महत्वाकांक्षा की बलिवेदी पर मोनिका बेदी

महत्वाकांक्षा की बलिवेदी पर मोनिका बेदी  

निरंतर आगे बढ़ने की प्रबल इच्छा को लेकर मोनिका बेदी ऐसे लोगों के संपर्क में आई कि महत्वाकांक्षा पूर्ति के लिए वह हर उचित अनुचित सीढ़ी का प्रयोग करने लगी। आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षा संस्थान में अध्ययनरत मोनिका की ग्रह दशाओं में ऐसा क्या था कि वह अबू सलेम से जुड़कर अपने कैरियर को रसातल पर ले आई... पिछले वर्ष मोनिका बेदी का नाम काफी चर्चित रहा। फिल्मों के अतिरिक्त अंडरवल्र्ड से जुड़े उसके ताल्लुकात की खबरें समाचार पत्रों और अन्य समाचार माध्यमों में सुर्खियों में रहीं। उसने वह कुछ किया जिसकी कल्पना भी समाज और उसके परिजन नहीं कर सकते थे। यहां प्रस्तुत है उसके जीवन और जीवन में घटी विभिन्न घटनाओं का एक विस्तृत और ज्योतिषीय विश्लेषण। मोनिका का जन्म होशियारपुर के नजदीक एक गांव में हुआ, पर उसके जन्म के दस माह पश्चात ही उसके पिता नाॅर्वे में जाकर बस गए। उसका लालन-पालन नाॅर्वे की संस्कृति में हुआ। सन् 1992 में वह इंग्लैंड के आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य की शिक्षा ग्रहण कर रही थी, जब उसकी मुलाकात मनोज कुमार के पुत्र कुणाल से हुई और समझा जाता है कि मनोज कुमार ने कुणाल के साथ उसकी पहली फिल्म साइन की। बाॅलीवुड में कदम रखने के पश्चात मोनिका ने कई फिल्मों में काम किया, जिनमें तिरछी टोपी वाले, जोड़ी नं. 1, जानम समझा करो, काला साम्राज्य, प्यार इश्क और मोहब्बत प्रमुख थीं। इसके अतिरिक्त मोनिका ने तेलुगु फिल्मों में भी काम किया और तेलुगु फिल्में उसे अधिक रास आईं क्योंकि मोनिका अपने प्रोड्यूसर को हमेशा खुश रखती थी और पैसे के लिए किसी भी तरह की भूमिका करने से परहेज नहीं करती थी। वहीं उसकी मुलाकात मुकेश दुग्गल से हुई जो उसे दुबई में स्टेज शो कराने के लिए ले गए और वहां वह अबू सलेम से मिली। अबू सलेम मोनिका से काफी प्रभावित हुआ और उससे हिंदी फिल्मों में काम दिलाने का पक्का वायदा किया। सलेम ने अपने वायदे को पूरा करते हुए उसे कई हिंदी फिल्मों में काम दिलाया लेकिन वह खुद को अबू सलेम के जाल से न बचा सकी और धीरे-धीरे अंडरवल्र्ड की गतिविधियों में खुद भी शामिल हो गई। मोनिका को 2002 में लिस्बन में अबू सलेम के साथ गिरफ्तार किया गया। अबू सलेम का नाम सन् 1993 में हुए मुंबई बम कांड से जुड़ा था जिसमें करीब 250 व्यक्ति मारे गए थे। अंडरवल्र्ड से जुड़े होने के कारण मोनिका पर भी मामला दर्ज है। वह अबू सलेम की पत्नी की तरह उसके साथ रह रही थी, हालांकि उसने उसके साथ विवाह से इन्कार किया है और अपने लिए अदालत से न्याय के लिए गुहार लगाई है। आइए देखें कि उसकी कुंडली क्या कहती है। मोनिका बेदी का जन्म 18 जनवरी 1975 को होशियारपुर में रात्रि 23 बजकर 10 मिनट पर शनि की महादशा के अंतर्गत हुआ था। वर्तमान में (3/11/2003 से 3/11/2007) शुक्र की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा चल रही है जो 3 नवंबर 2007 चलेगी। किसी भी कुंडली में प्राकृतिक पापी ग्रह मंगल, शनि, राहु या केतु यदि सुख भाव में हो, चतुर्थेश सुखेश छठे, आठवें या 12वें भाव में हो, सुख कारक ग्रह शुक्र कमजोर हो और इन ग्रहों पर पाप दृष्टि हो और वे षड्बल एवं नवांश में भी कमजोर हांें, तो जातक को सुख नहीं मिलता। परंतु इन सब के बावजूद यदि राजयोग होता है तो सुख अवश्य मिलता है। मोनिका बेदी की कुंडली में पंचमेश व दशमेश शनि और दशमेश बुध का राशि परिवर्तन योग है और केंद्र व त्रिकोण का संबंध भी है किंतु शनि कन्या लग्न के लिए षष्ठेश होकर अकारक भी है। बुध एवं शुक्र राजयोग स्थापित करते हुए पंचम त्रिकोण में सूर्य के साथ स्थित हैं। इनका द्वादशेश सूर्य के साथ बैठने के कारण राजयोग भंग हुआ है। वर्तमान समय में शुक्र की महादशा के अंतर्गत शुक्र की अंतर्दशा चल रही है। शुक्र कन्या लग्न के लिए कारक ग्रह है किंतु कोई भी ग्रह अपनी दशा या अंतर्दशा में विशेष फल देने में सक्षम नहीं होता। सुखेश गुरु लग्न से छठे भाव में प्राकृतिक पापी ग्रह सूर्य एवं क्षीण चंद्र के मध्य पाप कर्तरी योग में पीड़ित है। क्षीण चंद्र शनि, मंगल व राहु के पाप प्रभाव में है, जो चंद्र को और अधिक खराब कर रहे हैं। चंद्र अकारक तथा एकादशेश होते हुए अपने शत्रु व षष्ठेश शनि के नक्षत्र उत्तराभाद्र में स्थित है। तृतीयेश व अष्टमेश अकारक पापी ग्रह मंगल चतुर्थ सुख स्थान में स्वयं प्राकृतिक पापी ग्रह सूर्य एवं राहु के मध्य पाप कर्तरी योग से पीड़ित और शनि से दृष्ट भी है। मंगल केतु के नक्षत्र मूला में स्थित है और केतु नीचस्थ होकर नवांश में वर्गोत्तम है। मंगल नवांश में बलवान है। कुल मिलाकर मंगल पर किसी भी शुभ ग्रह की दृष्टि नहीं है। सुख कारक शुक्र मित्र राशि में त्रिकोण भाव में कारक होकर विद्या, बुद्धि, अंतज्र्ञान आदि की वृद्धि कर रहा है। शुक्र एवं बुध अस्त नहीं हैं। शुक्र एवं गुरु की स्थिति भी बेहतर है। अतः शुक्र की महादशा में सुख अवश्य मिलेगा। जातक को सुख तभी मिलता है, जब दशा, अंतर्दशा व गोचर तीनों सही चल रहे हों। मोनिका का जन्म शनि की महादशा के अंतर्गत हुआ था। 3/11/1999 तक शनि की महादशा में निश्चित रूप से कठिनाइयां आई होंगी। इसके पहले 1979 से 1996 तक बुध की महादशा अच्छी बीती होगी। परंतु बुध में पंचमेश व षष्ठेश शनि की अंतर्दशा व साढ़े साती के कारण पढ़ाई में रुकावट आई होगी। कन्या लग्न के लिए लग्नेश व दशमेश बुध तथा त्रिकोणेश शुक्र शुभ एवं योगकारक ग्रह हैं। बुध जातक को हास्य कलाकार, बनाता है, उसे चिर यौवन प्रदान करता है, तो शुक्र सुंदर, शौकीन और कलाप्रेमी बनाता है। इन दोनों के आपसी संबंध एवं लग्नेश सहित इनके बलवान होने से मोनिका को फिल्मी दुनिया में एक कलाकार के रूप में प्रसिद्धि मिली। द्वादशेश सूर्य पंचम भाव में बुध एवं शुक्र द्वारा निर्मित राजयोग को भंग करते हुए पंचम भाव में प्रेम से संबंधित भावनाओं को प्रबल कर रहा है। यही कारण है कि उसका चरित्र खराब हुआ। लग्न, चंद्र, लग्नेश व चंद्र लग्न के स्वामी और 1996 से 2003 तक चली केतु की महादशा आदि सब ने मिलकर उसके चरित्र के खराब होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लग्नेश बुध पापाक्रांत चंद्र के नक्षत्र पर है, अतः मन का विचलित होना स्वाभाविक था। यही नहीं लग्न को पापी चंद्र, केतु की दृृष्टि केतु की महादशा में, केतु भी चंद्र के नक्षत्र पर रहकर, चंद्र ग्रस्त होकर, शनि के नक्षत्र उत्तराभाद्रपद पर तथा चंद्र नक्षत्र स्वामी शनि पर मंगल की दृष्टि के कारण मन का कारक चंद्र और लग्नेश बुध पीड़ित हैं। इसलिए मन विचलित हुआ। केतु की महादशा में 25/11/1996 से 25/11/2003 तक उसके जीवन में उतार चढ़ाव आया और उसकी प्रतिष्ठा एवं मान सम्मान को ठेस पहुंची। वर्तमान समय में शुक्र की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा विशेष शुभ फलदायी नहीं सिद्ध होगी। भविष्य में 27/3/2007 से 25/3/2008 तक शुक्र में सूर्य की अंतर्दशा चलेगी। सूर्य द्वादशेश व अकारक है अतः वह कोई शुभ फल नहीं देगा, तब तक जातका को कष्ट भोगना ही है। फिर शुक्र की महादशा में चंद्र की अंतर्दशा में 26/3/2008 से 24/11/2009 के मध्य उसे शुभ फल मिलेगा। इस लग्न के लिए चंद्र मीन राशि में लग्न से सप्तम भाव में तथा अपने घर से भाग्य स्थान में है और शुक्र की दशा चल रही है और शुक्र लग्न से सप्तमेश चंद्र तृतीय भाव में है। जब शुक्र में चंद्र की अंतर्दशा चलेगी और गोचर में शुक्र व चंद्र के साथ गुरु का प्रभाव भी जब गोचर में शुभ होगा, तब उसेे शुभ फल की प्राप्ति होगी। 25 दिसंबर 2008 से मार्च 2009 तक गोचर में ग्रह शुभ फल देने की स्थिति में होंगे क्योंकि लग्न से पंचम भाव में गुरु, राहु और अन्य ग्रह समय-समय पर शुक्र का साथ देंगे। मोनिका को सुख तो जन्म से ही मिलता आया है। परंतु बुध की महादशा में गुरु की अंतर्दशा ने अनेक उतार चढ़ाव दिखाए हैं। कन्या लग्न के लिए केंद्राधिपति दोष से गुरु दूषित है किंतु छठे भाव में गुरु की स्थिति ने दाम्पत्य सुख नहीं दिया फिर भी जीवन साथी के रूप में अन्य पुरुष के साथ रही। भविष्य में उसका विवाह होने की संभावना है क्योंकि लग्न से सप्तम में चंद्र एवं पंचम में शुक्र बलवान है। और दोनों के बीच बृहस्पति चंद्र से द्वादश भाव में स्थित है। लेकिन क्योंकि सप्तमेश गुरु षष्ठ भाव में है। इसलिए विवाहोपरांत भी उसे सुख मिलने की संभावना कम है। गुरु केन्द्राधिपति दोष से ग्रस्त है और पति का कारक भी है। यही नहीं, नवांश में गुरु नीचस्थ शनि के साथ है। नवांश कुंडली में ही सप्तम में राहु नीच का है परंतु शुक्र और गुरु अस्त नहीं हैं। इन सारे योगों के फलस्वरूप उसके विवाह की संभावना है। चंद्र लग्न से सप्तम का स्वामी बुध शुक्र के साथ है और चंद्र लग्न से एकादश स्थान में भी है। हो सकता है कि सूर्य की महादशा में वह विवाहित सुख से वंचित रह जाए। वहीं यह भी संभव है कि चंद्र की महादशा में वैवाहिक सुख मिले, परंतु मंगल की दशा में फिर से उसके छिन जाने के संकेत हैं। तात्पर्य यह है कि इसका वैवाहिक जीवन संतुलित नहीं रहेगा। चंद्र लग्न से दशम में मंगल और एकादश में सूर्य, बुध और शुक्र स्थित हैं। भाग्येश मंगल की दशम में और भाग्य स्थान में राहु और द्वादश में गुरु की स्थिति उन्हें भाग्य का लाभ अधिकतर विदेश से दिलवाएगी।


रुद्राक्ष एवं आध्यात्मिक वास्तु विशेषांक   फ़रवरी 2007

प्रकृति के कोष से हमें कई जिवानोपर्यांत वस्तुएं प्राप्त होती है. ऐसी ही वस्तुओं में एक है रुद्राक्ष. रुद्राक्ष का आध्यात्मिक और औषधीय महत्त्व बहुत है. शुद्ध रुद्राक्ष की पहचान कैसे की जाए? रुद्राक्ष का सम्बन्ध भगवान शिव से कैसे जुडा हुआ हैं? रुद्राक्ष धारण

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