हस्त रेखा द्वारा भविष्य फल

हस्त रेखा द्वारा भविष्य फल  

हस्त रेखा द्वारा भविष्य फल पं. मनोहर शर्मा ‘पुलस्य’ विवाह एवं प्रेम संबंध विवाह एवं वैवाहिक जीवन की स्थिति पता लगाने के लिए कुछ विद्वान छोटी उंगली के नीचे स्थित बुध पर्वत की रेखाओं का विश्लेषण करते हैं तो कुछ अन्य शुक्र पर्वत से। किंतु कुछ विद्वानों का मानना है कि ये वास्तव में विवाह रेखाएं नहीं हैं। बल्कि ये जीवन को विभक्त करने वाली रेखाएं हैं। विवाह भी जीवन को दो भागों में बांट देता है- एक विवाह पूर्व का और दूसरा विवाह के बाद का। जिन लोगों की दो या दो से अधिक रेखाएं होती हैं उनके एकाधिक विवाह की संभावना नहीं होती तो जीवन में दो या दो अधिक महराव आते हैं। जिनमें जीवन चर्या, परिचय क्षेत्र, स्थान कार्य, व्यवसाय आदि भी बदल सकते हैं। इन्हीं परिस्थितियों में यदि किसी महिला को पुरुष से या पुरुष को महिला से लगाव विवाह में परिणत हो जाए तो वह भी उसी का भाग है न कि प्रबल विवाह योग। प्रायः मनुष्य का जीवन दो या तीन भागों या तीन से अधिक भागों में विभक्त रहता है। इसीलिए अधिकतर दो या तीन भागों में ही हृदय रेखा के मूल भाग से बुध पर्वत तक का एक तरफ का हिस्सा बंटा हुआ होता है। विवाह की संख्या का निर्धारण शुक्र, चंद्र, बुध एवं गुरु पर्वतों के संयोग से करना चाहिए। जिनका शुक्र पर्वत बलवान और चंद्र पर्वत कमजोर होता है वे प्रायः कामुक होते हैं और कामावेश व भावावेश में कई बार विवाह कर लेते हैं। जिनका गुरु पर्वत बलवान होता है वे बुद्धि की प्रबलता के क ा र ण् ा स ा े च विचार क र िव व ा ह क ा निर्णय लेते हैं। जिस स्त्री या पुरुष की सूर्य रेखा बलवान होती है या दो अथवा तीन सहायक रेखाओं से युक्त होती है उसमें एक अद्वितीय आकर्षण होता है। ऐसे लोग किसी से पहली बार मिलने पर भी उस पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। ऐसे लोगों की मित्रता एवं क्षेत्र व्यापक होते हैं। जिन लोगों की मस्तिष्क रेखा कटी हुई होती है तथा शुक्र एवं मंगल पर्वत पर छोटी-छोटी तिरछी रेखाएं होती हैं, उनका दाम्पत्य एवं व्यावहारिक जीवन संदिग्ध बना रहता है। विवाह की संख्या देश, काल, परिस्थिति जन्य व्यवस्थाओं के अनुरूप होती है। व्यवसाय एवं नौकरी व्यवसाय एवं नौकरी के निर्धारण के लिए शनि, सूर्य, बुध एवं गुरु पर्वतों की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। बुध रेखा को व्यवसाय तथा उद्योग रेखा भी कहते हैं। जिन लोगों के हाथ में यह रेखा होती है वे यदि उद्योग या व्यवसाय से संबंधित नहीं होते तो भी उनकी मित्रता व्यवसायियों उद्योगियों से अवश्य रहती है। प ्र श् ा ा स िन क अधिकारियों का गुरु पर्वत पुष्ट एवं उभरा हुआ होता है। मंगल पर्वत पर रेखाओं का होना दौड़धूप का परिचायक होता है। जिन लोगों के मंगल पर्वत पर रेखाएं होती हैं वे पुलिस विभाग में कार्य करते हैं या उससे संबद्ध रहते हैं। विदेश यात्रा चंद्र पर्वत से निकल कर शनि पर्वत की ओर जाने वाली रेखा विदेश यात्रा या विदेश से लाभ की सूचक होती है। ऐसी रेखा अक्सर आयात निर्यात का व्यवसाय करने वालों के हाथ में होती है। यह रेखा पूर्ण न भी हो फिर भी विदेश यात्रा की संभावना रहती है। शुक्र पर्वत से निकली रेखा से यदि इसका संबंध हो तो प्रेम प्रसंगों के कारण विदेश यात्रा होती है। गुरु या चंद्र पर्वत से निकली रेखाएं यदि छोटी-छोटी व ऊध्र्वगामी हों तो शोध कार्यों, या गोष्ठियों एवं अध्ययन हेतु विदेश यात्रा करनी पड़ती है। बुध पर्वत पर यदि दो या तीन खड़ी रेखाएं हों और सूर्य रेखा बलवान हो तो यात्राएं सम्मानार्थ होती हैं। जिनकी यात्रा रेखा चंद्र पर्वत पर हो, लेकिन सूर्य एवं शुक्र पर्वतों पर कई क्राॅस हों वे जेल के या अपने डर से त्रस्त रहते हैं।



हस्तरेखा एवं मुखाकृति विशेषांक   जनवरी 2008

हस्तरेखा विज्ञान का इतिहास एवं परिचय, हस्तरेखा शास्त्र के सिद्धांत एवं नियम, हस्तरेखा विश्लेषण की विधि, हस्तरेखा एवं ज्योतिष का संबंध, मुखाकृति विज्ञान क्या हैं? मुखाकृति विज्ञान से जातक का विश्लेषण एवं भविष्य कथन कैसे किया जाएं ? यह विशेषांक कुछ ऐसे ही गूढ़ विषयों पर आधारित है.

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