अंग स्पर्श द्वारा प्रश्न विश्लेषण

अंग स्पर्श द्वारा प्रश्न विश्लेषण  

अंग स्पर्श द्वारा प्रश्न विश्लेषण इं. उपेंद्र कुमार शर्मा परिस्थिति और जातक के शरीर की भाव भंगिमा, उसके अपने अंग स्पर्श आदि से उसके प्रश्न व उत्तर की जानकारी मिलती है। इसमें किसी प्रकार की गणना नहीं होती। परिस्थितियों के अनुसार ही प्रश्न का उत्तर कहा जाता है। ज्योतिषीगण अपने और जातक के अंगों को प्रकृति की घटनाओं को जोड़कर विश्लेषण और गंभीरता पूर्वक सोच विचार कर फलकथन कर सकते हैं। पहले फल कथन का स्थान कैसा हो इस पर विचार करें। जो स्थान सुंदर फल-फूलों, वृक्षों से भरा हो, जहां, चारो तरफ हरियाली हो, जहां सुंदर पक्षी चहचहाते हों, जहां देवता ऋऋि मुनियों, सिद्धों और गुणी जनों का वास हो, जो धन-धान्य से परिपूर्ण हो। उस, स्वादिष्ट जल की निर्मल धारा बहती हो। वह फल कथन के लिए शुभ होता है। इसके विपरीत जहां कीड़ों के खाएं हुए कांटेदार, जले हुए टेढ़े मेढे वृक्ष हों, जो क्रूर पक्षियों से घिरा हो, जहां बुरे नाम वाले दुबले वृक्ष लगे हों और भूमि बंजर व सूखी हो वहां फलकथन करना अशुभ है। इसी प्रकार जिस स्थान पर मशान, चैराहा, सूना मकान, कोयला, मनुष्य की खोपड़ियां, सूखी घास आदि हों वह भी शुभ नहीं होता। साथ ही वह जहां मद्य एवं आयुध की बिक्री होती हो और जहां पीड़ित लोगों का वास हो वह स्थान भी शुभ नहीं होता। अब दिशाओं पर विचार करें। पूर्व और उत्तर दिशाएं व ईशान कोण प्रश्न करने के लिए उत्तम होते हंै। वायव्य, पश्चिम व दक्षिण दिशाएं और नै्र्रत्य कोण शुभ नहीं होते। रात्रिकाल, सुबह, शाम और अपराह्न में प्रश्न करना शुभ नहीं होता। उरु, होठ, स्तन, अंडकोष, पांव, दांत, भुजाएं, हाथ, कपोल, केश, गला, नख, अंगूठे, शंख, कंधा, कान, गुदाएं, जोड़ के स्थान ये सभी पुरुष संज्ञक हैं। भौं, नासिका, कमर का मांस पिंड, कमर और सुंदर रेखा वाली उंगलियां स्त्री संज्ञक हैं। जीभ, गर्दन, पिंडिका, पिंडलियां, एड़ियां, जांघ, नाभि, कर्णपाली, चोटी, वदन, पीठ, हंसली, जानू अस्थिपाश्र्व, हृदय, तालू, नेत्र, लिंग, कमर के नीचे की तनी हड्डिियां, मस्तक और ललाट ये अंग नपुंसक संज्ञक हैं। अंग स्पर्श के समाधान मुखादि छूए तो - विलंब से सिद्धि। रूखे, क्षत विक्षत या नपुंसक अंगों को छूने से सिद्धि कदापि नहीं। पुरुष या स्त्री संज्ञक संुदर अंगों को छूने से संबंधित कार्य का लाभ मिलता है। जातक की वाणी भी अपना प्रभाव रखती है। विद्वान उस भाषा व उसमें झलकने वाले आत्मविश्वास से अनुमान लगाते हैं। पांव का अंगूठा छूना या हिलाना नेत्र रोग का सूचक है। उंगुली को आघात करे - बेटी का शोक। सिर पर आघात करे - वृषभय छाती को छूए - प्रिय वियोग। अंग से वस्त्र उतार दे - प्रिय वियोग। वस्त्र पहन कर पीछे हटे - प्यारी वस्तु की प्राप्ति। धरती को पांव से कुरेदे - खेती की चिंता। दोनों पैरों को खुजलाए - नौकर, दासी या सेवक की चिंता। प्रश्न के समय वस्तुओं को देखने से भी जानकारी मिलती है। भोजपत्र, केश या अस्थि देखने पर- वस्त्र की चिंता। रस्सी का जाल देखने पर - रोग हो। छाल या वल्कल देखने पर - बंधन होता है। पीपल, मिर्च, सौंठ या मोथा देखने से - स्त्रीदोष, पुरुषदोष या नाश। लोंग, कूट, वस्त्र, जीरा, - पीड़ित, नाश, सत्यानाश। हाथ में बड, महुआ, तेंदु, जामुन, पीपलखन, आम, बेर या जायफल हो तो धन, स्वर्ण, पुरुष, लोहे, वस्त्र, चांदी, तांबे की प्राप्ति होती है। धान्य से भरा पात्र या भरे हुए घड़े को देखने पर कुटुंब बढ़ता है। हाथी की लीद, गाय का गोबर, कुत्ते की विष्ठा देखने पर - धन, युवती और सुहृदों के विनाश का प्रश्न होता है। पशु, हाथी, महिष, पंकज, चांदी और व्याघ्र को देखने पर मेष, धन, भेड़ या भेड के कंबल, चंदन, रेशमी वस्त्र और गहनों के लाभ की चिंता होती है। वृद्ध संन्यासी का दर्शन हों तो धूर्त, मित्र व धन की चिंता होती है। युवा संन्यासी के दर्शन हों तो वेश्या, राजा, बच्चा और धन की चिंता होती है। शाक्य, उपाध्याय, निग्र्रन्थ, निमित्र, निगम और धीवर देखने पर चोर, सेनापति, वापिका, दुकानदारी के द्रव्य व वध संबंधी चिंता जाननी चाहिए। तापस या कपाल देखने पर विदेश गए हुए मनुष्य की चिंता, पशुपालन की चिंता होती है। भूमि पर गिरे अन्न को इकट्ठा करने वाला मुनि दिखाई दे तो विपत्ति पड़ने की चिंता होती है। वाणी द्वारा कथन मैं पूछने की इच्छा करता हूं, कहिए, या दर्शन कीजिये या आप आज्ञा दीजिये ऐसा कहने पर कुटुंब से मिले लाभ और धन की चिंता होती है। भली भांति से विचार कर मेरा मनोरथ कहिए कहने पर जय व मार्ग की चिंता होती है। आप शीघ्र ही देखिए कहने पर बंधु और चिंता। अंग स्पर्श भीतर का अंग स्पर्श करे - स्वजन की चिंता। बाहर का अंग स्पर्श करे - बाहर के मनुष्य की चिंता। पांव, अंगूठा या पांव की उंगलियां छूए - दास व दासी की चिंता। जंघा के स्पर्श से - प्रेक्षणीय पुरुष। नाभि के स्पर्श से - भार्या की चिंता। हाथ के अंगूठे या उंगली के स्पर्श से - पुत्र व कन्या की चिंता। पेट का स्पर्श करे - माता की चिंता। मस्तक के स्पर्श से - गुप्त। दायां या बायां हाथ छूने से - भ्राता या भार्या को चोरी की समस्या। बाहरी अंगों को छूए, शरीर को बहुत झुकाए, आलस्य में आ कर तोड़े, किसी मनुष्य के हाथ में खाली बर्तन देखे, चोर को देखे एवं प्रश्न के समय हर लिया, गिर गया, कट गया, भूल गया, नष्ट हो गया, टूट गया, चोरी गया, मर गया जैसे शब्द सुने तो चोरी गई वस्तु नहीं मिलती। भुस, हड्डी, विष देखने के साथ रोने या छींकने की स्थिति हो तो रोगी का मरण होता है। भोजन संबंधी प्रश्न भीतर के अंगों को छू कर श्वास ले तो समझना चाहिए कि भोजन करने वाला तृप्त हो रहा है। माथे को स्पर्श करे, शूक धान्य का दर्शन करे - इसे चावल खाया है। छाती का स्पर्श करे - विवाह का अन्न खाया है। गर्दन स्पर्श करे - जौ का अन्न। कोख, स्तन, उदर, जांघ को छूना - उरद, दूध, तिल, दाल का भोजन करने का संकेत देता। दोनों होठों को चाटना - मधुर पान करने का सूचक। जीभ से होठों के स्थान को चाटे व बदन को सिकोडे़ तो समझना चाहिए कि खट्टा खाया है। हिचकी उत्पन्न हो तो गर्म पदार्थ खाया है। थूकना सैंधा नमक खाने का सूचक है। प्रश्न के समय कफ त्याग करे तो समझना चाहिए कि सूखा व तीखा पदार्थ खाया है। मांस खाने वाले पक्षी को देखे या उसका नाम सुने - मांस मिला अन्न खाया है। गाल व होठ का स्पर्श पक्षी के मांस खाने का सूचक है। मस्तक, गले, ठोड़ी, केश, कनपटी, जांघ का स्पर्श जानवरों के मांस खाने का सूचक है। दुष्ट शकुन दर्शन व श्रवण करने से मछली का मांस खाया है। गर्भ से संबंधित प्रश्न पान, पुष्प या अन्न का दर्शन शुभ है। अंगूठे से उदर या उंगली स्पर्श करके पूछे तो पूछने वालो को गर्भ की चिंता समझनी चाहिए। शहद, घी आदि व स्वर्ण, रत्न मूंगा, माता, भाई, पुत्र आगे खड़े दिखाई दंे तो - गर्भ की चिंता को प्रमाद करते हैं। पेट पर हाथ रखे या स्पर्श करे तो समझना चाहिए कि स्त्री गर्भिणी है। दुष्ट निमित्त दिखाई देने से गर्भ नाश होता है। पेट को दबा कर, हाथ से हाथ मिला कर प्रश्न करे तो गर्भ का नाश समझना चाहिए। स्त्री यदि दायें नासाछिद्र का स्पर्श करे तो एक मास के बाद गर्भ धारण होगा। वाम नासिका या बायंे हाथ का स्पर्श करे तो चार मास के बाद गर्भ धारण होगा। संतान प्रश्न कान का स्पर्श करे - पांच पुत्र। हाथ का स्पर्श करे - तीन पुत्र। पाव, अंगूठे या दोनों एडियों का स्पर्श करे तो एक कन्या होती है। छोटी उंगली का स्पर्श करे तो पांच कन्याएं होती हैं। अनामिका के स्पर्श से चार कन्याएं होती हैं। मध्यमा के स्पर्श से तीन कन्याएं होती हैं। तर्जनी का स्पर्श दो कन्याओं का सूचक है। दायीं छाती के स्पर्श से चार कन्याएं होती हैं। माथे के शेष भाग का स्पर्श करे तो तीन कन्याएं जन्म लेती हैं। माथा, ललाट, भौं, कानों, गाल, टोड़ी, दांतों, गले, दायें और बायें कंधों, दोनों हाथों, बाल, उदर, कुंचों, हृदय दोनों पाश्र्वों, जठर, कमर, स्फिक, कमर के मांसद्ध, गुदा, सांधी, उरुयुगल, दोनों जानुआंे दोनों छावों और दोनों पांवों में कमानुसार कृतिका से लकर सब नक्षत्र विराजमान है। कालपुरुष की राशियों को अंग स्पर्श से लग्न मानकर भी प्रश्न का उत्तर देने की प्रथा है। अंग विद्या के साथ शकुन, पंचपक्षी व स्वर विज्ञान की सहायता से जातक के प्रश्नों के सटीक उत्तर दिए जा सकते हैं।



हस्तरेखा एवं मुखाकृति विशेषांक   जनवरी 2008

हस्तरेखा विज्ञान का इतिहास एवं परिचय, हस्तरेखा शास्त्र के सिद्धांत एवं नियम, हस्तरेखा विश्लेषण की विधि, हस्तरेखा एवं ज्योतिष का संबंध, मुखाकृति विज्ञान क्या हैं? मुखाकृति विज्ञान से जातक का विश्लेषण एवं भविष्य कथन कैसे किया जाएं ? यह विशेषांक कुछ ऐसे ही गूढ़ विषयों पर आधारित है.

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