विभिन्न हस्त रेखाएँ

विभिन्न हस्त रेखाएँ  

विभिन्न हस्त रेखाएं विजय कुमार हाथ पर सात प्रमुख रेखाएं और पांच गौण रेखाएं होती हैं। प्रमुख रेखाओं का परिचय इस प्रकार है। जीवन रेखा: यह बृहस्पति पर्वत के ठीक नीचे से चलती है और शुक्र पर्वत को घेरती हुई नीचे की ओर बढ़ती है। इस रेखा को आयु रेखा भी कहते हैं। इस रेखा के विश्लेषण से आयु काल, बीमारी, मृत्यु आदि के बारे में जाना जा सकता है। यह रेखा लंबी, संकरी, गहरी और अनियमितताओं से रहित हो, और टूटी हुई न हो और इस पर कोई चिह्न न हो तो शुभ होती है। शुभ जीवन रेखा व्यक्ति के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं स्फुर्ति की सूचक होती है। मस्तिष्क रेखा: मस्तिष्क रेखा तीन विभिन्न स्थानों से आरंभ हो सकती है- 1. गुरु पर्वत के केंद्र से 2. जीवन रेखा के आरंभ से 3. जीवन रेखा के भीतर मंगल क्षेत्र से इस रेखा के विश्लेषण से व्यक्ति की प्रतिभा, ऊर्जा, लक्ष्य, दृढ़ता, तर्कक्षमता आदि के बारे में जाना जाता है। हृदय रेखा: हृदय रेखा बृहस्पति क्षेत्र से आरंभ होकर सूर्य पर्वत को पार करती हुई बुध पर्वत के मूल तक जाती है। इस रेखा से भावुकता, प्रेम संबंध, मन की स्थिति आदि का विचार किया जाता है। शत्रु मुद्रिका: शत्रु मुद्रिका हृदय रेखा से ऊपर सूर्य व शनि पर्वतों के क्षेत्र को घेरे रहती है। स्वास्थ्य रेखा: स्वास्थ्य रेखा बुध पर्वत क्षेत्र से आरंभ होकर नीचे की ओर जाती है। इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य, बीमारी, असाध्य रोगों आदि का विचार किया जाता है। सूर्य रेखा: सूर्य रेखा का आरंभ जीवन रेखा, चंद्र पर्वत क्षेत्र, मंगल पर्वत क्षेत्र, मस्तिष्क रेखा अथवा हृदय रेखा कहीं से भी हो सकता है। इसे प्रतिभा रेखा अथवा सफलता रेखा भी कहा जाता है। भाग्य रेखा: भाग्य रेखा जीवन रेखा, मणिबंध, चंद्र पर्वत, मस्तिष्क रेखा या फिर हृदय रेखा से आरंभ होकर मध्यमा के पर्वत तक जाती है। भाग्य रेखा के विश्लेषण से कार्य व्यवसाय, कूटनीति, लोकप्रियता आदि का विचार किया जाता है। गौण रेखाएं: हाथ में निम्नलिखित पांच गौण रेखाएं पाई जाती हैं। मंगल रेखा: यह मंगल पर्वत से प्रारंभ होकर जीवन रेखा की ओर जाती है। इससे शौर्य, आत्मविश्वास, क्रोध आदि का विश्लेषण किया जाता है। वासना रेखा: यह स्वास्थ्य रेखा के समानांतर होती है। इस रेखा से स्त्री अथवा पुरुष की काम भावना का विश्लेषण किया जाता है। अंतप्र्रज्ञा रेखा: यह बुध पर्वत क्षेत्र से आरंभ होकर चंद्र पर्वत क्षेत्र की ओर जाती है। यह अर्द्धवृत्ताकार होती है। इससे पुरुष अथवा स्त्री के आंतरिक व्यक्तित्व भौतिकता, धर्म, ऋद्धि-सिद्धि आदि के बारे में विचार किया जाता है। विवाह रेखा: यह बुध पर्वत क्षेत्र में होती है और आड़ी होती है। इससे विवाह के समय, वैवाहिक जीवन तथा जीवन साथी के बारे में विचार किया जाता है। मणिबंध रेखाएं: ये कलाई में पाई जाती हैं। इन रेखाओं को अन्य रेखाओं के साथ विश्लेषण कर उन्नति, भाग्यवृद्धि, विदेश यात्रा आदि का विचार किया जाता है।



हस्तरेखा एवं मुखाकृति विशेषांक   जनवरी 2008

हस्तरेखा विज्ञान का इतिहास एवं परिचय, हस्तरेखा शास्त्र के सिद्धांत एवं नियम, हस्तरेखा विश्लेषण की विधि, हस्तरेखा एवं ज्योतिष का संबंध, मुखाकृति विज्ञान क्या हैं? मुखाकृति विज्ञान से जातक का विश्लेषण एवं भविष्य कथन कैसे किया जाएं ? यह विशेषांक कुछ ऐसे ही गूढ़ विषयों पर आधारित है.

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