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क्यों नहीं है विवाह का सुख ?

क्यों नहीं है विवाह का सुख ?  

क्यों नहीं है विवाह का सुख? भारती आनंद हमारे भाग्य और ग्रहों की चाल ऐसे चलती है कि हमें जीवन के अनेक रंग देखने को मिलते हैं। विपरीत ग्रह स्थिति में मनचाहे जीवन साथी से विवाह होने के बाद भी जीवन के उतार-चढ़ावों से समस्त विवाहित जीवन दुखपूर्ण हो जाता है। जानिए, हस्त रेखा के आधार पर। यदि हाथ में हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा एक हो (पुरुष के हाथ में) व स्त्री के हाथों में हृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा अलग हो तो पति-पत्नी के विचारों का कही से भी मेल नहीं बैठता है। अगर इस स्थिति के साथ-साथ मंगल ग्रह व शुक्र ग्रह अगर स्त्री के खराब है तो स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। यदि हाथ स्त्री का सखत है और उसके पति का नरम, तो स्त्री के स्वभाव के कारण उसे विवाह का सुख चाहते हुए भी नहीं मिल पाता है। यदि विवाह रेखा में कट-फट हो और वह आगे से फटी हुई हो, द्विभाजित हो या नीचे की तरफ मुड़ जाती हो तो भी वैवाहिक जीवन में बाधा आती रहती है। यदि स्त्रियों के हाथ में हृदय रेखा खंडित हो, उस पर यव बनते हों और वहां से मोटी-मोटी रेखाएं मस्तिष्क रेखा पर गिरती हों तो ऐसी स्त्रियां छोटी-छोटी बात को बहुत अधिक महसूस करती हैं, पति की जरा सी भी अनदेखी बर्दाश्त नहीं करती हैं जिसकी वजह से छोटी-छोटी बातों पर घर का कलेश, वैवाहिक जीवन के सुख को खत्म कर देता है। यदि भाग्य रेखा में द्वीप हो और मस्तिष्क रेखा जंजीराकार हो, हाथ सखत हो तो भी वैवाहिक सुख को भंग कर देता है। मंगल ग्रह पर कट-फट हो, वहां से मोटी-मोटी रेखा काट रही हों, हृदय रेखा भी टूटी-फूटी हो और विवाह रेखा पर जाल हो, हाथ सखत हों, अंगुलियां टूटी-फूटी हों तो भी वैवाहिक सुख को कम या खत्म ही कर देती है। मैंने अपने अनुभव से यह भी जाना है कि यदि हाथ सखत हों, अंगुलियां मोटी या टेढ़ी हों, अंगूठा आगे की तरफ हो, तो सारी जिंदगी गिले शिकवे में कट जाती है। शुक्र पर तिल हो व शुक्र भी अत्यधिक उठा हुआ हो तो गृहस्थ सुख में बाधक होता है। फिल्म अभिनेत्री रेखा जो फिल्म उद्योग में एक स्थापित अभिनेत्री थी व कई फिल्मी हस्तियां उनसे शादी करना चाहती थी परंतु उन्होंने फिल्म लाईन से दूर मशहूर उद्योगपति मुकेश अग्रवाल से विवाह किया। मुकेश भी उद्योग जगत में अपना एक अलग स्थान रखते थे फिर भी 40 वर्ष की उम्र में विवाह किया। शायद उन्हें रेखा ही अपने लिए सबसे उपयुक्त जीवन संगनी लगती होगी और इस विवाह को उनके पूरे परिवार ने हंसी खुशी पूरे रीति रिवाजों के साथ सम्पूर्ण किया किंतु उनकी ग्रह चाल व कुछ हाथ की रेखाओं में दोष होने की वजह से विवाह का सुख प्राप्त नहीं कर सका, मुकेश का विवाह उपरांत असमय स्वर्गवास हो गया। वैवाहिक सुख दुख में परिवर्तित हो गया जिसकी वजह से उन्होंने आत्म हत्या ही कर ली और रेखा भी आज तक वैवाहिक सुखों से महरूम है। इसलिए हमें वैवाहिक संबंधों को निश्चित करने से पूर्व किसी विद्वान हस्तरेखा विशेषज्ञ से दोनों की हाथों की रेखाओं का मिलान अवश्य करा लेना चाहिए ताकि वैवाहिक जीवन में खुशियां भरपूर रहें व स्त्री-पुरुष दोनों वैवाहिक जीवन का आनंद उठा सकें।

भगवत प्राप्ति  फ़रवरी 2011

भगवत प्राप्ति के अनेक साधन हैं। यह मार्ग कठिन होते हुए भी जिस एक मात्र साधन अनन्यता के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है, आइए ,जानें सहज शब्दों में निरुपित साधना का यह स्वरूप।

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