लियो पाम में पंचांग पिछले अंक में आपने लियोपाम के नवीनीकरण के बारे में पढ़ा होगा। जैसा कि उसमें बताया गया था, लियो पाम कंप्यूटर ज्योतिष साॅफ्टवेयर अब उन सभी मोबाइल फोनों में चलाया जा सकेगा जिनमें आॅपरेटिंग सिस्टम विंडोज़ मोबाइल हो। पंचांग लियो पाम में पंचांग साॅफ्टवेयर का एक भाग है जिसके द्वारा आप किसी भी दिन का पंचांग ज्ञात कर सकते हैं। सामान्यतः अलग-अलग स्थानों के अलग-अलग पंचांग बनाए जाते हैं, जिनमें स्थानीय समय के अनुसार तिथि, ग्रह, नक्षत्र, राशि प्रवेश आदि का समय दिया गया होता है। यदि कोई व्यक्ति ऐसे स्थान का पंचांग जानना चाहता हो जहां से कोई पंचांग न निकलता हो, तो उसे मानवीय गणना करनी पड़ती है, जिसमें त्रुटि की संभावना रह जाती है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक वर्ष के लिए अलग पंचांग रखना होता है। यदि किसी व्यक्ति को 50 वर्ष पूर्व का पंचांग देखना हो, तो 50 वर्ष पूर्व रखे हुए पंचांग को देखना पड़ता है। इस प्रकार इसके रख-रखाव पर भी ध्यान देना होता है। लियो पाम में आप किसी भी वर्ष का, किसी भी स्थान का पंचांग एक बटन दबाने से देख सकते हैं। इसके अलावा यदि आप चाहें, तो प्रत्येक दिन का पंचांग पूरे वर्ष के लिए, पूरे मास के लिए या एक सप्ताह के लिए भी सामान्यतः ज्योतिषी को अपने विषय का संपूर्ण ज्ञान कंठस्थ होता है। परंतु फिर भी कभी-कभी ऐसा अवसर आता है, जब हमें पुस्तक को देखने की आवश्यकता पड़ जाती है। परंतु यदि कभी आप यात्रा में हैं या कार्यालय में हैं तो आवश्यक नहीं है कि संबंधित पुस्तक आपके पास उपलब्ध हो। ऐसी स्थिति में सारणी की उपलब्धता की आवश्यकता महसूस होती है। इसी विचार को ध्यान में रखते हुए पंचांग के अंतर्गत सारणियों का भी प्रावधान किया गया है। इसमें एक बटन दबाते ही आप मूलभूत आवश्यकता की सारणियां तुरंत देख सकते हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की सारणियां उपलब्ध हैं। जैसे ग्रह से संबंधित रत्न, उनकी उच्च-नीच स्थिति, कारक, मंत्र, मित्र और शत्रु आदि। इसी प्रकार भाव से संबंधित कारक, कारकत्व एवं भावों की संज्ञा की जानकारी उपलब्ध है। साथ ही राशि से संबंधित उनके स्वामी, वर्ण, तत्व, वश्य, पाया आदि की सारणियां भी दी गई हैं। नक्षत्र के स्वामी, गण, योनि, नाड़ी, युन्जा, पाया और संबंधित नामाक्षरों की सूची भी दी गई है। योग से संबंधित उनके स्वामी तथा शुभता व अशुभता की सूची भी उपलब्ध है। करण की सूची उनके स्वामी तथा शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष के करणों के नाम तिथियों के आधार पर दिए गए हैं। अवकहड़ा में भाव, राशि, नक्षत्र, योग, करण, योनि, गण, नाड़ी, वर्ण, वश्य, युन्जा, हंसक, पाया, ऋतु और माह की सूची दी गई है। इसके पश्चात कौन सा योग किन-किन नियमों के आधार पर बनता है इसकी जानकारी सूचीबद्ध की गई है। इनमें निम्नलिखित योगों की जानकारी दी गई है - सर्वार्थसिद्धि योग, अमृत योग, त्रिपुष्कर योग, द्विपुष्कर योग, मृत्यु योग, काल योग, दग्ध योग, विष योग, हुताशन योग तथा यमघंटक योग। कुंडली मिलान के लिए अष्टकूट गुणों की सभी सारणियां जैसे वर्ण, वश्य, तारा, योनि, मैत्री, गण और भकूट के आधार पर अष्टकूट गुण प्रदान किए जाते हैं। इन सबकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। प्रत्येक वार के आधार पर सामान्यतः राहु काल की अवधि क्या होगी इसे सारणीबद्ध किया गया है। पंचांग में सारणियों के साथ ही अंकशास्त्र का भी समावेश किया गया है। इसमें अंग्रेजी के अक्षरों से संबंधित अंकों की सूची, अंकों के स्वामी, संबंधित शत्रु, मित्र एवं सम अंकों की जानकारी अनुकूल दिन, मास, तिथि, रत्न, उपरत्न, धातु एवं रंग आदि सारणी के रूप में दिए गए हैं। पंचांग कई बार जन्मकुंडली बनाने के लिए जातक की जन्म तिथि या समय अंग्रेजी में उपलब्ध नहीं होता है, परंतु हिन्दी का संवत, तिथि, नक्षत्र या राशि उपलब्ध होती है। ऐसी स्थिति में संवत, तिथि या नक्षत्र ज्ञात करके जातक की अंग्रेजी जन्म तिथि निकाली जा सकती है। साथ ही किसी विशेष दिन का पूरा पंचांग भी देखना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक दिन में तिथि का समाप्ति काल, नक्षत्र का समाप्ति काल, चंद्र राशि प्रवेश, योग समाप्ति काल, करण समाप्ति काल, सूर्योदय और सूर्यास्त आदि की जानकारी की आवश्यकता होती है। यह सब आप कोई भी अंग्रेजी तिथि डालकर एक बटन दबाकर देख सकते हैं। इसके अंतर्गत दी गई तिथि के लिए संपूर्ण पंचांग जैसे विक्रमी संवत, शक संवत, मास, पक्ष, तिथि, तिथि का समाप्ति काल, सूर्योदय, सूर्यास्त, दिनमान, वार, चंद्रोदय, चंद्रास्त, नक्षत्र, नक्षत्र का समाप्ति काल, योग, योग का समाप्ति काल, करण, करण का समाप्ति काल, राशि, राशि प्रवेश का समय तथा पंचक आदि की जानकारी दी गई है। इतना ही नहीं, यदि आप इससे अगले या पिछले दिनों के पंचांग की जानकारी चाहते हैं, तो एक बटन को दबाकर उपर्युक्त सभी जानकारी एक ही स्क्रीन पर देख सकते हैं। यह स्क्रीन दैनिक, मासिक और वार्षिक आधार पर परिवर्तित की जाती है। प्रत्येक दिन का वार, सूर्योदय काल तथा सूर्यास्त का समय एक सारणी के रूप में देखा जा सकता है। एक ही स्क्रीन पर आप दस दिन का विवरण एक साथ देख सकते हैं। इस स्क्रीन को मासिक तथा वार्षिक आधार पर आगे या पीछे किया जा सकता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समान ही चंद्रोदय और चंद्रास्त की सारणी देखी जा सकती है। तिथि के अंतर्गत वार, मास, पक्ष, तिथि एवं तिथि का समाप्ति काल ये सब सारणीबद्ध हैं, जिन्हें दैनिक, मासिक और वार्षिक आधार पर परिवर्तित किया जा सकता है। इसी तरह नक्षत्र, योग, करण, राशि, सूर्य राशि, सूर्य नक्षत्र आदि की सारणी को दैनिक, मासिक और वार्षिक आधार पर देखा जा सकता है। एफेमेरिस सामान्यतः प्रत्येक वर्ष के लिए एक एफेमेरिस प्रकाशित की जाती है, जो पिछले या वर्तमान वर्ष की होती है। यदि आपको आने वाले वर्षों की विस्तृत एफेमेरिस की आवश्यकता हो, तो आपको उस वर्ष की सूक्ष्म जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती है। ऐसे में जो भी सारणियां उपलब्ध होती हैं, वे संक्षिप्त होती हैं चाहे वे गत वर्ष की हों या आगामी वर्ष की। विस्तृत एफेमेरिस सिर्फ एक ही वर्ष की प्राप्त हो पाती है। परंतु लियो पाम में यह सुविधा उपलब्ध है कि आप किसी भी ग्रह की या सभी ग्रहों की सूक्ष्मतम जानकारी चरणबद्ध तरीके से तथा स्पष्ट रूप से प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप चाहें तो ग्रहों के अंशों को मिनट तक की सटीकता में प्राप्त कर सकते हैं या चाहें तो ग्रहों के अंशों को सेकेंड की सटीकता में भी प्राप्त किया जा सकता है। इसकी गणना की शुद्धि सेकेंड तक उपलब्ध है। इसके अंतर्गत ग्रहों की राशि, ग्रह स्पष्ट, नक्षत्रों, नक्षत्रों की संख्या, नक्षत्रों के चरणों तथा नक्षत्र के उपस्वामियों को सारणीबद्ध करके दिखाया गया है। इस सारणी को दैनिक, मासिक और वार्षिक आधार पर स्क्रीन परिवर्तित करके देखा जा सकता है। इन सारणियों को सभी ग्रह एक साथ करके भी देख सकते हैं या प्रत्येक ग्रह के लिए अलग-अलग करके भी देखा जा सकता है। यह सभी जानकारी भिन्न-भिन्न अयनांशों पर परिवर्तित करके भी प्राप्त की जा सकती है। लग्न सारणी जब कभी किसी कार्य विशेष के लिए स्थिर लग्न या चर लग्न की आवश्यकता होती है, तो हमें प्रत्येक लग्न का प्रारंभ एवं समाप्ति काल जानना आवश्यक होता है। ऐसी स्थिति में लियो पाम-पंचांग का यह भाग हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी है। इसके अंतर्गत प्रत्येक दिन के लिए द्वादश लग्नों का प्रारंभ एवं समाप्ति काल सारणी के रूप में दिखाया गया है। एक स्क्रीन पर तीन दिनों की जानकारी दी गई है तथा इन स्क्रीनों को दैनिक, मासिक और वार्षिक आधार पर परिवर्तित करके देखा जा सकता है।


पंचांग विशेषांक   अप्रैल 2010

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अंतर्गत तीर्थराज कैलाश मानसरोवर का रोचक वर्णन किया गया है।

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