हस्त रेखा अध्ययन के सामान्य सिद्धांत

हस्त रेखा अध्ययन के सामान्य सिद्धांत  

हस्तरेखा अध्ययन के सामान्य सिद्धांत विजय कुमार अगर किसी रेखा के साथ-साथ कोई और रेखा चले तो उस रेखा को शक्ति मिलती है। अतः उस रेखा का विशेष प्रभाव समझना चाहिए। कमजोर, दुर्बल अथवा मुर्झाई हुई रेखाएं बाधाओं की सूचक होती हैं। स अस्पष्ट और क्षीण रेखाएं बाधाओं की पूर्व सूचना देती हैं। ऐसी रेखाएं मन के अस्थिर होने तथा परेशानी का संकेत देती हैं। स अगर कोई रेखा अपने आखरी सिरे पर जाकर कई भागों में बंट जाए तो उसका फल भी बदल जाता है। ऐसी रेखा को प्रतिकूल फलदायी समझा जाता है। स अगर किसी रेखा में से कोई रेखा निकलकर ऊपर की ओर बढ़े तो उस रेखा के फल में वृद्धि होती है। स टूटी हुई रेखाएं अशुभ फल प्रदान करती हैं। स अगर कोई रेखा निर्बल, कमजोर तथा अधिक सूक्ष्म हो तो ऐसी रेखा का प्रभाव गौण होता है अथवा यह प्रभावहीन होती है। स यदि किसी रेखा के मार्ग में वर्ग हो तो इससे उस रेखा को बल मिलता है और वह शुभ फल प्रदान करती है। स किसी रेखा के मार्ग में द्वीप या कोई अन्य चिह्न शुभ नहीं होता। स अगर किसी रेखा के ऊपर त्रिकोण का निशान हो तो उस रेखा से संबंधित कार्य शीघ्र होने की संभावना रहती है। स रेखाओं पर तारा कार्य में शीघ्र सफलता का सूचक होता है। स रेखाओं पर तिरछी रेखाएं हानिकारक होती हैं। स पतली रेखाएं श्रेष्ठ फल देने में सक्षम होती हैं। वहीं मोटी रेखाएं व्यक्ति की दुर्बलता का संकेत देती हैं। स अगर कोई रेखा गहरी हो, चलते-चलते बीच में रुक जाए, अस्पष्ट हो तो दुर्घटना का संकेत देती है। स ढलवां रेखाएं व्यक्ति के परिश्रम को तो स्पष्ट करती हैं परंतु उसके फल का संकेत नहीं देतीं। ऐसी रेखाओं से शुभ फल मिलने में संदेह रहता है। स अगर किसी रेखा में से कोई रेखा निकल कर नीचे की ओर जाए या नीचे की ओर झुके तो उसका फल प्रतिकूल होता है या कमी आती है। इसके विपरीत ऐसी कोई रेखा ऊपर की ओर जाए तो फल में वृद्धि होती है। स जंजीरनुमा रेखा अशुभ फल देती है। स यदि विवाह रेखा, जो बुध पर्वत पर होती है, जंजीरनुमा हो तो प्रेम प्यार में असफलता का मुंह देखना पड़ता है। स यदि मस्तिष्क रेखा जंजीरनुमा हो तो व्यक्ति अस्थिर बुद्धि वाला अथवा पागल हो सकता है। स लहरदार रेखा अशुभ मानी गई है। ऐसी रेखाएं शुभ फल प्रदान नहीं करती हैं। स रेखा अगर कहीं पतली और कहीं मोटी हो तो रेखा अशुभ होती है। ऐसी रेखा वाला व्यक्ति बार-बार धोखा खाता है तथा सफलता-असफलता के बीच झूलता रहता है। स जीवन रेखा के अतिरिक्त यदि कोई अन्य रेखा अपने आखिरी सिरे पर पहुंच कर दो भागों में बंटी हो तो वह अत्यंत प्रभावी तथा श्रेष्ठ फल देने वाली होती है। परंतु यदि हृदय रेखा दो भागों में बंटी हो तो व्यक्ति को हृदय रोग की संभावना रहती है। स यदि प्रणय रेखा से कोई रेखा निकल कर ऊपर की ओर जाए तो प्रेम में सफलता और सुंदर पति अथवा पत्नी की प्राप्ति होती है। परंतु यदि नीचे की ओर रुख करे तो प्रेम में असफलता मिलती तथा पति अथवा पत्नी को अस्वस्थता का सामना करना पड़ता है।



डिप्रेशन रोग एवं ज्योतिष विशेषांक  September 2017

डिप्रेशन रोग एवं ज्योतिष विशेषांक में डिप्रेशन रोग के ज्योतिषीय योगों व कारणों की चर्चा करने हेतु विभिन्न ज्ञानवर्धक लेख व विचार गोष्ठी को सम्मिलित किया गया है। इस अंक की सत्य कथा विशेष रोचक है। वास्तु परिचर्चा और पावन तीर्थ स्थल यात्रा वर्णन सभी को पसंद आएगा। टैरो स्तम्भ में माइनर अर्कानाफाइव आॅफ वांड्स 64 की चर्चा की गई है। महिलाओं के पसंदीदा स्तम्भ ज्योतिष एवं महिलाएं में इस बार भी रोचक लेख सम्मिलित किया गया है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.