कुंडली द्वारा व्यवसाय निर्धारण

कुंडली द्वारा व्यवसाय निर्धारण  

मानव जीवन पर ग्रहों का निष्चित रूप से प्रभाव पड़ता है। हमारा व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, शौर्य, विद्या, धन और कार्य क्षेत्र सभी कुछ ग्रहों से प्रभावित होता है। बचपन में विद्यार्जन से लेकर व्यवसाय के निर्धारण तक कुंडली में स्थित सभी ग्रह विद्या तथा कार्य क्षेत्र को प्रभावित करते हैं और हर व्यक्ति का भाग्य व कर्म क्षेत्र किसी न किसी तरह से इन्हीं ग्रहों के अनुरूप ही निर्धारित होता है। व्यवसाय के लिए व्यक्ति के दशम भाव का विचार किया जाता है। लेकिन व्यक्ति विशेष को किस कर्म से या किस व्यापार या उद्योग में सफलता प्राप्त होगी। इस सबका विचार दशम भाव के साथ-साथ कुंडली में स्थित अन्य उŸाम ग्रहों की स्थिति द्वारा भी क्रिया जाएगा जैसे कुंडली के द्वितीय व एकादश भाव से हम धन योग का भी विचार करेंगे। यदि धन योग उŸाम होगा तो व्यक्ति उच्च व्यवसाय करने वाला होगा और यदि दरिद्र योग होगा तो निम्न स्तर का व्यवसाय करेगा। व्यवसाय निर्धारण के लिए जहां एक ओर हमें दशम स्थान, दशमाधिपति तथा दशमेश के नवांश पति को भी देखना चाहिए, वहीं ग्रहों की शुभ स्थिति पर भी विचार करना आवश्यक है जैसे प्रशासन के लिए सूर्य, काॅमर्स के लिए बुध व गुरु, कला के लिए शुक्र, चंद्र तथा बुध, खेलों के लिए मंगल, लेखन कार्य लिए बुध, गुरु व चंद्र तथा राजनीति के लिए सूर्य, शनि व गुरु, वकालत के लिए बुध, गुरु, शनि, ज्योतिष के लिए गुरु, बुध, केतु, चंद्र तथा इंजीनियर, डाॅक्टर, साइंस, कंप्यूटर व टेक्नोलाॅजी के लिए शनि, मंगल, राहु, केतु व सूर्य का महत्व सर्वाधिक है। हम विभिन्न व्यवसाय से जुड़े कुछ व्यक्तियों की कुंडलियों का विश्लेषण कर इन नियमों की पुष्टि स्वयं कर सकते हैं। प्रशासकीय अधिकारी की कुंडली में सूर्य का बलवान होना अत्यंत आवश्यक है। कुंडली नं. 1 में दशम भाव का स्वामी सूर्य द्वितीय भाव में बुध आदित्य योग में है और गुरु की पूर्ण दृष्टि में है। दशम भाव पर गुरु, मंगल और शुक्र की पूर्ण दृष्टि है। शुक्र और शनि का परिवर्तन योग भी है। गुरु शनि का परस्पर दृष्टि संबंध भी है। अर्थात् सूर्य, बुध, गुरु, शनि, मंगल सभी का परस्पर संबंध बन रहा है इसीलिए यह महिला एक सफल आई.ए.एस. आॅफीसर है। कुंडली नं. 2 का जातक एक सफल डाॅक्टर है। डाॅक्टरी के लिए सूर्य, बुध, गुरु, शनि तथा मंगल का बली होना आवश्यक है। इस कुंडली में गुरु, मंगल, शनि तथा चंद्र का आपस में दृष्टि संबंध बन रहा है। दशमेश बुध मंगल के नवांश में है और नवांश में मंगल दशम भाव में बहुत अच्छी स्थिति में है और दशम से दशम में स्थित मंगल गुरु और शनि को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं। इसी कारण यह एक सफल सर्जन बने। कुंडली नं. 3 में दशमेश चंद्र लग्न में पूर्ण पक्ष बली है सूर्य अपनी उच्च राशि में केंद्र में बुध आदित्य योग में स्थित है। दशमेश चंद्र की सूर्य, बुध राहु, शनि और मंगल की पूर्ण दृष्टि है तथा दशम स्थान पर गुरु की दृष्टि है। अर्थात् सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और राहू, शनि सभी में परस्पर संबंध बन रहा है। नवांश कुंडली में दशमेश चंद्र मंगल के नवांश में है तथा द्वितीय भाव में स्थित होकर उनकी वाणी को भी प्रभावशाली बना रहे हैं। यह कुंडली देश के बहुत नामी क्रिमनल वकील की है छठे भाव का मंगल भी इस कार्य के लिए उच्च राशि के लग्नेश के साथ पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है। कुंडली नं. 4 एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य की है। ज्योतिष में सफलता के लिए गुरु, बुध व द्वितीयेश का महत्व अधिक है। इनके दशम स्थान में चतुर्थेश सूर्य, द्वितीयेश व पंचमेश बुध तथा आयेश गुरु स्थित हैं। दशमेश शनि और द्वितीयेश बुध का परस्पर परिवर्तन योग है। अर्थात् दशम भाव व द्वितीय भाव अत्यंत बलवान है। इसलिए इन्होंने ज्योतिष के क्षेत्र बहुत बड़ा योगदान दिया व एस्ट्रोलाॅजीकल मेग्जीन का प्रकाशन आरंभ किया। ज्योतिष का कारक गुरु व बुध केंद्र में सूर्य के साथ होने से बहुत नाम कमाया। कुंडली नं. 5 बाला साहब ठाकरे की है। राजनीति में सफलता के लिए सूर्य, गुरु व शनि तथा लग्न व दशम भाव के सशक्त होने के अतिरिक्त उŸाम धन योग होना आवश्यक है। इस कुंडली में सूर्य दशमेश शुक्र तथ भाग्येश बुध के साथ लग्न में स्थित है तथा शनि की पूर्ण दृष्टि में भी है। दशम भाव को राहू, गुरु और मंगल की भी पूर्ण दृष्टि है। दशमेश सूर्य के नवांश में है। अर्थात् सूर्य, गुरु, शनि, मंगल, बुध सभी का आपस में संबंध बन रहा है और बाला साहब ठाकरे के राजनतैक प्रभाव को सभी जानते हैं। कुंडली में शनि व गुरु की स्थिति श्रेष्ठ धन योग बना रही है। कुंडली नं. 6 लता मंगेशकर की है कला के लिए शुक्र, बुध, चंद्र व गुरु का बलवान होना आवश्यक है। लताजी की कुंडली में लग्नेश शुक्र केंद्र में, आयेश गुरु लग्न में, तृतीयेश चंद्र स्वराशि में व द्वितीयेश और पंचमेश बुध वाणी का कारक होकर अपनी उच्चराशि में सूर्य के साथ स्थित है तथा भाग्येश व कार्येश शनि से दृष्ट है। धन कारक गुरु भी अपनी पूर्ण दृष्टि से बुध और सूर्य को देख रहे हैं। द्वितीयेश का उच्च होकर बुद्धि के भाव में शुक्र अधिष्ठित राशि के स्वामी के साथ वर्गोŸामी होकर बैठना व गुरु से दृष्ट होना इनकी विलक्षण प्रतिभा का कारण बना। यही कारण है कि पिछले 60-70 वर्षों से लताजी संगीत की दुनियां का सबसे बड़ा सितारा है। कुंडली नं. 7 धीरु भाई अंबानी की है इस कुंडली में जन्म लग्न, सूर्य, लग्न व चंद्र लग्न के एक होने के कारण यह कुंडली तीन गुना बली हो गई। लग्न में सूर्य व चंद्र की युति अखण्ड लक्ष्मी योग बनाता है। श्ािन, गुरु व भाग्येश की उŸाम स्थिति का फल जन्म लग्न, चंद्र लग्न व सूर्य लग्न के एक होने के कारण तीन गुना शुभ फलदाई सिद्ध हुआ। सफल व्यापारी बनने के लिए शनि, सूर्य, दशम भाव तथा उŸाम धन योग होना आवश्यक है। लग्न, चंद्र व सूर्य कुंडलियों के दशमेश का नवांशेश शनि होने से व्यापारिक क्षेत्र में सफलता मिली। कुंडली नं. 8 सचिन की कुंडली में कन्या लग्न है तथा मंगल पूर्ण बलवान है। खेल जगत् में सफलता के लिए इनके उच्चराशिस्थ मंगल ने इन्हें लौह पुरुष बनाया। नवांश में भी मंगल अग्निराशि में स्थित है। खेल जगत् में सफलता के लिए मंगल, बुध और बलवान पंचम भाव शुभ फलदाई सिद्ध हुए। मंगल पराक्रमेश होकर उच्चराशिस्थ है। इससे स्पष्ट होता है कि खेलों में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए पराक्रम भाव, मंगल, बुध तथा पंचम भाव (मनोरंजन) का शुभ होना आवश्यक है। कुंडली नं. 9 आइंस्टाइन की कुंडली में सूर्य, बुध, शनि, उच्च राशि के शुक्र के साथ दशम भाव में ही बैठे हैं और मंगल चंद्रराशीश होकर उच्च के हैं और रिसर्च के अष्टम भाव में राहू से संयुक्त हैं। विज्ञान के क्षेत्र में सफलता के लिए शनि, मंगल, सूर्य, राहू व बुध का बली होना अपेक्षित है। इनकी कुंडली में यह ग्रह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से दशम भाव को प्रभावित कर रहे हैं। उच्चराशि के पंचमेश, उच्चराशि के चंद्रराशीश तथा गुरु की पंचम भाव पर दृष्टि ने इन्हें महा बुद्धिमान बनाया। कुंडली नं. 10 लेफ्टिनेंट जनरल की है मिलिटरी व्यवसाय के लिए मंगल सूर्य और शनि का बलवान होना आवश्यक है। इस कुंडली में लग्नेश मंगल दशमेश सूर्य के साथ पंचम त्रिकोण में मित्र गुरु की राशि में बैठे हैं। किसी भी पाप ग्रह से दृष्ट नहीं है और नवांश में सूर्य के साथ सूर्य की राशि में मंगल दशम भाव में अत्यंत बली होकर बैठे हैं। मंगल और सूर्य के साथ शनि भी दशम भाव में वक्री होकर बली है और शुक्र, बुध व शनि आपस में एक दूसरे को देख रहे हैं अर्थात् मंगल, सूर्य, शनि, शुक्र व बुध सभी का परस्पर संबंध राजयोग के साथ-साथ इन्हें सेना में उच्च पद प्राप्त करवाया। कुंडली नं. 11, चाटर्ड एकाउंटेंट के व्यवसाय के लिए गुरु, शुक्र और बुध का बलवान होना आवश्यक है। प्रस्तुत कुंडली में पंचमेश गुरु लग्न में, कर्मेश शुक्र चतुर्थ में तथा धनेश व लाभेश बुध लग्नेश सूर्य व उच्च शनि के साथ तृतीय भाव में भिन्न राशि में बैठे हैं। चतुर्थेश व भाग्येश मंगल भी द्वितीय धन भाव में बैठे हैं। दशमेश शुक्र नवांश में सूर्य की राशि में द्वादश भाव में होने से इनके प्रशासन में भी बहुत अच्छे संबंध हैं। यहां पर पंचम भाव तथा दशम भाव अत्यंत बलवान है। क्योंकि पंचमेश गुरु पंचम भाव को तथा योग कारक ग्रह मंगल भी पंचम तथा नवम को देख रहे हैं। इन सब राजयोगों के कारण ये सज्जन एक बहुत जाने माने चाटर्ड एकाउंटेंट है तथा बहुत यश और धन कमा रहे हैं। इन सभी कुंडलियों में एक बात समान है कि सभी में शुभ ग्रह तथा पाप ग्रह उत्तम स्थान में स्थित हैं तथा सभी जातकों को उनका शुभ फल उनकी दशाओं व अंतर्दशाओं तथा गोचर में मिला। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि अच्छे ग्रह होते हुए भी अगर एक अशुभ ग्रह की दशा जवान अवस्था से ही शुरु हो जाएगा तो शुभ ग्रह भी अपना अच्छा फल देने में असमर्थ हो जाते हैं। एक ऐसी ही कुंडली मैं यहां दिखाना चाहूंगी। कुंडली 12 एक महिला की कुंडली है। इसमें सप्तमेश गुरु तथा लग्नेश बुध मंगल के साथ शनि से दृष्ट होकर अष्टम भाव में बैठे हैं। अत्यंत गरीबी में बचपन बीता विवाह के पश्चात पति ने कोई काम नहीं किया। इसके कर्म जीवन को देखें तो इनका दशमेश भी अष्टम में है। दशम भाव में शुक्र, राहु, गुरु चंडाल योग बना रहे हैं। इसलिए इनका जीवन काफी निर्धनता में बीता और अभी एक अस्पताल में दाई का कार्य कर रही है। अभी मंगल की दशा चल रही है। अंत में हर कुंडली में व्यवसाय का निर्धारण करने के लिए शुभ और अशुभ ग्रहों की स्थिति दशमेश का अन्य ग्रहों से संबंध, नवांश कुंडली में ग्रहों का बल तथा दशा को भी महत्व देना चाहिए।


कैरियर और व्यवसाय विशेषांक  अप्रैल 2010

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.