(16 लेख)
राहु की विभिन्न ग्रहों के साथ युति फल

जुलाई 2014

व्यूस: 82380

ज्योतिष शास्त्र में सात मुख्य ग्रहों और दो छाया ग्रहों को सर्वसम्मति से मान्यता प्राप्त है। राहु केतु छाया ग्रह हैं। छाया ग्रह होते हुये भी राहु की फलादेश में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। कोई भी ग्रह जब कुंडली में राहु ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रह

वास्तु दोष दूर करने के सरल उपाय

दिसम्बर 2014

व्यूस: 54901

- घर के मुख्य द्वार पर अंदर और बाहर की ओर गणेश जी की दो प्रतिमाएं इस तरह लगाएं कि उनकी पीठ एक दूसरे से जुड़ी रहे। सभी प्रकार से कल्याण होगा।... और पढ़ें

उपायवास्तुवास्तु परामर्शवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

उपयोगी वास्तु टिप्स

दिसम्बर 2010

व्यूस: 39171

प्रस्तुत लेख में वास्तु की कुछ उपयोगी टिप्स का वर्णन है जिनको अगर ध्यान में रखा जाए तो बिन, बाधाएं, हमें छू भी न सकेंगी, घर की बगिया हमेषा महकती रहेगी एवं घर का प्रत्येक सदस्य प्रगति करता रहेगा।... और पढ़ें

वास्तुभवनगृह वास्तुवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

लाल किताब के अनुसार राहु-केतु का विष्लेषण

मार्च 2011

व्यूस: 14879

राहु-केतु को सामान्य रूप से छाया ग्रह माना जाता है किंतु लाल किताब के अनुसार ये छाया ग्रह भी अपना शुभ-अषुभ प्रभाव देने में किसी प्रकार पीछे नहीं रहते और उनकी अषुभता का प्रभाव कब पड़ता है और कब नहीं और उन्हें षुभ बनाने के लिए किन वस... और पढ़ें

ज्योतिषउपायलाल किताबभविष्यवाणी तकनीक

अंग लक्षण एवं सामुद्रिक का परस्पर सम्बन्ध

अप्रैल 2011

व्यूस: 12865

हस्तरेखाषास्त्र, अंग लक्षण विद्या और सामुद्रिक क्या तीनों एक है? उनका परस्पर क्या संबंध है और हस्तरेखा को सामुद्रिक क्यों कहते हैं इन सभी का उत्तर इस लेख में दिया गया है।... और पढ़ें

अन्य पराविद्याएंहस्तरेखा शास्रमुखाकृति विज्ञानभविष्यवाणी तकनीक

जन्म पत्रिका में ज्योतिषी योग

अप्रैल 2011

व्यूस: 12301

ज्योतिष एक दिव्य विद्या होने के साथ ज्ञान का अथाह सागर है इसमें ईष्वरोपासना की ओर आगे बढ़कर ईष्वरीय कृपा प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही पारंगत हो सकता है। इससे संबंधित ज्योतिषीय योगों के बारे में जानने के लिए यह लेख पढ़िए।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

जन्म पत्रिका में इंजीनियरिंग योग

दिसम्बर 2010

व्यूस: 6953

इंजीनियरिंग में सफलता के लिए शनि मंगल, सूर्य आदि कारक ग्रहों का लग्न, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम व दषम भाव और इन भावों के स्वामी के साथ संबंध होना अति आवष्यक है।... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीकव्यवसाय

कालसर्प दोष शान्ति के उपाय

मार्च 2013

व्यूस: 6844

राहु -केतु की प्रथम (लग्न भाव) से लेकर द्वादश भाव तक स्थिति के अनुसार १२ प्रकार के कालसर्प दोष देखने में आते हैं। जिनका फल भी भिन्न-भिन्न होता हैं तथा भावों के अनुसार बनने वाले कालसर्प दोष की शान्ति के उपाय भी पृथक पृथक ही करने चा... और पढ़ें

ज्योतिषउपायज्योतिषीय विश्लेषणघरभविष्यवाणी तकनीक

कुछ विशिष्ट धन योग

मई 2013

व्यूस: 5338

धन जीवन की मौलिक आवश्यकता है। सुखमय, ऐश्वर्य संपन्न जीवन जीने के लिए धन अति आवश्यक है। आधुनिक भौतिकतावादी युग में धन की महत्ता इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि धनाभाव में हम विलासितापूर्ण जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकते, विलासित जीवन जीना त... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगसंपत्ति

हस्ताक्षर एवं ग्रह

फ़रवरी 2014

व्यूस: 5309

‘‘हस्ताक्षर’’ दो शब्दों हस्त+अक्षर से निर्मित शब्द है जिसका अर्थ है हाथों से लिखित अक्षर। वैसे तो वर्णमाला के सभी अक्षरों को लिखने के लिए हाथों का प्रयोग किया जाता है परंतु ‘हस्ताक्षर’ शब्द का प्रयोग प्रमुखतः अपने नाम को संक्षिप्त... और पढ़ें

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