा के लिए होता है, उसी प्रकार धारण के लिए भी होता है। ‘यंत्र चिंतामणि’ में भगवान शिव ने प्राणों की रक्षा के लिए ‘मृत्युंजय यंत्र’ का विधान बतलाया है। जब कोई शासक, अथवा शत्रु घात करना चाहता हो, दिन-रात पीछे पड़ा रहता हो, तो, आत्मरक्षा के लिए महामृत्युंजय यंत्र का लाॅकेट अनुकूल है। लाॅकेट का लाभ: जो व्यक्ति यह लाॅकेट धारण करता है, तो उसपर जादू-टोने आदि तथा ऊपरी हवाओं का असर नहीं पड़ता। मारकेश की दशा एवं शनि की साढ़े साती में इसका विशेष उपयोग होता है। इस लाॅकेट को धारण करने से जातक स्वस्थ रहते हैं। भगवान शिव की साधना एवं स्तुति के लिए इसका अपना महत्व है एवं महामृत्युंजय पाठ करने से बहुत लाभ होता है। मंत्र: ú त्र्यम्बकं यजामहे सुगधिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृताम्।। Û विद्याप्रदायक सरस्वती लाॅकेट: विद्या प्राप्ति जीवन की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती है। सरस्वती की उपासना से बुद्धि में तीव्रता आती है। आज का युग बौद्धिक युग है। बौद्धिक विकास को ले कर चारों तरह तरह-तरह के परीक्षण, प्रतियोगिताएं एवं परीक्षाएं संपन्न हो रही हैं। बुद्धिहीन व्यक्ति मूर्ख कहलाता है। उसकी कहीं इज्जत नहीं होती। ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि को कुशाग्र करने के लिए, मंदबुद्धि वालों की बौद्धिक क्षमता बढ़ाने के लिए एवं स्मरण शक्ति की तीव्रता के लिए सरस्वती यंत्र का लाॅकेट एक मात्र अवलंबन है। विद्या प्रदान करने की अपरमित शक्ति मां सरस्वती में ही है। यह लाॅकेट मां सरस्वती के बीज मंत्रो द्वारा निर्मित किया जाता है। प्राण प्रतिष्ठा: लाॅकेट को प्रातः काल, स्नानादि के बाद, गंगा जल और कच्चे दूध में डुबो कर, उसे स्वच्छ कपड़े से पोंछ कर, लाल धागे में डाल कर, पूजा स्थान पर रख दें और तुलसी की माला से 108 बार, बुधवार के दिन, जाप करें। बाद में अपने गले में धारण करें। मंत्र: ú श्री सरस्वत्यै नमः संतान सुख प्राप्ति लाॅकेट: मानव जीवन में प्रत्येक विवाहित दंपति को स्वस्थ संतान प्राप्ति की अभिलाषा होती है, जो वृद्धावस्था में सुखी जीवन यापन में सहारा दे सके। बहुत से प्राणी, संतान के लिए भरपूर प्रयत्नों के बावजूद, संतान से वंचित रह जाते हैं। इस कार्य के लिए संतान गोपाल लाॅकेट बहुत ही चमत्कारी है। यह लाॅकेट प्रतिभावान और दीर्घायु संतान की प्राप्ति में सहायक सिद्ध होता है। संतान गोपाल लाॅकेट को अपने गले में धारण करें और पुत्र प्राप्ति की माला से संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करेें। लाॅकेट को प्रातः काल बृहस्पतिवार धारण करें। मंत्र: ú नमः शक्तिरूपाय मम गृहे पुत्र कुरु कुरु स्वाहा। इस मंत्र को 108 बार जपें और एक माला प्रत्येक दिन अवश्य जप करें। दुर्गा बीसा लाॅकेट: यह लाॅकेट सिद्धिप्रदायक एवं सुख-शांतिप्रदायक है। इस लाॅकेट को धारण करने से सभी प्रकार की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। मनोकामना पूर्ति हेतु इस लाॅकेट को मंगलवार के दिन, अमावस्या को मध्य रात्रि में, पूजा स्थल में शुद्धतापूर्वक रख कर, लाल फूलों एवं मंत्र से पूजन करें। मंत्र: ú ऐं हीं क्लीं चामुंडाय विच्चे’


नजर व बंधन दोष मुक्ति विशेषांक  मार्च 2010

नजरदोष के लक्षण, बचाव व उतारने के उपाय, ऊपरी बाधा की पहचान, कारण व निवारण, नजरदोष का वैज्ञानिक आधार तथा नजर दोष निवारक मंत्र व यंत्र आदि विषयों की जानकारी प्राप्त करने हेतु यह विशेषांक अत्यंत उपयोगी है। इस विशेषांक में महान आध्यात्मिक नेता आचार्य रजनीश की जन्मकुंडली का विश्लेषण भी किया गया है। इसके विविधा नामक स्तंभ में ÷हस्ताक्षर विज्ञान द्वारा रोगों का उपचार' नामक लेख उल्लेखनीय है।

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