कक्षों की स्थिति व आंतरिक संरचना

कक्षों की स्थिति व आंतरिक संरचना  

व्यूस : 7012 | अप्रैल 2010

वास्तुशास्त्र में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नल, बोरिंग, कुआं, भूमिगत टंकी व भव के ऊपर की टंकी आदि का विचार किया जाता है। कुआं, बोरिंग व भूमिगत टंकी ब्रह्म स्थान को बचाते हुए उत्तर, पूर्व या ईशान में बना सकते हैं। भवन के ऊपर की टंकी (ओवर हैड वाटर टैंक) भवन के नैत्य में बनाना चाहिए। घर के बाहर से घर में प्रवेद्गा करने वाला जल (सरकारी जल कनेक्शन) ईशान कोण से प्रवेद्गा करे तो अति शुभ है।

जल निष्कासन

जल निष्कासन के लिए भूमि की ढलान उत्तर और पूर्व की ओर शुभ होती है। छत की ढलान ईशान कोण की ओर होनी चाहिए। स्नान गृह व रसोई के पानी की निकासी उत्तर और पूर्व की ओर ही शुभ होती है। यदि सैप्टिक टैंक बनाना आवश्यक हो तो वायव्य में बनाना चाहिए। सैप्टिक टैंक भव की चार दीवारी से सटाकर नहीं बना चाहिए। यदि उत्तर दिशा में बेस मेंट बना हो से कम 5 फीट होना चाहिए।

पूजा घर

पूजा घर के लिए सर्वोत्तम जग ईशान कोण है। ईशान के अतिरिक्त पूर्व उत्तर में भी बनाया जा सकता है। घर के पूजा गृह में 9 इंट से बड़ी मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। घर के मंदिर में दो शिवलिंग, तीन गणेश, दो शंख, दो सूर्य प्रतिमा, तीन देवी प्रतिमा, दो गोमती चक्र व दो शालिग्राम नहीं रखने चाहिए। मंदिर कभी सीढ़ियों के नीचे नहीं बनाना चाहिए। मंदिर व शौचालय की दीवार एक नहीं होनी चाहिए। मंदिर व शौचालय साथ-साथ आमने-सामने नहीं होने चाहिए। पूजा घर की आंतरिक स्थित में देवी-देवताओं के चित्र-उत्त या पूर्व में लगा सकते हैं। गंगा जल या जल पूर्ण कलश ईशान में रख सकते हैं। हवन करते समय हवन कुंड पूजा कक्ष के आग्नेश, में रख सकते हैं। दीपक भी आग्नेय की तरफ रख सकते हैं। पूजा घर में क्रीम, पीला या सफेद रंग करा सकते हैं। खिड़कियां उत्तर व पूर्व में होनी चाहिए। पूजा घर में कभी भी खंडित मूर्तियां न रखें। पूजा घर कभी भी रसोई या शन कक्ष में न बनाएं।

कोषागार

तन को स्वस्थ रखने के लिए रसोई घर का सही दिशा में होना जितना जरूरी है, धन की बढ़ोतरी के लिए कोषागार का सही दिशा में होना भी उतना ही जरूरी है। कोषागार हमेशा घर की उत्तर दिशा में होना चाहिए। उत्तर दिशा में कुबेर देवता का वास होता है। जो कि धन की बढ़ोतरी में सहायता करते हैं। धन रखने की तिजोरी को उत्तर के कमरे में दक्षिण की दीवार के साथ रखें ताकि तिजोरी या अलमारी खोलते समय कुबेर देवता की दृष्टि उस पर पड़े।

रसोई घर

आग्नेय कोण अग्नि संबंधी कार्यों के लिए सर्वोत्तम स्थान है। रसोई घर बनाने की जगह यदि आग्नेय कोण में न बनती हो तो पूर्व में बना सकते हैं।

गृह स्वामी का शयन कक्ष

गृह स्वामी का शयन कक्ष ऐसा महत्वपूर्ण स्थान है जहां रहकर उसे सारे घर की व्यवस्था सुचारु रूप से चलानी है। गृह स्वामी का शयन कक्ष दक्षिण की ओर होना चाहिए।

शयन कक्ष के बारे में कुछ मुखय सुझाव

लगानी चाहिए। कि सोते समय आपके शरीर का कोई भाग शीशे में प्रतिबिंबित न हो।

  • शयन कक्ष के नै त्य, दक्षिण या पश्चिम में अलमारी लगा सकते हैं।
  • कूलर कक्ष के उत्तर या पूर्व में होना चाहिए, अगर ए.सी. (एयर कंडीशनर) लगाना हो तो वायव्य या दक्षिण में लगा सकते हैं।
  • रूम हीटर या हीट कन्वेक्टर कक्ष के आग्नेय कोण में लगाना चाहिए।
  • सोते समय सिर दक्षिण की ओर सर्वोत्तम है पूर्व में भी सिर रखा जा सकता है। उत्तर में सिर करके कभी नहीं सोना चाहिए। पश्चिक में सिर करके सोने से स्वप्न अधिक आते हैं व कई बार डरावने स्वप्न भी आ सकते हैं।
  • पलंग चरमराने वाले नहीं होने चाहिए।
  • शयन कक्ष में जूठे बर्तन व चप्पलों आदि का रैक नहीं होना चाहिए।
  • शयन कक्ष में पति-पत्नी का संयुक्त चित्र होना शुभ होता है।
  • पलंग द्वार के एकदम सामने नहीं होना चाहिए।
  • पलंग के ऊपर कोई बीम आदि नहीं होनी चाहिए।
  • शयन कक्ष दक्षिण में हो तो गुलाबी रंग करवाएं और नैत्य में हो हल्का नीला या हल्का ब्राउन रंग करा सकते हैं।
  • शयन कक्ष में मंदिर नहीं होना चाहिए। यदि इष्टदेव का कोई चित्र लगाना हो तो ईशान में लगा सकते हैं।
  • घड़ी पूर्व या उत्तर की दीवार पर लगाना चाहिए।

बच्चों के कमरे

छोटे बच्चों के कमरे पूर्व व उत्तर दिशा में बना सकते हैं। बड़े बच्चों के कमरे पश्चिम में बना सकते हैं। विवाह योग्य पुत्री का कमरा उत्तर-पश्चिम (वायव्य) में बना सकते हैं इससे उसका विवा ह बिना किसी बाधा के उचित समय पर हो जाएगा।

अध्ययन कक्ष

बच्चों का अध्ययन कक्ष पश्चिम व नैत्य के मध्य में बनाया जाए तो अति उत्तम है। यहां अध्ययन कक्ष होने से बच्चे टिककर बैठेंगे व पढ़ाई में उनका मन लगेगा। यहां जगह न होने पर उत्तर दिशा में भी बना सकते हैं।

अतिथि गृह

अतिथि गृह वायव्य कोण में बनाया जाना चाहिए वायु तत्व की अधिकता के कारण अतिथि वहां ज्यादा दिन टिक नहीं पाएगा। अतिथि को यदि ईशान में बिठा दिया जाए तो उसकी बहुत सेवा करनी पड़ेगी। नैत्य कोण में बिठाने से वह अधिक दिन तक टिकेगा और कई सलाहें देकर जाएगा।

भोजन कक्ष

भोजन कक्ष सबसे उपयुक्त जगह पश्चिम दिशा है। पश्चिम में भोजन कक्ष की जगह उपलब्ध न होने पर आग्नेय के साथ पूर्व व दक्षिण दिशा में भी भोजन कक्ष बना सकते हैं।

बैठक (ड्राइंग रूम)

घर में यदि ब्रह्म स्थान को कवर करना जरूरी हो तो उस स्थान को बैठकर या लाबी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। बैठक के लिए उत्तर , पूर्व व वायव्य दिशा का कमरा भी चूना जा सकता है। यदि ब्रह्म स्थान पर बैठक बनानी हो तो वहां पर भारी फर्नीचर नहीं रखना चाहिए। ईशान कोण में ड्राइंग रूम बनाने से बचना चाहिए।

भंडार गृह

घर में दूध-दही आदि का संग्रह पूर्व और आग्नेय के बीच में करना चाहिए। तेल व घी आदि का संग्रह आग्नेय व दक्षिण के बीच में करना चाहिए। खाने-पीने की अन्य वस्तुओं का संग्रह ईशान और पूर्व के बीच में करना चाहिए। धन संग्रह करने का स्थान उत्तर दिशा में बनाया जाता है। घर का भारी सामान, टं्रक व अलमारियां आदि का स्टोर पश्चिम या नैत्य में होना चाहिए।

शहरी जीवन के संदर्भ में, घर में एक ही स्टोर रूम बनाया जाता है। ऐसी स्थिति में नैत्य कोण उपयुक्त रहेगा। भंडार गृह की आंतरिक संरचना इस प्रकार रखें।

स्नान गृह

स्नान गृह के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पूर्व दिशा है। पूर्व दिशा में स्थान न होने की स्थिति में उत्तर, ईशान या वायव्य में भी बनाया जा सकता है। स्नान गृह में पानी के नल पूर्व या उत्तर में हो सकते हैं। गीजर आग्नेय में लगाएं। वाशिंग मशीन वायव्य में रखें। वास बेसिन व दर्पण उत्तर में रखें। जल निकासी ईशान की ओर होनी चाहिए।

शौचालय

वास्तु के नियमों के अनुरूप स्नान गृह व शौचालय पृथक-पृथक होने चाहिए। शौचालय के लिए उपयुक्त स्थान दक्षिव नैत्य के मध्य में है। यदि एक से अधिक शौचालय बनाने हों या उपयुक्त सािन पर बन पाए तो वायव्य दिशा में भी बनाने हों या उपयुक्त स्थान पर न बन पाए तो वायव्य दिशा में भी बनाया जा सकता है। शौचालय कभी भी ईशान कोण या ब्रह्म स्थान पर नहीं बनाना चाहिए। शौचालय कभी भी मुखय द्वार के सामने न बनाएं। शौच करते समय दिन में उत्तर की ओर व रात्रि दक्षिण की ओर मुख होना चाहिए। यदि एक ही शौचालय बनाना हो तो इस तरह से बनाएं कि शौच करते समय मुख उत्तर की ओर हो। शौचालय के सामने व शौचालय के साथ पूजा घर व रसोई नहीं बनानी चाहिए।

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

पंचांग विशेषांक   अप्रैल 2010

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अंतर्गत तीर्थराज कैलाश मानसरोवर का रोचक वर्णन किया गया है।

सब्सक्राइब


.