हस्त रेखाएं से जानें धन की स्थिति

हस्त रेखाएं से जानें धन की स्थिति  

आज का युग अर्थ प्रधान है- पूरी तरह भौतिकवादी। हर कोई अधिक से अधिक धन कमाने की चाह रखता है। कुछ लोग इसके लिए कड़ी मेहनत करते हैं, फिर भी उनकी इस कामना की पूर्ति नहीं हो पाती। वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें इसके लिए कोई विशेष श्रम नहीं करना पड़ता, फिर भी उन पर लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। किसी व्यक्ति के धनी या निर्धन होने का रहस्य उसके हाथों की रेखाओं तथा अन्य चिह्नों की स्थिति में छिपा होता है। यहां रेखाओं, यवों, पर्वतों आदि की उन विशिष्ट स्थितियों का विशद विश्लेषण प्रस्तुत है जो किसी व्यक्ति के धनी होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

जीवन रेखा गोल हो, मस्तिष्क रेखा द्विभाजित हो, सूर्य रेखाएं दो हों, शनि की उंगली सीधी तथा गुरु व सूर्य की बराबर हो, निर्दोष मस्तिष्क रेखा में त्रिकोण हो, हाथ भारी व ग्रह उच्च हांे तो ऐसे जातक को समय-समय पर अचानक धन का लाभ होता है।

  • मस्तिष्क रेखा मंगल से निकल कर आगे मंगल पर्वत तक जाए, भाग्य रेखा जीवन रेखा से दूर हो, सभी ग्रह हाथ में उन्नत हों, भाग्य रेखा मोटी से पतली हो या मणिबंध से शुरू होकर शनि पर समाप्त हो तो व्यवसाय में सफलता मिलती है।
  • जीवन रेखा गोल मस्तिष्क तथा भाग्य रेखाएं निर्दोष हों, जीवन रेखा से उदय होने वाली भाग्य रेखा शाखायुक्त हो तो ये अत्यंत धनवान होने के लक्षण हैं।
  • भाग्य रेखा चंद्र से निकलती हो, हाथ भारी हो, अंगूठा पीछे की ओर झुकता हो, अतींद्रिय ज्ञान रेखा उपस्थित हो और मस्तिष्क व जीवन रेखाएं निर्दोष हों तो जातक धनी होता है।
  • हाथ भारी और चैड़ा हो और उंगलियां नरम हों तो ऐसे लोग बहुत धनवान होते हैं। इन्हें धन की कभी कमी नहीं होती है।
  • भाग्य रेखाएं एक से अधिक हों, शनि ग्रह उत्तम हो, जीवन रेखा घुमावदार या गोल हो तो व्यक्ति अत्यंत धनवान होता है।
  • मस्तिष्क रेखा में किसी प्रकार का दोष न हो, भाग्य रेखा की एक शाखा जीवन रेखा से निकलती हो, हाथ मांसल तथा गुलाबी हो तो जातक की आय करोड़ों में होती है।
  • उंगलियां सीधी तथा पतली हों, हृदय रेखा सीधे बृहस्पति के नीचे जाकर खत्म हो, भाग्य रेखाएं एक से अधिक हों, सभी ग्रह उन्नत हों तो जातक करोड़पति होता है।
  • जीवन रेखा में दोष हो, यह कटी-फटी और मोटी से पतली या पतली से मोटी हो, जीवन तथा मसितष्क रेखाओं में छोटे-छोटे यव हों तो जातक की आर्थिक स्थिति सामान्य रहती है।
  • भाग्य रेखा चंद्र पर्वत से निकले और उस पर त्रिभुज बन जाए, रेखा थोड़ी पतली हो और मस्तिष्क रेखा पर रुक जाए तो जातक की आर्थिक स्थिति सामान्य रहती है।
  • हाथ में बहुत अधिक कट फट न हो, उंगलियां सीधी हों, शनि व बुध ग्रह उठे हांे, जीवन रेखा गोल हो तो भी जातक की आर्थिक स्थिति सामान्य रहती है।
  • यदि जीवन रेखा से, शनि के नीचे से, पतली भाग्य रेखा निकलती हो, जीवन रेखा के शुरू में दो भाग्य रेखाएं गुरु पर्वत पर जाती हांे, शनि के नीचे दो रेखाएं निकली हों तो व्यक्ति धनी होता है।
  • भाग्य रेखा जीवन रेखा के समानांतर चलती हो, मोटी से पतली हो, हाथ मध्यम हो, भाग्य रेखाएं एक से अधिक हों तथा उसका अंत हृदय रेखा या मस्तिष्क रेखा पर हो, उंगलियां बहुत मोटी न हों तो धन की स्थिति सामान्य रहती है।
  • जीवन रेखा के साथ मंगल रेखा अंत तक चले और हाथ भारी हो तो पैतृक संपत्ति से धन मिलता है।
  • यदि भाग्य रेखाएं एक से अधिक हों, हाथ भारी हो, उंगलियों के आधार बराबर हों तो जातक को आकस्मिक संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  • हाथ में भाग्य रेखा मोटी से पतली हो, उंगलियां सीधी हो, शनि ग्रह अधिक उन्नत हो, जीवन रेखा गोल हो और मस्तिष्क रेखा मंगल से मंगल ग्रह तक जाए तो व्यापार से काफी आय होती है।
  • भाग्य रेखा में मिलने वाली रेखा निर्दोष हो, भाग्य रेखा मोटी से पतली हो या सीधे शनि पर जाए, उंगलियां पतली और सीधी हों शनि व अन्य ग्रह उत्तम हों और हाथ का रंग साफ हो तो भी जातक को अचानक धन लाभ होता है।


हस्तरेखा एवं मुखाकृति विशेषांक   जनवरी 2008

हस्तरेखा विज्ञान का इतिहास एवं परिचय, हस्तरेखा शास्त्र के सिद्धांत एवं नियम, हस्तरेखा विश्लेषण की विधि, हस्तरेखा एवं ज्योतिष का संबंध, मुखाकृति विज्ञान क्या हैं? मुखाकृति विज्ञान से जातक का विश्लेषण एवं भविष्य कथन कैसे किया जाएं ? यह विशेषांक कुछ ऐसे ही गूढ़ विषयों पर आधारित है.

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.