मोक्षदायिनी नगरी काशी

मोक्षदायिनी नगरी काशी  

मोक्ष दायिनी नगरीवाराणसी(काशी) फ्यूचर पॉइंट के सौजन्य से विश्वेशं माघवं ढुुष्ढिं दण्डपाणिं व भैरवम। वंदे काशीं गुुह्यां गंगां भवानीं मणिकर्णिकाम॥ वाराणसी भारतवर्ष के अत्यंत पावन स्थलो में से एक है। वाराणसी का प्राचीन नाम काशी है। बड़ी प्राचीन मान्यता है कि 'काश्यां मरणान्नमुक्तिः' अर्थात काशी में मरण होने से मुक्ति हो जाती है। अनेक संत-महात्मा इसी कारण वाराणसी में शरीर त्याग करना चाहते हैं। वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री हरिबाबा जी ने काशी जा कर ही शरीर त्याग किया था। वाराणसी के विषय में प्रसिद्ध है कि भगवान शंकर मरण के समय व्यक्ति को तारक मंत्र 'राम' नाम का उपदेश देते हैं, जिसके प्रभाव से व्यक्ति की मुक्ति हो जाती है। काशी का तो कंकर- कंकर शंकर है। भगवान शिव वाराणसी में ही वास करते हैं। वाराणसी बड़ी पवित्र, आध्यात्मिक, ज्ञान, भुक्ति की नगरी है। यहां सबसे विशिष्ट बात यह है कि भारतवर्ष में प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक ज्योतिर्लिंग यहां है। 'वाराणस्या तु विश्वेशं'। वाराणसी में विश्वनाथ जी स्थित हैं। इसी कारण वाराणसी की विश्वव्यापी खयाति है। वैसे तो वाराणसी में असीमित मंदिर हैं, परंतु यहां कुछ विशिष्ट मंदिरों का वर्णन किया जा रहा है : काशी विश्वनाथ मंदिर : वाराणसी स्थित यह मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक होने के कारण विश्वविखयात है। इस मंदिर की महिमा काशी में सर्वाधिक है। श्रावण मास में, महाशिव रात्रि पर, यहां रुद्राभिषेक बड़े रूप में होता है। यहां प्रसाद के रूप में बाबा विश्वनाथ की विभूति प्राप्त होती है। भक्त लोग यहां भांग-धतूरा चढ़ा कर भी भोलेनाथ जी को प्रसन्न करते हैं। यहां का मंदिर प्रांगण काफी बड़ा है। वहां पंडितों के द्वारा रुद्रीपाठ, अभिषेक आदि की व्यवस्था श्रद्धालु भक्तों के लिए हो जाती है। भक्त लोग यहां दर्शन कर के पुण्य लाभ करते हैं। संकटमोचन मंदिर : वाराणसी स्थित संकटमोचन श्री हनुमान जी का मंदिर है। इस मंदिर की बड़ी महिमा है। यहां हनुमान जी का चोला चढ़ता है। लड्डू -चूरमा का भोग लगता है। नाम के अनुरूप ही यहां श्री हनुमान जी भक्तों के संकट को तत्काल दूर करते हैं। जो भी तीर्थ यात्री, भक्त, श्रद्धालु वाराणसी जाता है, वह संकटमोचन मंदिर का अवश्यमेव दर्शन करता है। भैरव मंदिर : काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही, अंदर गलियों में, काल भैरव मंदिर है। शहर (वाराणसी) कोतवाल के रूप में इस भैरव की खयाति है। वह वाराणसी के कोतवाल हैं। अतः इन्हें सभी प्रणाम करते हैं। यहां की बड़ी महिमा है। यहां तेल का दीपक जलता रहता है। नजर, टोने, टोटके के निवारण के लिए यहांसे लाल भैरव जी का सिद्ध यंत्र भी प्राप्त होता है, जिसके धारण करने से सभी आपदाएं दूर होती हैं। दुष्टिराज गणेश मंदिर : काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही दुष्टिराज गणेश मंदिर है। इसकी काशी में बड़ी महिमा है। यह दुष्टि गणेश के नाम से विखयात है। इसके दर्शन से भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति हो जाती है। भवानी मंदिर : भगवती जगदंबा का विशाल सर्वप्रसिद्ध मंदिर काशी में है। यह भवानी मंदिर बड़ा चमत्कारिक है। इसकी अमोघ महिमा है। तीर्थाटन करने वाले समस्त श्रद्धालु यहां दर्शनार्थ अवश्य आते हैं। इसके अलावा वाराणसी में रामचरितमानस मंदिर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित महादेव जी का मंदिर बड़े भव्य एवं आकर्षक हैं, जिनके दर्शनार्थ श्रद्धालुओं को जाना चाहिए। गंगा जी के किनारे वाराणसी में अनेक घाट भी हैं, जिनमें सर्वाधिक प्रसिद्धि मणिकर्णिका घाट की है। यहां सदा ही किसी न किसी मुर्दे का अंतिम संस्कार होता रहता है। वाराणसी में सिद्ध संतों के आश्रम भी हैं। स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा स्थापित आश्रम विद्यालय भी यहां है। वाराणसी विश्वविखयात दर्शनीय पावन भूमि है।


नजर व बंधन दोष मुक्ति विशेषांक  मार्च 2010

नजरदोष के लक्षण, बचाव व उतारने के उपाय, ऊपरी बाधा की पहचान, कारण व निवारण, नजरदोष का वैज्ञानिक आधार तथा नजर दोष निवारक मंत्र व यंत्र आदि विषयों की जानकारी प्राप्त करने हेतु यह विशेषांक अत्यंत उपयोगी है। इस विशेषांक में महान आध्यात्मिक नेता आचार्य रजनीश की जन्मकुंडली का विश्लेषण भी किया गया है। इसके विविधा नामक स्तंभ में ÷हस्ताक्षर विज्ञान द्वारा रोगों का उपचार' नामक लेख उल्लेखनीय है।

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