जीवन के उत्तरकाल में धन-प्राप्ति के योग

जीवन के उत्तरकाल में धन-प्राप्ति के योग  

व्यूस : 2349 | जनवरी 2006

कई ऐसे लोगों के किस्से मौजूद हैं जो बचपन से लेकर जवानी एवं प्रौढ़ावस्था तक आर्थिक संकटों से जूझते रहे, तमाम उम्र कड़ी मेहनत करने के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर ही बनी रही। एकाएक बुढ़ापे में उन्हें अकूत धन-संपदा प्राप्त हो गयी और उनका शेष जीवन सुखमय व्यतीत होने लगा। हस्त रेखाओं का सूक्ष्म निरीक्षण और विश्लेषण करने के पश्चात कुछ तथ्य सामने आते हैं जिनसे यह स्पष्ट होता है कि उनकी हथेलियों में कुछ ऐसे योग हैं जो जीवन के उत्तर काल में ही फलित होकर लक्ष्मी प्राप्ति के कारण बनते हैं। ऐसे ही कुछ योगों की चर्चा करते हैं:

1. यदि जीवन रेखा एवं मस्तिष्क रेखा को आड़ी-तिरछी रेखाएं काटती हांे और मस्तिष्क रेखा में भी अस्पष्टता हो तो लगभग 45 वर्ष के पश्चात ही धन प्राप्ति के योग बनते हैं।

2. मस्तिष्क रेखा में भाग्य रेखा रुकती हो, शुक्र उन्नत हो और हाथ नर्म हो तो प्रौढ़ावस्था के बाद ही धनागम का योग होता है।

3. गुरु की स्थिति उत्तम हो, शनि का क्षेत्र भी अच्छा हो, जीवन रेखा के आरंभ में दोष हो जैसे सिमटी हुई, मोटापन और साथ-साथ कोई अन्य रेखा हो जो सिमटी हो, तो ऐसे जातकों का भाग्योदय अथवा धनागम का योग वृद्धावस्था में होता है।

4. यदि हाथ में भाग्य रेखा मोटी से पतली हो, हाथ भारी हो तो जीवन के उत्तरार्द्ध में धन प्राप्ति के योग होते हैं।

5. यदि भाग्य रेखा आगे चलकर साफ सुथरी हो जाती है तो जीवन के उत्तरार्द्ध में धन प्राप्ति के योग होते हैं। इस प्रकार यदि किसी व्यक्ति के हाथ में वृद्धावस्था में धन प्राप्ति के उपर्युक्त योग हैं तो निःसंदेह उसे कभी न कभी इसके परिणामस्वरूप धन की प्राप्ति अवश्य होगी। किंतु इन लक्षणों के अतिरिक्त पूरे हाथ का सूक्ष्म निरीक्षण भी कर लेना अति आवश्यक है क्योंकि कभी-कभी कुछ ऐसी भी सूक्ष्म रेखाएं देखने में आती हैं जो किसी विशेष योग का प्रभाव कम कर देती हैं। अतः कुशल एवं अनुभवी हस्त रेखा विशेषज्ञ से परामर्श कर लेना चाहिए।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

घरेलू टोटके विशेषांक  जनवरी 2006

मनुष्य का जन्म स्वतन्त्र हुआ है किन्तु वह हर जगह शृंखला में आबद्ध है। मनुष्य अपने हर जन्म में अपने कर्मों के अनुरूप नकारात्मकता अथवा सकारात्मकता के कारण वर्तमान जीवन में अच्छे या बुरे दिन देखता है। पीड़ा की मात्रा इन्हीं कर्मों के संचय के आधार पर अलग-अलग होती है। इनका प्राकट्य जन्म के समय कुण्डली में होता है जब नौ ग्रह उसके कर्मों के अनुरूप अलग-अलग भावों में स्थान ग्रहण करते हैं। इसके अलावा दशाओं के क्रम भी भावी जीवन की आधारशिला रखते हैं। यदि दशाओं का क्रम अच्छा होता है तो जातक को जीवन में सुख एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है अन्यथा वह दुख झेलने को बाध्य होता है। ज्योतिष में विभिन्न प्रकार की पीड़ा से मुक्ति हेतु अनेक उपायों की चर्चा की गई है। इन्हीं उपायों में से एक महत्वपूर्ण उपाय है टोटका। फ्यूचर समाचार के इस महत्वपूर्ण विशेषांक में विभिन्न प्रकार की समस्याओं से मुक्ति पाने हेतु सामान्य, सरल एवं घरेलू टोटकों से सम्बन्धित महत्वपूर्ण आलेख समाविष्ट हैं। इन महत्वपूर्ण टोटके के आलेखों में से धन लाभ एवं खुशहाली हेतु, कर्ज से मुक्ति और धन वापसी, मानसिक तनाव दूर करने के लिए, परीक्षा में सफल होने के लिए, शीघ्र विवाह के लिए, सन्तान प्राप्ति के लिए टोटके आदि लेख सम्मिलित हैं।

सब्सक्राइब


.